कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! - किसलय पंचोली

कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली

‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: अमराई - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अमराई – सुभद्रा कुमारी चौहान

वह अमराई ठाकुर साहब की थी। वह ठाकुर साहब जो कि ब्रिटिश सरकार के खैरख्वाह थे। पर कुछ समय से उस अमराई में असहयोगियों का जमघट लगने लगा था। ठाकुर साहब तक ये खबर जब पहुँची तो वो अमराई में पहुँचे। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘अमराई’:

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कहानी: जैसिरी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: जैसिरी – राहुल सांकृत्यायन

पंदहा गाँव के जैसिरी को अक्षर ज्ञान नहीं मिला था लेकिन फिर भी उनके भीतर ज्ञान की कमी नहीं थी। वह अपनी उम्र वाले लोगों से एकदम अलग थे। आखिर उन्होंने ये ज्ञान कैसे हासिल किया था? वह क्या चीजें थीं जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थीं? पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की यह कहानी जैसिरी:

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कहानी: दृष्टिकोण - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: दृष्टिकोण – सुभद्रा कुमारी चौहान

निर्मला और रमाकांत दोनों दुनिया की नज़र में आदर्श दंपति थे। पर उनकी प्रकृति अलग-अलग थी। जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण अलग अलग था। इसी कारण कभी कभार उनके बीच मतभेद भी हो जाता था। आखिर इस अलग-अलग दृष्टिकोण का क्या नतीजा निकला? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘दृष्टिकोण’:

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कथा संग्रह 'पनाळ' का हुआ लोकार्पण

कथा संग्रह ‘पनाळ’ का हुआ लोकार्पण

2 अप्रैल 2026 को दून पुस्तकालय के सभागार में समय साक्ष्य द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘पनाळ’ का लोकार्पण और परिचर्चा का आयोजन हुआ। कहानियों का अनुवाद कांता घिल्डियाल द्वारा किया गया है।

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कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सुपर्णा पं. रामखेलावन की पुत्री थी जिसका विवाह उन्होंने पं. गजानंद शास्‍त्री के साथ किया था। वह सुपर्णा से लगभग तीस साल बढ़े थे और सुपर्णा से उनकी चौथी शादी हुई थी। यह विवाह कैसे हुआ और सुपर्णा किस तरह से श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी बनी और श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी का जीवन आगे कैसा रहा? इसकी कथा आप भी पढ़ें:

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कहानी: आवारागर्द - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: आवारागर्द – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

वह एक आवारागर्द था। आवारागर्दी का जीवन जीता है। ऐसे ही वह काश्मीर पहुँच गया था। वहाँ जाकर उसने क्या किया? जानने के लिए पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘आवारागर्द’

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विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में सभा आयोजित

विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में सभा आयोजित

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार और साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में गुरुवार शाम सभा का आयोजन किया गया। राजकमल प्रकाशन और रज़ा फ़ाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सभा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुई।

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कहानी: टू फैट लेडीज़ - अनुपमा नौडियाल

कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल

क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:

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वर्ष 2025 के इफको साहित्य सम्मान और इफको युवा साहित्य सम्मान हुए घोषित

वर्ष 2025 के इफको साहित्य सम्मान और इफको युवा साहित्य सम्मान हुए घोषित

हिंदी साहित्य में ग्रामीण सरोकारों को उभारने के लिए प्रदान किए जाने वाले इफको साहित्य सम्मान और इफको युवा साहित्य सम्मान की घोषणा की जा चुकी है।
पढ़ें यह विस्तृत खबर:

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कहानी: पत्रकार - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: पत्रकार – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

मि. सिन्हा ‘लाउड स्पीकर’ नामक समाचार पत्र में एक पत्रकार थे। उनके सम्पादक ने उन्हें एक काम सौंपा था। क्या था ये काम? क्या वो ये कार्य कर पाए?
पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘पत्रकार’:

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डॉ. योगेश धस्माना की पुस्तक 'उत्तराखंड की विभूतियाँ' का हुआ लोकार्पण

डॉ. योगेश धस्माना की पुस्तक ‘उत्तराखंड की विभूतियाँ’ का हुआ लोकार्पण

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में डाॅ. योगेश धस्माना की पुस्तक ‘उत्तराखंड की विभूतियाँ’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। समय साक्ष्य द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक द्वारा उत्तराखंड की 120 से अधिक विभूतियों की जानकारी दी गयी है।

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