लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार

लघु-कथा: रेबीज़ - आलोक कुमार

“भाई तू कुत्तों को लेकर इतना सेंसेटिव क्यों है?” मैंने अपने दोस्त के स्कूटर पर पीछे बैठते हुए उससे पूछा।

“पता नहीं यार। लेकिन बचपन से ही अगर मैं किसी कुत्ते को तकलीफ़ में देखता हूँ तो अपना आपा खो बैठता हूँ। मुझसे उनका दर्द
देखा नहीं जाता,” दोस्त ने स्कूटर चलाते हुए जवाब दिया।

“अच्छा ये तो बता कि अभी हम कहाँ जा रहे हैं?” मैंने दूसरा सवाल किया।

“पास में ही एक केस हुआ है। किसी ने एक कुत्ते को इतनी बेरहमी से मारा कि उसका सर फट गया है। इसलिए सबसे पहले तो हम उस कुत्ते को अस्पताल लेकर जाएँगे और उसके बाद उस आदमी के खिलाफ़ केस करेंगे।” दोस्त काफ़ी गुस्से में था। मैं चुपचाप उसके साथ चल पड़ा। यह पहली बार नहीं था जब किसी आवार कुत्ते के लिए वह इतना परेशान हो रहा था। उसे गली के अनाथ कुत्तों से बहुत लगाव था और वह उनके लिए इनसानों से भिड़ने को तैयार रहता था।

और इसी सिलसिले में आज भी कुत्ते को अस्पताल पहुँचाने के बाद वह उस आदमी से भिड़ने चला गया जिसने उस कुत्ते को मारा था। मेरे दोस्त ने उस पर एफआईआर दर्ज करवा दी और सीधा पुलिस लेकर उसके घर पहुँचा। वह आदमी घर पर नहीं था। पुलिस वाले उसके पड़ोसियों से बातचीत करने लगे। हमें मालूम हुआ कि कुत्ते ने उसके दो साल के बच्चे को दौड़ा दिया था जिसके कारण बच्चा
सड़क पर गिर गया और पीछे से आती कार की चपेट में आ गया। वह आदमी अपने बच्चे को लेकर अस्पताल गया था।

जैसे ही मेरे दोस्त को यह पता लगा उसने पुलिस पर दबाव बनाया और उन्हें लेकर अस्पताल चला गया। उस आदमी को अस्पताल से ही गिरफ़्तार कर लिया गया। ऐसे मेरे दोस्त के प्रभाव के कारण हुआ था। हालाँकि मुझे ऐसा करना उस समय उचित नहीं लगा लेकिन मैं कुछ बोल न सका।

उस आदमी को एक सप्ताह बाद जमानत तो मिल गयी लेकिन इस बीच उसका बच्चा चल बसा।

वह आदमी अंतिम समय में अपने बच्चे से न मिल सका था। न पुलिस वालों को इससे कोई फ़र्क पड़ा और न ही मेरे दोस्त को इसका कोई मलाल था। किंतु मेरे मन पर इस बात का ऐसा प्रभाव पड़ा कि मैंने अपने दोस्त से मिलना-जुलना ही छोड़ दिया।

अगर कोई इनसान की ज़िंदगी के आगे किसी और चीज़ को तरजीह दे रहा है तो मेरे लिए उससे मन मिलाना कठिन हो रहा था। इस बार बात कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गयी थी इसलिए मैंने अपने कदम पीछे खींच लिए।

एक महीने बाद मैंने अखबार में अपने दोस्त की फोटो देखी। उसके साथ खबर यह थी कि एक पागल कुत्ते ने उसे इतना भयंकर रूप से काटा कि उसकी मौत हो गयी। मौत का कारण रेबीज़ बताया जा रहा था।

और पुलिस को संदेह था कि शायद उसी आदमी ने उस पागल कुत्ते को मेरे दोस्त के घर के आहते में छोड़ा था।

समाप्त


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