लघु-कथा: रूप की छाया - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: रूप की छाया – जयशंकर प्रसाद

सरला ने शैलनाथ को घाट की सीढ़ियों पर बैठे देखा तो अपनी एक प्रौढ़ा संगिनी को उसके बाबत कुछ कहा और वहाँ से चली आयी। प्रौढ़ा संगिनी शैलनाथ की तरफ बढ़ चली। सरला ने प्रोढा से शैलनाथ के विषय में क्या कहा? प्रौढ़ा ने शैलनाथ से क्या कहा? सरला वहाँ से क्यों चली आयी?

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लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा - महावीर प्रसाद द्विवेदी

लघु-कथा: महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘महारानी चंद्रिका और भारतवर्ष का तारा’ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की लघु-कथा है। अपनी इस लघु-कथा के माध्यम से वह अपने समय के भारतीय समाज में स्त्री की बदलती दशा पर टिप्पणी करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: बेड़ी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: बेड़ी – जयशंकर प्रसाद

वह नौ दस वर्ष का लड़का था जो कि अपने अंधे पिता के साथ घूमा करता था और भीख माँगने में उनकी मदद किया करता था। कथावाचक ने देखा कि उसके पिता ने उस लड़के पैरों में बेड़ी डाली हुई थी। आखिर ये बेड़ी क्यों डाली गयी थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘बेड़ी’:

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लघु-कथा: त्याग - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: त्याग – सियारामशरण गुप्त

गांधीजी की गिरफ़्तारी के विरोध में बाज़ार बंद था। ऐसे में कथावाचक के पुत्र जयदेव ने छोटी दाख (किशमिश) खाने की ज़िद की। क्या इस ज़िद को कथावाचक ने पूरा किया। पढ़ें सियारामशरण गुप्त की यह लघु-कथा ‘त्याग’:

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लघु-कथा: डकैत - गजानन रैना

लघु-कथा: डकैत – गजानन रैना

जिउती अपने पति हरखू को लेकर परेशान थी। उसके पति को बुखार था लेकिन जिउती के पास उसके इलाज के लायक पैसा न था। पर कुछ भी करके उसे पैसे का बंदोबस्त करना ही था। क्या जिउती पैसे का इंतज़ाम कर पायी? पढ़ें गजानन रैना की यह लघु-कथा ‘डकैत’:

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लघु-कथा: राशन - आलोक कुमार

लघु-कथा: राशन – आलोक कुमार

लघु-कथा गागर में सागर भरने की कला है। आलोक कुमार अपनी इस लघु-कथा में आज के जनमानस के एक पहलू को दर्शाने में कामयाब होते हैं। आप भी पढ़ें उनकी लघु-कथा ‘राशन’:

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लघु-कथा: काकी - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त

श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।

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लघु-कथा: आप भी बड़े 'ओ' हैं - जी. पी. श्रीवास्तव

लघु-कथा: आप भी बड़े ‘ओ’ हैं – जी. पी. श्रीवास्तव

‘आप भी बड़े ‘ओ’ हैं’ लेखक जी.पी. श्रीवास्तव की लिखी व्यंग्य कथा है। अक्सर सरकारी अफ़सरों में एक तरह का दंभ देखने को मिलता है। ऐसा लगता है वह पद पाते ही आम लोगों को कुछ समझते ही नहीं हैं। इस कहानी में वह इसी अफ़सरी प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: रेबीज़ - आलोक कुमार

लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार

कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:

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लघु-कथा: फंदा - आनंद के सिंह

लघु-कथा: फंदा – आनंद के सिंह

‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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लघु-कथा: हिमालय का पथिक - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: हिमालय का पथिक – जयशंकर प्रसाद

किन्नरी अपने वृद्ध बाबा के साथ वहाँ अकेली रहती थी जब उन्हें वह पथिक दिखा। वो हिमालय घूमना चाहता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘हिमालय का पथिक’:

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लघु-कथा: चाँद गवाही देगा - गजानन रैना

लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।

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