कहानी: कथा - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: कथा – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

वह प्रौढ़ व्यक्ति नित्य गंगास्नान के लिए जाते थे। लोग उन्हें दद्दू कहते थे। वहाँ जाकर दद्दू को पता लगा कि शहर में कथा हो रही है तो उन्होंने कथा सुनने का मन बना लिया। आगे क्या हुआ? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी ‘कथा’:

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लघु-कथा: बेड़ी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: बेड़ी – जयशंकर प्रसाद

वह नौ दस वर्ष का लड़का था जो कि अपने अंधे पिता के साथ घूमा करता था और भीख माँगने में उनकी मदद किया करता था। कथावाचक ने देखा कि उसके पिता ने उस लड़के पैरों में बेड़ी डाली हुई थी। आखिर ये बेड़ी क्यों डाली गयी थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘बेड़ी’:

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लघु-कथा: त्याग - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: त्याग – सियारामशरण गुप्त

गांधीजी की गिरफ़्तारी के विरोध में बाज़ार बंद था। ऐसे में कथावाचक के पुत्र जयदेव ने छोटी दाख (किशमिश) खाने की ज़िद की। क्या इस ज़िद को कथावाचक ने पूरा किया। पढ़ें सियारामशरण गुप्त की यह लघु-कथा ‘त्याग’:

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कहानी: सुलह - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: सुलह – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

वहाँ कभी हिंदू कॉलेज हुआ करता था पर अब उधर कचहरी बन चुकी थी। कथावाचक कॉलेज के समय से उस इलाके में आता था क्योंकि उसे वहाँ के छात्रों के बीच रहना पसंद था। अब उधर कचहरी बन जाने पर कथावाचक वहाँ का वातावरण देखने आ पहुँचा। उसने कचहरी पहुँचकर क्या देखा?

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लघु-कथा: डकैत - गजानन रैना

लघु-कथा: डकैत – गजानन रैना

जिउती अपने पति हरखू को लेकर परेशान थी। उसके पति को बुखार था लेकिन जिउती के पास उसके इलाज के लायक पैसा न था। पर कुछ भी करके उसे पैसे का बंदोबस्त करना ही था। क्या जिउती पैसे का इंतज़ाम कर पायी? पढ़ें गजानन रैना की यह लघु-कथा ‘डकैत’:

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लघु-कथा: राशन - आलोक कुमार

लघु-कथा: राशन – आलोक कुमार

लघु-कथा गागर में सागर भरने की कला है। आलोक कुमार अपनी इस लघु-कथा में आज के जनमानस के एक पहलू को दर्शाने में कामयाब होते हैं। आप भी पढ़ें उनकी लघु-कथा ‘राशन’:

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कहानी: माँ - प्रेमचंद

कहानी: माँ – प्रेमचंद

आदित्य ने अपने आप को समाजसेवा के लिए न्यौछावर कर दिया था। इसका उसे कोई पछतावा भी नहीं था। वह चाहता था कि उसका बेटा भी उसी की राह पर चले। लोगों की निस्वार्थ भलाई करे। उसकी पत्नी अरुणा की भी यही इच्छा थी। आदित्य को पूरा विश्वास था कि अरुणा उनके बेटे प्रकाश को ऐसी परवरिश देगी जो उनके सपनों को साकार करने में मदद करेगी। क्या आदित्य और अरुणा का स्वप्न पूरा हुआ?

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कहानी: असमंजस - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: असमंजस – सुभद्रा कुमारी चौहान

बसंत उस समय बी. ए. में जब वह कुसुम से पहली बार मिला था। कुसुम एक धनाढ्य परिवार की लड़की थी जो उस समय मैट्रिक में पढ़ा करती थी। जब उनकी दोस्ती हुई तो उन्हें पता ही नहीं था कि यह इतनी प्रगाढ़ हो जाएगी। अब इतने वर्षों बाद बसंत अपनी इस पुरानी दोस्ती को लेकर असमंजस में था। क्या उसकी इस दुविधा का निदान हुआ?

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लघु-कथा: काकी - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त

श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।

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कहानी: वशीकरण - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: वशीकरण – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

नत्थू चाचा का कहना था कि वह अपने मंत्रों से अलौकिक कार्य कर सकते हैं। उनके अनुसार उन्हें वशीकरण और मारण करने में महारत हासिल थी। मोहल्ले के लोग उनकी ये बात मानते नहीं थे। क्या वो ऐसा कर सकते थे? क्या वो लोगों को अपनी शक्तियों का यकीन दिला पाये?

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कहानी: अभियुक्ता - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अभियुक्ता – सुभद्रा कुमारी चौहान

बीस वर्षीय उस युवती पर यह आरोप था कि उसने बैरिस्टर गुप्ता के बेटे की चेन चुराई और फिर घर से भाग गयी। उस पर ये आरोप क्यों लगाया था? क्या ये आरोप सच था? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘अभियुक्ता’:

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कहानी: काई - रांगेय राघव

कहानी: काई – रांगेय राघव

डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:

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