मुफ़्त का राज - आलोक कुमार

लघु-कथा: मुफ़्त का राज – आलोक कुमार

नंदन वन और सुंदर वन दो जंगल थे। नंदन वन में शेरों का राज था और सुंदर वन में बाघों का। आगे क्या हुआ? पढ़ें आलोक कुमार की लघु-कथा ‘मुफ़्त का राज’:

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कहानी: कार्य‑कुशलता - विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक

कहानी: कार्य‑कुशलता – विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक

शहर में रिश्वत खुल्ले-आम ली जा रही थी। गुंडे बदमाश सबको यही कहते थे कि पुलिस उनके लिए ही काम करती है । क्या यह सच था? आगे क्या हुआ? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘कार्य-कुशलता’:

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कहानी: माँ बेटे - भुवनेश्वर

कहानी: माँ-बेटे – भुवनेश्वर

एक माँ अपने आखिरी समय के नज़दीक है। उसका पूरा परिवार उसके इर्द-गिर्द मौजूद है। भुवनेश्वर की यह कहानी इसी समय को दर्शा रही है। अपने आखिरी समय में माँ के भीतर चल रहे विचारों और संतानों की अलग-अलग प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने यह कहानी बुनी है। यह कहानी पहली बार हंस के वर्ष 1937 के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: रूप की छाया - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: रूप की छाया – जयशंकर प्रसाद

सरला ने शैलनाथ को घाट की सीढ़ियों पर बैठे देखा तो अपनी एक प्रौढ़ा संगिनी को उसके बाबत कुछ कहा और वहाँ से चली आयी। प्रौढ़ा संगिनी शैलनाथ की तरफ बढ़ चली। सरला ने प्रोढा से शैलनाथ के विषय में क्या कहा? प्रौढ़ा ने शैलनाथ से क्या कहा? सरला वहाँ से क्यों चली आयी?

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लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा - महावीर प्रसाद द्विवेदी

लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा’ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की लघु-कथा है। अपनी इस लघु-कथा के माध्यम से वह अपने समय के भारतीय समाज में स्त्री की बदलती दशा पर टिप्पणी करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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कहानी: देर आये दुरुस्त आये - सुधा आदेश

कहानी: देर आये दुरुस्त आये – सुधा आदेश

मेघना के घर उसकी चचेरी बहन दीपिका आयी तो बातों के दौरान उसकी पुरानी यादों की पोटली भी खुलती चली गयी। इसके साथ‑साथ मेघना को ये भी अहसास हुआ कि कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें करने में देर नहीं करनी चाहिए। यह कार्य क्या थे? दीपिका मेघना के घर क्यों आयी थी?

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बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान की हुई घोषणा; इन चार रचनाकारों को किया जाएगा सम्मानित

बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान की हुई घोषणा; इन चार रचनाकारों को किया जाएगा सम्मानित

हिंदी साहित्य के लिए दिए जाने वाले बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान की घोषणा की जा चुकी है। वर्ष 2024 से वर्ष 2027 तक के लिए सम्मानित रचनाओं की घोषणा इस वर्ष हुई है।

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कैलाश वानखेड़े को मिलेगा वर्ष 2026 का अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान

कैलाश वानखेड़े को मिलेगा वर्ष 2026 का अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान

वर्ष 2026 के 17वाँ अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान की घोषणा की जा चुकी है। यह सम्मान लेखक कैलाश वानखेड़े को उनके उपन्यास के लिए दिया जाएगा।

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कथा-सप्तक - क्षमा शर्मा | सम्पादक - आकाश माथुर | टिप्पणी: सुमन बाजपेयी | प्रकाशक: शिवना प्रकाशन

पुस्तक टिप्पणी: समाज की विसंगतियों पर प्रहार करती कहानियाँ

‘कथा-सप्तक – क्षमा शर्मा’ लेखिका क्षमा शर्मा की सात कहानियों का संग्रह है। आकाश माथुर द्वारा सम्पादित यह संग्रह शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। पुस्तक पर लेखिका सुमन बाजपेयी ने यह टिप्पणी की है। आप भी पढ़ें:

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दैनिक जागरण बेस्ट सेलर लिस्ट हुई जारी; इन किताबों ने सूची में बनाई जगह

अप्रैल-जून 2026 की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई कथा श्रेणी में जगह

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:

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कहानी: स्वामिनी - प्रेमचंद

कहानी: स्वामिनी – प्रेमचंद

रामप्यारी शिवदास की बहू थी। बिरजू की वह पत्नी थी। बिरजू जब अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ तो शिवदास ने उसे भंडारे की चाबी देकर घर की स्वामिनी बना दिया। सोचा, ऐसे ही बहू का मन लगा रहेगा। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘स्वामिनी’:

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कहानी: बैल की बिक्री - सियारामशरण गुप्त

कहानी: बैल की बिक्री – सियारामशरण गुप्त

मोहन ने सेठ ज्वालाप्रसाद से कर्ज लिया था जो कि बढ़ता ही जा रहा था। कई साल से फसल खराब होने के चलते वह उसे चुका ही नहीं पा रहा थे। अब सेठ का धैर्य भी खत्म होता जा रहा था। क्या मोहन कर्ज चुका पाया? सेठ ज्वालाप्रसाद ने अपने पैसे हासिल करने के लिए क्या किया?

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