साहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
आलोक जी मूलतः बिहार से हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में हुई और इसके पश्चात इंजीनियरिंग करने के लिए वो झाँसी आ गये। झाँसी के बी.आई.ई.टी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के पश्चात अब वो बेंगलुरु में एक कम्पनी में कार्यरत हैं।
लिखने पढ़ने का शौक आलोक जी को हमेशा से रहा है। बाल पत्रिकाओं से होते हुए कॉमिक बुक्स और फिर प्रेमचंद से परिचय होने के पश्चात साहित्य के प्रति उनका अनुराग प्रगाढ़ ही हुआ है। तब से निरंतर पढ़ने का क्रम जारी है।
अब बेंगलुरु में रहकर वह जॉब करते हुए पढ़ने, लिखने में ही अपना वक्त बिता रहे हैं।
प्रकाशित रचनाएँ:
उपन्यास: द चिरकुट्स, मिशन टू मार्स
कहानी संग्रह: लाइफ आजकल
बाल साहित्य: आओ बच्चों तुम्हें सिखाएँ, नन्हे कदम
बाल साहित्य (अनुवाद): द प्रिंसेस एंड द गॉब्लिन, राजकुमारी और शैतान बौने, डॉ. डूलिटिल की कहानी, डॉक्टर डू लिटिल की यात्रा, जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ
कथेतर: कहानी कैसे लिखें
अनुवाद: दौलत का खेल, लिक्टर