कहानी: अभियुक्ता - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अभियुक्ता – सुभद्रा कुमारी चौहान

बीस वर्षीय उस युवती पर यह आरोप था कि उसने बैरिस्टर गुप्ता के बेटे की चेन चुराई और फिर घर से भाग गयी। उस पर ये आरोप क्यों लगाया था? क्या ये आरोप सच था? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘अभियुक्ता’:

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कहानी: काई - रांगेय राघव

कहानी: काई – रांगेय राघव

डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:

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कहानी: नूरी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: नूरी – जयशंकर प्रसाद

नूरी एक नाचने गाने वाली थी जो शहंशाह अकबर की बेगम सुलताना के लिए काम करती थी। वह शाहजादा याकूब खाँ से प्रेम करती थी। वह चाहती थी याकूब अपने उस मकसद को भुला दे जिसे पूरा करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ था। नूरी जानती थी इस मकसद को पूरा करने में याकूब की जान भी जा सकती थी। आखिर क्या था याकूब का मकसद? क्या वो पूरा हुआ? क्या नूरी को उसका प्यार मिला?

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कहानी: झाँकी - प्रेमचंद

कहानी: झाँकी – प्रेमचंद

कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:

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कहानी: सूर्यपूजा - भुवनेश्वर

कहानी: सूर्यपूजा – भुवनेश्वर

विलास डॉक्टर से दुनिया छोड़ने की बात कर रहा है। वह ऐसा क्यों कर रहा है?
आप भी पढ़ें लेखक भुवनेश्वर की कहानी ‘सूर्यपूजा’:

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कहानी: मुस्कान - चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

कहानी: मुस्कान – चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

उस मुस्कान ने ही सत्येंद्र की सोच की दिशा बदल दी थी। अब वह अपना सब कुछ भूलकर उसी मुस्कान के विषय में सोचा करते। आखिर किसकी थी ये मुस्कान? पढ़ें चंडीप्रसाद ‘हृदयेश’ की यह कहानी ‘मुस्कान’:

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कहानी: घर-जमाई - प्रेमचंद

कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद

हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:

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कहानी: अवसरवाद - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: अवसरवाद – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

रायबहादुर सम्पतिलाल शहर के धनाढ्य और सम्मानित व्यक्ति थे। अब उनकी इच्छा एम० एल० ए० का टिकट पाने की थी। क्या उनकी यह मुराद पूरी हुई? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘अवसरवाद’:

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कहानी: अधूरी मूरत - रांगेय राघव

कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव

कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:

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कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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कहानी: आविष्कार - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: आविष्कार – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

प्रोफेसर चंद्रायण वैज्ञानिक थे। उनकी इच्छा थी कि वह कोई ऐसा आविष्कार करें जिससे मानव जाति का भला हो सके। यही कारण था वह अपने कार्य में डूबे रहते थे और इसके चलते उनकी अपनी पत्नी शीला से भी अक्सर बहस हो जाया करती थी। क्या प्रोफेसर अपनी इच्छा पूरी कर पाए? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की लिखी यह कहानी ‘आविष्कार’:

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कहानी: जैसिरी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: जैसिरी – राहुल सांकृत्यायन

पंदहा गाँव के जैसिरी को अक्षर ज्ञान नहीं मिला था लेकिन फिर भी उनके भीतर ज्ञान की कमी नहीं थी। वह अपनी उम्र वाले लोगों से एकदम अलग थे। आखिर उन्होंने ये ज्ञान कैसे हासिल किया था? वह क्या चीजें थीं जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थीं? पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की यह कहानी जैसिरी:

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