लघु-कथा: राशन – आलोक कुमार
लघु-कथा गागर में सागर भरने की कला है। आलोक कुमार अपनी इस लघु-कथा में आज के जनमानस के एक पहलू को दर्शाने में कामयाब होते हैं। आप भी पढ़ें उनकी लघु-कथा ‘राशन’:
लघु-कथा: राशन – आलोक कुमार Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
लघु-कथा गागर में सागर भरने की कला है। आलोक कुमार अपनी इस लघु-कथा में आज के जनमानस के एक पहलू को दर्शाने में कामयाब होते हैं। आप भी पढ़ें उनकी लघु-कथा ‘राशन’:
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कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:
लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार Read More
‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:
कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली Read More
‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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कथावाचिका को लगता है कि उसका पति सुशांत उसका खयाल नहीं रखता है। लापरवाह है। उसके इस रवैये से वह परेशान रहती है। आज भी सुशांत ने कुछ ऐसा ही किया था। सुशांत ने आखिर क्या किया था? आगे क्या हुआ? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘लौटकर यहीं आऊँगा’:
कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा – सुमन बाजपेयी Read More
क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:
कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल Read More
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।
लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना Read More
पूर्णिमा को लगता था कि शादी होने के पश्चात उसने खुद को बाँट लिया था। अपना अस्तित्व को खो दिया था। उसके सतरंगी अरमानों ने उड़ान भरना छोड़ दिया था। क्या उसके इस सपनों को फिर से उड़ान मिली? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘सतरंगी अरमानों की उड़ान’।
कहानी: सतरंगी अरमानों की उड़ान – सुमन बाजपेयी Read More
‘मुट्ठी भर आसमान’ लेखिका मीनाक्षी सिंह की कहानी है। दीप्ति की अपनी कामवाली कुलीना से हुई बातचीत उसे अपने जीवन का पुनर्वलोकन करने पर मजबूर कर देती है। आखिर क्या थी ये बातचीत और दीप्ति ने खुद को उसके बरक्स कहाँ पर पाया। आप भी पढ़ें:
कहानी: मुट्ठी भर आसमान – मीनाक्षी सिंह Read More
प्रवीण कुमार झा नॉर्वे प्रवासी चिकित्सक हैं। कथेतर विधा के इतर उन्होंने गल्प लेखन भी किया है। पढ़ें साहिंद में पहले प्रकाशित हुई उनकी कहानी ‘डोबरमैन’।
कहानी: डोबरमैन – प्रवीण कुमार झा Read More
‘दरिंदे’ लेखक योगेश मित्तल की लिखी लघु-कथा है। यह रचना ‘अपराध कथाएँ’ नामक पत्रिका के विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें।
लघु-कथा: दरिंदे – योगेश मित्तल Read More
मनसा एक पढ़ी लिखी स्वतंत्र ख़यालों की लड़की थी। उसका सोचना था कि शादी एक तरह की पैकेज डील होती है जिसमें हर चीज हर किसी के हिस्से नहीं आती। सुबोध को भी मनसा के साथ ऐसे ही एक डील मिली थी। आखिर क्या थी ये डील? जानने के लिए पढ़ें लेखिका सुमन बाजपेयी की कहानी ‘पैकेज डील’।
कहानी: पैकेज डील – सुमन बाजपेयी Read More