कहानी: सुलह - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: सुलह – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

वहाँ कभी हिंदू कॉलेज हुआ करता था पर अब उधर कचहरी बन चुकी थी। कथावाचक कॉलेज के समय से उस इलाके में आता था क्योंकि उसे वहाँ के छात्रों के बीच रहना पसंद था। अब उधर कचहरी बन जाने पर कथावाचक वहाँ का वातावरण देखने आ पहुँचा। उसने कचहरी पहुँचकर क्या देखा?

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कहानी: शांति - प्रेमचंद

कहानी: शांति – प्रेमचंद

देवनाथ कथावाचक के मित्र थे। उनकी असमय मृत्यु होने के पश्चात उनके परिवार पर जो बीती उसी की कथा कथावचक सुना रहे हैं। आखिर देवनाथ के परिवार पर क्या बीती? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘शांति’:

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कहानी: देवदासी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: देवदासी – जयशंकर प्रसाद

अशोक प्रयाग से दक्षिण भारत के एक शहर में आ गया है। वह रमेश को पत्रों के माध्यम से अपने जीवन में हो रही घटनाओं और एक देवदासी के विषय में बता रहा है। आखिर ये देवदासी कौन है? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘देवदासी’:

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कहानी: भक्षक-रक्षक - विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

कहानी: भक्षक-रक्षक – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

प. चंद्रकांत रंगीले स्वभाव के व्यापारी थे। स्त्रियों की तरफ उनका विशेष आकर्षण था। ऐसे में जब उनके दोस्त, जिसे वो रजनीगंधा कहते थे, ने लखनऊ जाने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने सहज ही स्वीकार कर दिया। उन्हें लखनऊ में व्यापार से जुड़ा काम भी था। लखनऊ में क्या हुआ?

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कहानी: तावान - प्रेमचंद

कहानी: तावान – प्रेमचंद

छकौड़ीलाल दुकानदार थे और कॉंग्रेस ने उन पर तावान (जुर्माना) लगा दिया था। कॉंग्रेस ने ऐसा क्यों किया? क्या छकौड़ीलाल ने तावान दिया? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘तावान’:

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कहानी: माँ - प्रेमचंद

कहानी: माँ – प्रेमचंद

आदित्य ने अपने आप को समाजसेवा के लिए न्यौछावर कर दिया था। इसका उसे कोई पछतावा भी नहीं था। वह चाहता था कि उसका बेटा भी उसी की राह पर चले। लोगों की निस्वार्थ भलाई करे। उसकी पत्नी अरुणा की भी यही इच्छा थी। आदित्य को पूरा विश्वास था कि अरुणा उनके बेटे प्रकाश को ऐसी परवरिश देगी जो उनके सपनों को साकार करने में मदद करेगी। क्या आदित्य और अरुणा का स्वप्न पूरा हुआ?

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कहानी: असमंजस - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: असमंजस – सुभद्रा कुमारी चौहान

बसंत उस समय बी. ए. में जब वह कुसुम से पहली बार मिला था। कुसुम एक धनाढ्य परिवार की लड़की थी जो उस समय मैट्रिक में पढ़ा करती थी। जब उनकी दोस्ती हुई तो उन्हें पता ही नहीं था कि यह इतनी प्रगाढ़ हो जाएगी। अब इतने वर्षों बाद बसंत अपनी इस पुरानी दोस्ती को लेकर असमंजस में था। क्या उसकी इस दुविधा का निदान हुआ?

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लघु-कथा: काकी - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त

श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।

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कहानी: वशीकरण - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: वशीकरण – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

नत्थू चाचा का कहना था कि वह अपने मंत्रों से अलौकिक कार्य कर सकते हैं। उनके अनुसार उन्हें वशीकरण और मारण करने में महारत हासिल थी। मोहल्ले के लोग उनकी ये बात मानते नहीं थे। क्या वो ऐसा कर सकते थे? क्या वो लोगों को अपनी शक्तियों का यकीन दिला पाये?

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कहानी: अभियुक्ता - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अभियुक्ता – सुभद्रा कुमारी चौहान

बीस वर्षीय उस युवती पर यह आरोप था कि उसने बैरिस्टर गुप्ता के बेटे की चेन चुराई और फिर घर से भाग गयी। उस पर ये आरोप क्यों लगाया था? क्या ये आरोप सच था? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘अभियुक्ता’:

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कहानी: काई - रांगेय राघव

कहानी: काई – रांगेय राघव

डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:

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कहानी: डीह बाबा - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: डीह बाबा – राहुल सांकृत्यायन

जीता भर जाति के थे जो कभी कनैला रहा करते थे लेकिन अब अपने लोगों के साथ आसाम में रहते थे। यह भर जाति क्या थी? जीता और उनके लोगों को क्यों कनैला से आसाम जाना पड़ा? जानने के लिए पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की कहानी ‘डीह बाबा’:

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