क्या लिखै - प्रताप नारायण मिश्र

क्या लिखै – प्रताप नारायण मिश्र

‘क्या लिखै’ प्रताप नारायण मिश्र का निबंध है। वह पाठक से पूछ रहे हैं कि उन्हें क्या लिखना चाहिए? आखिर वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? आप भी पढ़ें:

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कहानी: जैसिरी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: जैसिरी – राहुल सांकृत्यायन

पंदहा गाँव के जैसिरी को अक्षर ज्ञान नहीं मिला था लेकिन फिर भी उनके भीतर ज्ञान की कमी नहीं थी। वह अपनी उम्र वाले लोगों से एकदम अलग थे। आखिर उन्होंने ये ज्ञान कैसे हासिल किया था? वह क्या चीजें थीं जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थीं? पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की यह कहानी जैसिरी:

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वही छोटा-सा तिरछा दाँत - राम 'पुजारी' | फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशंस

पुस्तक अंश: वही छोटा-सा तिरछा दाँत – राम ‘पुजारी’

किशोरवय उम्र के प्यार का असर कुछ और ही होता है। 90 के दशक में जब सम्पर्क के माध्यम कम होते थे तो ऐसे प्रेम की कसक अपने चरम पर होती थी। इसी दशक के दो किरदारों कृष्ण और श्रावणी की प्रेम कहानी लेखक राम ‘पुजारी’ अपने उपन्यास ‘वही तिरछा सा छोटा दाँत’ में पाठकों के समक्ष लेकर आए हैं। एक बुक जर्नल पर पढ़ें इस उपन्यास का प्रथम अध्याय ‘पहली नज़र’:

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लघु-कथा: फंदा - आनंद के सिंह

लघु-कथा: फंदा – आनंद के सिंह

‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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मेरी पहली यात्रा - राहुल सांकृत्यायन

मेरी पहली यात्रा – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन अपनी घुमक्कड़ी के लिए जाने जाते हैं। वह अपने जीवन में कई दुर्गम जगहों में गये। पर इस सबकी शुरुआत कैसे हुई? उनकी पहली यात्रा कैसी थी? आइए जानते हैं:

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सुरेन्द्र मोहन पाठक की पुस्तक है प्री ऑर्डर के लिए तैयार; 27 साल बाद फिर हुआ है रिप्रिंट
कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा - सुमन बाजपेयी

कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा – सुमन बाजपेयी

कथावाचिका को लगता है कि उसका पति सुशांत उसका खयाल नहीं रखता है। लापरवाह है। उसके इस रवैये से वह परेशान रहती है। आज भी सुशांत ने कुछ ऐसा ही किया था। सुशांत ने आखिर क्या किया था? आगे क्या हुआ? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘लौटकर यहीं आऊँगा’:

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मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता - प्रताप नारायण मिश्र

मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता – प्रताप नारायण मिश्र

मित्रों से धोखा हम सभी ने कभी न कभी खाया है। पर क्या कपटी मित्र बुरा होता है। प्रताप नारायण मिश्र के अनुसार कपटी मित्र भी बुरा नहीं होता है। वह ऐसा क्यों मानते हैं। पढ़ें उनका लेख ‘मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता’:

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कहानी: दृष्टिकोण - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: दृष्टिकोण – सुभद्रा कुमारी चौहान

निर्मला और रमाकांत दोनों दुनिया की नज़र में आदर्श दंपति थे। पर उनकी प्रकृति अलग-अलग थी। जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण अलग अलग था। इसी कारण कभी कभार उनके बीच मतभेद भी हो जाता था। आखिर इस अलग-अलग दृष्टिकोण का क्या नतीजा निकला? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘दृष्टिकोण’:

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कथा संग्रह 'पनाळ' का हुआ लोकार्पण

कथा संग्रह ‘पनाळ’ का हुआ लोकार्पण

2 अप्रैल 2026 को दून पुस्तकालय के सभागार में समय साक्ष्य द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘पनाळ’ का लोकार्पण और परिचर्चा का आयोजन हुआ। कहानियों का अनुवाद कांता घिल्डियाल द्वारा किया गया है।

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फिल्म और साहित्य - प्रेमचंद

फिल्म और साहित्य – प्रेमचंद

मई 1935 में प्रेमचंद का लिखा एक लेख ‘सिनेमा और साहित्य’ ‘लेखक’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पढ़ने के बाद नरोत्तमप्रसाद नागर ने उस लेख का प्रतिवाद लिखा था। प्रेमचंद का वो लेख, नरोत्तमप्रसाद का प्रतिवाद और उनके प्रतिवाद का दिया गया प्रेमचंद का जवाब यहाँ पर दिया जा रह है। यह पूरा लेख हंस पत्रिका में जून 1935 में प्रकाशित हुआ था। आज भी सिनेमा और साहित्य के बीच की यह बहस प्रासंगिक है। आप भी इसे पढ़ें:

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कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सुपर्णा पं. रामखेलावन की पुत्री थी जिसका विवाह उन्होंने पं. गजानंद शास्‍त्री के साथ किया था। वह सुपर्णा से लगभग तीस साल बढ़े थे और सुपर्णा से उनकी चौथी शादी हुई थी। यह विवाह कैसे हुआ और सुपर्णा किस तरह से श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी बनी और श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी का जीवन आगे कैसा रहा? इसकी कथा आप भी पढ़ें:

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