कहानी: मुस्कान - चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

कहानी: मुस्कान – चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

उस मुस्कान ने ही सत्येंद्र की सोच की दिशा बदल दी थी। अब वह अपना सब कुछ भूलकर उसी मुस्कान के विषय में सोचा करते। आखिर किसकी थी ये मुस्कान? पढ़ें चंडीप्रसाद ‘हृदयेश’ की यह कहानी ‘मुस्कान’:

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कहानी: घर-जमाई - प्रेमचंद

कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद

हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:

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कहानी: अवसरवाद - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: अवसरवाद – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

रायबहादुर सम्पतिलाल शहर के धनाढ्य और सम्मानित व्यक्ति थे। अब उनकी इच्छा एम० एल० ए० का टिकट पाने की थी। क्या उनकी यह मुराद पूरी हुई? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘अवसरवाद’:

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कहानी: अधूरी मूरत - रांगेय राघव

कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव

कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:

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सुशीला सदन - पराग डिमरी | नोशन प्रेस

पुस्तक अंश: सुशीला सदन – पराग डिमरी

‘सुशीला सदन’ लेखक पराग डिमरी की सातवीं पुस्तक है। यह एक निम्न वर्गीय महिला सुशीला के अपने घर के बनाने की जद्दोजहद को दर्शाने के बहाने, उस जीवन की झलक भी दिखलाती है जो शायद आज के समय में भौतिक चमक-दमक के आकर्षण के चलते अब दिखनी धुँधली , या बदरंग सी हो गयी है। एक बुक जर्नल पर हम ‘सुशीला सदन’ का यह शुरुआती अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं:

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कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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20 मई को होगा दास्तानगो महमूद फ़ारूक़ी की किताब 'दास्तान-ए-गुरुदत्त' का लोकार्पण

20 मई को होगा दास्तानगो महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का लोकार्पण

18वें हैबिटैट फ़िल्म फ़ेस्टिवल 2026 के अंतर्गत 20 मई, बुधवार की शाम इंडिया हैबिटैट सेंटर के गुलमोहर हॉल में एक विशेष सत्र आयोजित होगा। इस दौरान मशहूर दास्तानगो और रंगकर्मी महमूद फ़ारूक़ी की किताब ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का लोकार्पण किया जाएगा। यह किताब फ़िल्मकार गुरुदत्त के जीवन और उनके समय के भारतीय सिनेमा की गहरी पड़ताल करती है।

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कहानी: परीक्षा - प्रेमचंद

कहानी: परीक्षा – प्रेमचंद

नादिरशाह ने दिल्ली फतेह कर ली थी। क्रूरता की सभी हदें उसने पार कर ली थीं। जब वह महल में पहुँचा तो उसने एक हुक्म दिया। उसके हुक्म से रनिवास में हलचल मच गयी। आखिर ऐसा क्या हुक्म दिया था उसने? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की यह कहानी ‘परीक्षा’:

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कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! - किसलय पंचोली

कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली

‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: अमराई - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अमराई – सुभद्रा कुमारी चौहान

वह अमराई ठाकुर साहब की थी। वह ठाकुर साहब जो कि ब्रिटिश सरकार के खैरख्वाह थे। पर कुछ समय से उस अमराई में असहयोगियों का जमघट लगने लगा था। ठाकुर साहब तक ये खबर जब पहुँची तो वो अमराई में पहुँचे। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘अमराई’:

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कहानी: आविष्कार - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: आविष्कार – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

प्रोफेसर चंद्रायण वैज्ञानिक थे। उनकी इच्छा थी कि वह कोई ऐसा आविष्कार करें जिससे मानव जाति का भला हो सके। यही कारण था वह अपने कार्य में डूबे रहते थे और इसके चलते उनकी अपनी पत्नी शीला से भी अक्सर बहस हो जाया करती थी। क्या प्रोफेसर अपनी इच्छा पूरी कर पाए? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की लिखी यह कहानी ‘आविष्कार’:

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कहानी: जैसिरी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: जैसिरी – राहुल सांकृत्यायन

पंदहा गाँव के जैसिरी को अक्षर ज्ञान नहीं मिला था लेकिन फिर भी उनके भीतर ज्ञान की कमी नहीं थी। वह अपनी उम्र वाले लोगों से एकदम अलग थे। आखिर उन्होंने ये ज्ञान कैसे हासिल किया था? वह क्या चीजें थीं जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थीं? पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की यह कहानी जैसिरी:

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