अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित

अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित

अरुंधति रॉय की बहुप्रशंसित किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। इसका हिंदी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है।

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लघु-कथा: काकी - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त

श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।

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कहानी: काई - रांगेय राघव

कहानी: काई – रांगेय राघव

डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:

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कहानी: नूरी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: नूरी – जयशंकर प्रसाद

नूरी एक नाचने गाने वाली थी जो शहंशाह अकबर की बेगम सुलताना के लिए काम करती थी। वह शाहजादा याकूब खाँ से प्रेम करती थी। वह चाहती थी याकूब अपने उस मकसद को भुला दे जिसे पूरा करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ था। नूरी जानती थी इस मकसद को पूरा करने में याकूब की जान भी जा सकती थी। आखिर क्या था याकूब का मकसद? क्या वो पूरा हुआ? क्या नूरी को उसका प्यार मिला?

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लेख: गुप्त ठग - प्रताप नारायण मिश्र

लेख: गुप्त ठग – प्रताप नारायण मिश्र

देश में शुद्ध चीज़ें मिलना दूभर हैं। कई बार देखा गया है कि मिलावटी सामान बेचने वाले धर्म-कर्म की बातें अधिक करते हैं लेकिन धोखा देते हुए ये बातें खुद भूल जाते हैं। प्रताप नारायण मिश्र का यह लेख ऐसे ही गुप्त ठगों को लेकर लिखा गया है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: झाँकी - प्रेमचंद

कहानी: झाँकी – प्रेमचंद

कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:

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कहानी: घर-जमाई - प्रेमचंद

कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद

हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:

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लघु-कथा: रेबीज़ - आलोक कुमार

लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार

कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:

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कहानी: अधूरी मूरत - रांगेय राघव

कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव

कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:

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सुशीला सदन - पराग डिमरी | नोशन प्रेस

पुस्तक अंश: सुशीला सदन – पराग डिमरी

‘सुशीला सदन’ लेखक पराग डिमरी की सातवीं पुस्तक है। यह एक निम्न वर्गीय महिला सुशीला के अपने घर के बनाने की जद्दोजहद को दर्शाने के बहाने, उस जीवन की झलक भी दिखलाती है जो शायद आज के समय में भौतिक चमक-दमक के आकर्षण के चलते अब दिखनी धुँधली , या बदरंग सी हो गयी है। एक बुक जर्नल पर हम ‘सुशीला सदन’ का यह शुरुआती अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं:

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कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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स्टॉप प्रेस - सुरेन्द्र मोहन पाठक | साहित्य विमर्श प्रकाशन

पुस्तक अंश: स्टॉप प्रेस – सुरेन्द्र मोहन पाठक

‘स्टॉप प्रेस’ लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का हालिया पुनः मुद्रित हुआ उपन्यास है। यह उनकी सुनील शृंखला का उपन्यास है। एक बुक जर्नल आपके लिए स्टॉप प्रेस का शुरुआती अंश यहाँ प्रस्तुत कर रहा है। उम्मीद है यह अंश आपको पसंद आएगा:

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