क्या लिखै – प्रताप नारायण मिश्र
‘क्या लिखै’ प्रताप नारायण मिश्र का निबंध है। वह पाठक से पूछ रहे हैं कि उन्हें क्या लिखना चाहिए? आखिर वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? आप भी पढ़ें:
क्या लिखै – प्रताप नारायण मिश्र Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘क्या लिखै’ प्रताप नारायण मिश्र का निबंध है। वह पाठक से पूछ रहे हैं कि उन्हें क्या लिखना चाहिए? आखिर वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? आप भी पढ़ें:
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मई 1935 में प्रेमचंद का लिखा एक लेख ‘सिनेमा और साहित्य’ ‘लेखक’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पढ़ने के बाद नरोत्तमप्रसाद नागर ने उस लेख का प्रतिवाद लिखा था। प्रेमचंद का वो लेख, नरोत्तमप्रसाद का प्रतिवाद और उनके प्रतिवाद का दिया गया प्रेमचंद का जवाब यहाँ पर दिया जा रह है। यह पूरा लेख हंस पत्रिका में जून 1935 में प्रकाशित हुआ था। आज भी सिनेमा और साहित्य के बीच की यह बहस प्रासंगिक है। आप भी इसे पढ़ें:
फिल्म और साहित्य – प्रेमचंद Read More
कहानी क्या होती है? उसकी क्या विशेषताएँ हैं? कहानी और उपन्यास में क्या फर्क है? इन प्रश्नों का उत्तर तो शिवपूजन सहाय अपने इस लेख में देते ही हैं साथ ही अपने समय के कुछ चुनिंदा कहानिकारों और चुनिंदा कहानियों से पाठकों का परिचय करवाते हैं। आप भी पढ़ें:
कहानी कला – शिवपूजन सहाय Read More
योगेश मित्तल को लेखन के क्षेत्र में आने का मौका कैसे मिला और किस तरह उन्होंने अपने साथी लेखक बिमल चटर्जी के साथ मिलकर एक शृंखलाबद्ध उपन्यास लिखना शुरु किया? यह वह इस संस्मरण में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:
दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला Read More
जयदीप शेखर लेखक और अनुवादक हैं। बांग्ला साहित्य में रुचि रखते हैं। बांग्ला से हिंदी में उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया है। बांग्ला लेखक प्रेमेंद्र मित्र के किरदार घनादा और उसको लेकर लिखी गयी कहानियों का वह इस लेख में पाठक से परिचय करवा रहे हैं। आप भी पढ़ें:
कहाँ-कहाँ न गये घना’दा – जयदीप शेखर Read More
हॉरर कथाएँ मनुष्य को हमेशा से ही आकर्षित करती रही हैं। यह सिहरन पैदा करने वाले किस्से एक तरह का रोमांच पैदा करते हैं और व्यक्ति इसी रोमांच की तलाश में हॉरर विधा की पुस्तकों तक भी जाता है। वर्ष 2025 में हिंदी में भी काफी रचनाएँ हॉरर विधा में प्रकाशित हुई हैं। उनमें से कुछ रचनाओं की सूची हम आपके समक्ष यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।
वर्ष 2025 में पाठकों को खौफ के नये सफर पर ले जाने आयी हिंदी की ये पुस्तकें; आपने कितनी पढ़ी हैं? Read More
लेखक पराग डिमरी उस पीढ़ी के हैं जिन्होंने हिंदी लोकप्रिय साहित्य का स्वर्णिम काल देखा है। अपने इस लेख में वह न केवल उस स्वर्णिम काल का वर्णन कर रहें हैं बल्कि इस विधा के धीरे धीरे कम होने के कारणों पर रोशनी डालते हुए और मौजूदा स्थिति से भी पाठक को अवगत करा रहे हैं। आप भी पढ़ें:
लेख: ज़ारी रहेगा लोकप्रिय लेखन लेकिन… – पराग डिमरी Read More
साहित्य क्या है? साहित्य और प्रोपागैंडा में क्या फर्क है? वह क्या है जो साहित्य से प्रोपोगैंडा को जुदा करता है? इन्हीं सब बातों को साफ करते हुए प्रेमचंद ने 1932 में ये लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:
साहित्य का आधार – प्रेमचंद Read More
बातचीत करना भी एक कला है। हर कोई सुरुचिपूर्ण बातें न कर पाता है और न बातों से श्रोताओं को बाँध ही पाता है। कैसे इस कला का धीरे-धीरे लोप हो रहा है और इसके क्या नुकसान होते हैं। किस तरह इस कला में प्रवीण बना जा सकता है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं ये दर्शाते हुए प्रेमचंद ने यह लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:
बातचीत करने की कला – प्रेमचंद Read More
कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:
कहानी कला – प्रेमचंद Read More
पॉकेट बुक्स में जितने लेखकों ने अपने नाम से लिखा है उससे अधिक लेखकों ने प्रकाशकों के लिए भूत नाम या ट्रेडनाम से लिखा है। आखिर ये चलन कब शुरु हुआ? इसी पर रोशनी डाल रहे हैं श्री योगेश मित्तल जिन्होंने कई प्रकाशकों के लिए ट्रेड नाम से सेकड़ों उपन्यास लिखे हैं। आप भी पढ़ें:
पॉकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत – योगेश मित्तल Read More
कथासम्राट प्रेमचंद की पहली रचना कौन सी थी? अपने बचपन में उन्होंने क्या क्या पढ़ा था? यह सब वह इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
मेरी पहली रचना – प्रेमचंद Read More