कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! - किसलय पंचोली

कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली

‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: फंदा - आनंद के सिंह

लघु-कथा: फंदा – आनंद के सिंह

‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा - सुमन बाजपेयी

कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा – सुमन बाजपेयी

कथावाचिका को लगता है कि उसका पति सुशांत उसका खयाल नहीं रखता है। लापरवाह है। उसके इस रवैये से वह परेशान रहती है। आज भी सुशांत ने कुछ ऐसा ही किया था। सुशांत ने आखिर क्या किया था? आगे क्या हुआ? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘लौटकर यहीं आऊँगा’:

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कहानी: टू फैट लेडीज़ - अनुपमा नौडियाल

कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल

क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:

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लघु-कथा: चाँद गवाही देगा - गजानन रैना

लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।

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कहानी: सतरंगी अरमानों की उड़ान - सुमन बाजपेयी

कहानी: सतरंगी अरमानों की उड़ान – सुमन बाजपेयी

पूर्णिमा को लगता था कि शादी होने के पश्चात उसने खुद को बाँट लिया था। अपना अस्तित्व को खो दिया था। उसके सतरंगी अरमानों ने उड़ान भरना छोड़ दिया था। क्या उसके इस सपनों को फिर से उड़ान मिली? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘सतरंगी अरमानों की उड़ान’।

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कहानी: मुट्ठी भर आसमान - मीनाक्षी सिंह

कहानी: मुट्ठी भर आसमान – मीनाक्षी सिंह

‘मुट्ठी भर आसमान’ लेखिका मीनाक्षी सिंह की कहानी है। दीप्ति की अपनी कामवाली कुलीना से हुई बातचीत उसे अपने जीवन का पुनर्वलोकन करने पर मजबूर कर देती है। आखिर क्या थी ये बातचीत और दीप्ति ने खुद को उसके बरक्स कहाँ पर पाया। आप भी पढ़ें:

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डोबरमैन - प्रवीण कुमार झा

कहानी: डोबरमैन – प्रवीण कुमार झा

प्रवीण कुमार झा नॉर्वे प्रवासी चिकित्सक हैं। कथेतर विधा के इतर उन्होंने गल्प लेखन भी किया है। पढ़ें साहिंद में पहले प्रकाशित हुई उनकी कहानी ‘डोबरमैन’।

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लघु-कथा: दरिंदे - योगेश मित्तल

लघु-कथा: दरिंदे – योगेश मित्तल

‘दरिंदे’ लेखक योगेश मित्तल की लिखी लघु-कथा है। यह रचना ‘अपराध कथाएँ’ नामक पत्रिका के विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें।

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कहानी: पैकेज डील - सुमन बाजपेयी

कहानी: पैकेज डील – सुमन बाजपेयी

मनसा एक पढ़ी लिखी स्वतंत्र ख़यालों की लड़की थी। उसका सोचना था कि शादी एक तरह की पैकेज डील होती है जिसमें हर चीज हर किसी के हिस्से नहीं आती। सुबोध को भी मनसा के साथ ऐसे ही एक डील मिली थी। आखिर क्या थी ये डील? जानने के लिए पढ़ें लेखिका सुमन बाजपेयी की कहानी ‘पैकेज डील’।

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बगुला भगत - डॉक्टर अंशु जोशी

कहानी: बगुला भगत – डॉ. अंशु जोशी

सुबह की आपा-धापी से सफलतापूर्वक निबट वह अपनी पसंदीदा मसाला चाय लिये सोफे पर आलथी-पालथी मार कर बैठ चुकी थी। बेटा स्कूल के लिये रवाना हो चुका था। पति महोदय …

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कहानी: नदी का इश्क जिंदा था - दिव्या शर्मा | कहानी संग्रह: कैलंडर पर लटकी तारीखें

कहानी: नदी का इश्क जिंदा था – दिव्या शर्मा

‘नदी का इश्क ज़िंदा था’ लेखिका दिव्या शर्मा की कहानी है। यह कहानी उनके कथा संग्रह ‘कैलंडर पर लटकी तारीखें’ में संकलित है।

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