कहानी: गवाह – अभय कुमार भारती
रामदीन ने गवाह बनने का फैसला ले लिया था। पर क्या वो अपने इस फैसले पर कायम रह पाया? एक बुक जर्नल पर पढ़ें लेखक अभय कुमार भारती की कहानी ‘गवाह’:
कहानी: गवाह – अभय कुमार भारती Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
रामदीन ने गवाह बनने का फैसला ले लिया था। पर क्या वो अपने इस फैसले पर कायम रह पाया? एक बुक जर्नल पर पढ़ें लेखक अभय कुमार भारती की कहानी ‘गवाह’:
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मेघना के घर उसकी चचेरी बहन दीपिका आयी तो बातों के दौरान उसकी पुरानी यादों की पोटली भी खुलती चली गयी। इसके साथ‑साथ मेघना को ये भी अहसास हुआ कि कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें करने में देर नहीं करनी चाहिए। यह कार्य क्या थे? दीपिका मेघना के घर क्यों आयी थी?
कहानी: देर आये दुरुस्त आये – सुधा आदेश Read More
उस दिन भूमि का फोन मिथिला को आया तो वह समझ गयी कि उसकी बेटी उससे कुछ मँगवाने के लिए ही फोन कर रही होगी। मिथिला सही भी थी। आखिर भूमि ने मिथिला को फोन क्यों किया था? पढ़ें लेखिका सुधा गोयल की कहानी ‘माटी का प्यार’:
कहानी: माटी का प्यार – सुधा गोयल Read More
जिउती अपने पति हरखू को लेकर परेशान थी। उसके पति को बुखार था लेकिन जिउती के पास उसके इलाज के लायक पैसा न था। पर कुछ भी करके उसे पैसे का बंदोबस्त करना ही था। क्या जिउती पैसे का इंतज़ाम कर पायी? पढ़ें गजानन रैना की यह लघु-कथा ‘डकैत’:
लघु-कथा: डकैत – गजानन रैना Read More
लघु-कथा गागर में सागर भरने की कला है। आलोक कुमार अपनी इस लघु-कथा में आज के जनमानस के एक पहलू को दर्शाने में कामयाब होते हैं। आप भी पढ़ें उनकी लघु-कथा ‘राशन’:
लघु-कथा: राशन – आलोक कुमार Read More
कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:
लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार Read More
‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:
कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली Read More
‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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कथावाचिका को लगता है कि उसका पति सुशांत उसका खयाल नहीं रखता है। लापरवाह है। उसके इस रवैये से वह परेशान रहती है। आज भी सुशांत ने कुछ ऐसा ही किया था। सुशांत ने आखिर क्या किया था? आगे क्या हुआ? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘लौटकर यहीं आऊँगा’:
कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा – सुमन बाजपेयी Read More
क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:
कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल Read More
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।
लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना Read More
पूर्णिमा को लगता था कि शादी होने के पश्चात उसने खुद को बाँट लिया था। अपना अस्तित्व को खो दिया था। उसके सतरंगी अरमानों ने उड़ान भरना छोड़ दिया था। क्या उसके इस सपनों को फिर से उड़ान मिली? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘सतरंगी अरमानों की उड़ान’।
कहानी: सतरंगी अरमानों की उड़ान – सुमन बाजपेयी Read More