लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद
जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:
लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:
लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read More
राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।
लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद Read More
पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …
लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
‘स्वप्न’ विकास नैनवाल की लिखी एक लघु-कथा है। यह लघु-कथा लेखक के रचना संग्रह ‘एक शाम तथा अन्य रचनाएँ’ से ली गयी है।
लघु-कथा: स्वप्न – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
नवल और विमल टहल रहे थे जब उनके बीच साहित्य को लेकर बहस छिड़ी। इस बहस का विषय क्या था और इसका परिणाम क्या निकला। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘पत्थर की पुकार’।
लघु-कथा: पत्थर की पुकार – जयशंकर प्रसाद Read More
श्यामसुंदर और कलावती के बीच सोने को लेकर खटपट होना आम बात थी। श्यामसुंदर बैठकर उपन्यास पढ़ना चाहता था और कलावती सोना चाहती थी। जब सोना मुमकिन न हुआ तो कलावती एक चीनी की पुतली लेकर उसे शिक्षा देने लगी। आखिर ये शिक्षा क्या थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘कलावती की शिक्षा’।
लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद Read More
वह युवक उस मंदिर के अवशेष देखने बार बार जाया करता था। उसी मंदिर में एक जगह कुछ लिखा था। एक अनजान सी लिपि थी जिसे वो समझना चाहता था। क्या उसकी जिज्ञासा क्या शांत हुई? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘खंडहर की लिपि’।
लघु-कथा: खंडहर की लिपि – जयशंकर प्रसाद Read More
‘प्रलय’ लेखक जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। इसमें लेखक पौराणिक पात्रों को लेकर प्रलय के दिन की कल्पना करते हैं। इन दो पात्रों के बीच जो बातचीत होती है उसके माध्यम से प्रलय और उसके महत्व को भी दर्शाते हैं। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: प्रलय – जयशंकर प्रसाद Read More
चक्रवर्ती का स्तम्भ” कथाकार और कवि जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा है। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ – जयशंकर प्रसाद Read More
दुखिया एक किशोरी थी जिसके ऊपर अपने नेत्रहीन पिता की जिम्मेदारी थी। अपनी नौकरी उसे बड़ी प्यारी थी। फिर ऐसा क्या हुआ जो उसकी नौकरी जाने की नौबत आ गयी। पढ़ें लेखक जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘दुखिया’।
लघु-कथा: दुखिया – जयशंकर प्रसाद Read More
मोहन को लगता था पत्नी को उसकी दासी होना चाहिए। उसने ये कर भी दिखाया था। पर अब वो खुश नहीं था। ऐसा क्यों? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘सहयोग’।
लघु-कथा: सहयोग – जयशंकर प्रसाद Read More
नंदलाल उस नदी के किनारे बैठा अपनी सितारी बजाया करता था। उसे अँधरे से डर नहीं लगता था। ऐसे में जब उसने एक आवाज़ सुनी तो वह हैरान रह गया। आगे उसने क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘उस पार का योगी’
लघु-कथा: उस पार का योगी – जयशंकर प्रसाद Read More