कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव
कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच बातचीत होने लगी। बातचीत थी—मूर्ति के बारे में और वर्तमान हालात के बारे में। यह बातचीत क्या थी? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:
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