कहानी: कार्य‑कुशलता - विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक

कहानी: कार्य‑कुशलता – विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक

शहर में रिश्वत खुल्ले-आम ली जा रही थी। गुंडे बदमाश सबको यही कहते थे कि पुलिस उनके लिए ही काम करती है । क्या यह सच था? आगे क्या हुआ? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘कार्य-कुशलता’:

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कहानी: माँ बेटे - भुवनेश्वर

कहानी: माँ-बेटे – भुवनेश्वर

एक माँ अपने आखिरी समय के नज़दीक है। उसका पूरा परिवार उसके इर्द-गिर्द मौजूद है। भुवनेश्वर की यह कहानी इसी समय को दर्शा रही है। अपने आखिरी समय में माँ के भीतर चल रहे विचारों और संतानों की अलग-अलग प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने यह कहानी बुनी है। यह कहानी पहली बार हंस के वर्ष 1937 के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: रूप की छाया - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: रूप की छाया – जयशंकर प्रसाद

सरला ने शैलनाथ को घाट की सीढ़ियों पर बैठे देखा तो अपनी एक प्रौढ़ा संगिनी को उसके बाबत कुछ कहा और वहाँ से चली आयी। प्रौढ़ा संगिनी शैलनाथ की तरफ बढ़ चली। सरला ने प्रोढा से शैलनाथ के विषय में क्या कहा? प्रौढ़ा ने शैलनाथ से क्या कहा? सरला वहाँ से क्यों चली आयी?

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लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा - महावीर प्रसाद द्विवेदी

लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा’ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की लघु-कथा है। अपनी इस लघु-कथा के माध्यम से वह अपने समय के भारतीय समाज में स्त्री की बदलती दशा पर टिप्पणी करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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कहानी: स्वामिनी - प्रेमचंद

कहानी: स्वामिनी – प्रेमचंद

रामप्यारी शिवदास की बहू थी। बिरजू की वह पत्नी थी। बिरजू जब अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ तो शिवदास ने उसे भंडारे की चाबी देकर घर की स्वामिनी बना दिया। सोचा, ऐसे ही बहू का मन लगा रहेगा। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘स्वामिनी’:

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कहानी: बैल की बिक्री - सियारामशरण गुप्त

कहानी: बैल की बिक्री – सियारामशरण गुप्त

मोहन ने सेठ ज्वालाप्रसाद से कर्ज लिया था जो कि बढ़ता ही जा रहा था। कई साल से फसल खराब होने के चलते वह उसे चुका ही नहीं पा रहा थे। अब सेठ का धैर्य भी खत्म होता जा रहा था। क्या मोहन कर्ज चुका पाया? सेठ ज्वालाप्रसाद ने अपने पैसे हासिल करने के लिए क्या किया?

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कहानी: कथा - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: कथा – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

वह प्रौढ़ व्यक्ति नित्य गंगास्नान के लिए जाते थे। लोग उन्हें दद्दू कहते थे। वहाँ जाकर दद्दू को पता लगा कि शहर में कथा हो रही है तो उन्होंने कथा सुनने का मन बना लिया। आगे क्या हुआ? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी ‘कथा’:

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लघु-कथा: बेड़ी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: बेड़ी – जयशंकर प्रसाद

वह नौ दस वर्ष का लड़का था जो कि अपने अंधे पिता के साथ घूमा करता था और भीख माँगने में उनकी मदद किया करता था। कथावाचक ने देखा कि उसके पिता ने उस लड़के पैरों में बेड़ी डाली हुई थी। आखिर ये बेड़ी क्यों डाली गयी थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘बेड़ी’:

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लघु-कथा: त्याग - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: त्याग – सियारामशरण गुप्त

गांधीजी की गिरफ़्तारी के विरोध में बाज़ार बंद था। ऐसे में कथावाचक के पुत्र जयदेव ने छोटी दाख (किशमिश) खाने की ज़िद की। क्या इस ज़िद को कथावाचक ने पूरा किया। पढ़ें सियारामशरण गुप्त की यह लघु-कथा ‘त्याग’:

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कहानी: सुलह - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: सुलह – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

वहाँ कभी हिंदू कॉलेज हुआ करता था पर अब उधर कचहरी बन चुकी थी। कथावाचक कॉलेज के समय से उस इलाके में आता था क्योंकि उसे वहाँ के छात्रों के बीच रहना पसंद था। अब उधर कचहरी बन जाने पर कथावाचक वहाँ का वातावरण देखने आ पहुँचा। उसने कचहरी पहुँचकर क्या देखा?

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कहानी: शांति - प्रेमचंद

कहानी: शांति – प्रेमचंद

देवनाथ कथावाचक के मित्र थे। उनकी असमय मृत्यु होने के पश्चात उनके परिवार पर जो बीती उसी की कथा कथावचक सुना रहे हैं। आखिर देवनाथ के परिवार पर क्या बीती? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘शांति’:

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कहानी: देवदासी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: देवदासी – जयशंकर प्रसाद

अशोक प्रयाग से दक्षिण भारत के एक शहर में आ गया है। वह रमेश को पत्रों के माध्यम से अपने जीवन में हो रही घटनाओं और एक देवदासी के विषय में बता रहा है। आखिर ये देवदासी कौन है? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘देवदासी’:

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