“सुन रहे हो भैया, अपने देस का खूब डंका बज रहा है बिदेस में?”
“हाँ भैया कल वट्सएप पर वीडियो देखा है मैने भी। मन गदगद हो गया। अब वो दिन दूर नहीं जब हम अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे।”
“और नहीं तो क्या! परसों तो वो अमरीका का नेता भी खूब तारीफ़ किया अपना देस का।”
“अरे तो काम ही ऐस गजब हो रहा है। तरक्की देख रहे हो किस रफ़्तार से हो रही है।”
“सुने तो हैं खूब सड़क बन रही है पूरे देस में।”
“और नहीं तो क्या।”
“और तुम्हारे पड़ोसी का क्या हाल है?”
“किसका?”
“वही जो जोमैटो में काम करता था।”
“ठीक ही है। दो महीने पहले जब डिलिवरी करने जा रहा था तब सड़क पर बने एक गड्ढे में बेचारे की बाइक फँस गयी और गिर पड़ा। पीछे से आ रही कार उसके पैर पर चढ़ गयी थी। टाँग टूट गयी थी बेचारे की।”
“सुना उसके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया?”
“हाँ। वो फीस नहीं दे पा रहा था न इसलिए।”
“अब ये सब तो भगवान की माया है भैया।”
“और तुम बताओ तुम्हारे लड़के के का हाल हैं?”
“कुछ नहीं भैया, इंजीनियरिंग हो गयी है अब नौकरी खोज रहा है दो साल से।”
“ये सब तो उन घुसपैठियों की वजह से हो रहा है भैया। एक बार उन्हें देस से निकाल बाहर करेंगे ना तो सब ठीक हो जाएगा।”
“और नहीं तो का? अब वो दिन दूर नहीं जब सब ठीक हो जाएगा। सुना है आज़ादी के सौ साल होने पर अपना देस बिकसित हो जाएगा।”
“अरे देश तो अभी विकसित हो गया है बस वो चीन के कारण थोड़ा रुका हुआ है। एक बार बुलेट ट्रेन चलने लगी ना तब देखना।”
“सही कह रहे हो। और तुम बताओ इ दिवाली गाँव गये कि नहीं?”
“नहीं भैया। ट्रेन में कंफ़र्म टिकट ही नहीं मिला। और जनरल बोगी में घुस ही नहीं पाये। ही ही ही।”
“अरे हम तो भाड़ा देख कर ही जाने का प्रोग्राम कैंसल कर दिये। अब जाएँगे अगले साल।”
“अरे ऊ देखो तेजस जा रहा है।”
“अरे वो तेजस नहीं है देश का भविष्य है। देश का तरक्की है। इसके पहले सूई तक नहीं बनती थी देश में। अब देखो जहाज बन रहा है।”
“तो फिर काहे दूसरे देश से जहाज खरीदने का बात चल रहा है?”
“अरे वो तो बिजनेस है। वरना ऊ देसवा का का होगा। सब भूखो मरने लगेगा।”
“ठीक कहे भैया। अब चलते हैं सुना राशन आया है दुकान पर। जरा ले आएँ वरना खत्म हो जाएगा।”
“अरे हमको भी राशन लेना है, चलो चलें।”
समाप्त
