कहानी: काई - रांगेय राघव

कहानी: काई – रांगेय राघव

डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:

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कहानी: डीह बाबा - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: डीह बाबा – राहुल सांकृत्यायन

जीता भर जाति के थे जो कभी कनैला रहा करते थे लेकिन अब अपने लोगों के साथ आसाम में रहते थे। यह भर जाति क्या थी? जीता और उनके लोगों को क्यों कनैला से आसाम जाना पड़ा? जानने के लिए पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की कहानी ‘डीह बाबा’:

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कहानी: नूरी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: नूरी – जयशंकर प्रसाद

नूरी एक नाचने गाने वाली थी जो शहंशाह अकबर की बेगम सुलताना के लिए काम करती थी। वह शाहजादा याकूब खाँ से प्रेम करती थी। वह चाहती थी याकूब अपने उस मकसद को भुला दे जिसे पूरा करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ था। नूरी जानती थी इस मकसद को पूरा करने में याकूब की जान भी जा सकती थी। आखिर क्या था याकूब का मकसद? क्या वो पूरा हुआ? क्या नूरी को उसका प्यार मिला?

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कहानी: झाँकी - प्रेमचंद

कहानी: झाँकी – प्रेमचंद

कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:

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कहानी: सूर्यपूजा - भुवनेश्वर

कहानी: सूर्यपूजा – भुवनेश्वर

विलास डॉक्टर से दुनिया छोड़ने की बात कर रहा है। वह ऐसा क्यों कर रहा है?
आप भी पढ़ें लेखक भुवनेश्वर की कहानी ‘सूर्यपूजा’:

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कहानी: मुस्कान - चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

कहानी: मुस्कान – चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

उस मुस्कान ने ही सत्येंद्र की सोच की दिशा बदल दी थी। अब वह अपना सब कुछ भूलकर उसी मुस्कान के विषय में सोचा करते। आखिर किसकी थी ये मुस्कान? पढ़ें चंडीप्रसाद ‘हृदयेश’ की यह कहानी ‘मुस्कान’:

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कहानी: अवसरवाद - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: अवसरवाद – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

रायबहादुर सम्पतिलाल शहर के धनाढ्य और सम्मानित व्यक्ति थे। अब उनकी इच्छा एम० एल० ए० का टिकट पाने की थी। क्या उनकी यह मुराद पूरी हुई? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘अवसरवाद’:

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कहानी: अधूरी मूरत - रांगेय राघव

कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव

कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:

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कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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कहानी: परीक्षा - प्रेमचंद

कहानी: परीक्षा – प्रेमचंद

नादिरशाह ने दिल्ली फतेह कर ली थी। क्रूरता की सभी हदें उसने पार कर ली थीं। जब वह महल में पहुँचा तो उसने एक हुक्म दिया। उसके हुक्म से रनिवास में हलचल मच गयी। आखिर ऐसा क्या हुक्म दिया था उसने? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की यह कहानी ‘परीक्षा’:

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कहानी: हिसाब-किताब - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: हिसाब-किताब – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

पंडित रामशरण अपने विवाह योग्य बेटे का रिश्ता सोच समझ कर करना चाहते थे। उनकी मंशा थी कि रिश्ता ऐसा आये जहाँ से धन भी अच्छी मात्रा में आने की सम्भावना हो। इस कारण उन्होंने कई रिश्ते ठुकरा दिए थे। क्या उन्हें अपनी पसंद का रिश्ता अपने बेटे के लिए मिला?

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कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! - किसलय पंचोली

कहानी: मम्मी, मुझे बेटी पुकारो ना! – किसलय पंचोली

‘मम्मी, मुझे बेटी पुकारो न!’ लेखिका किसलय पंचोली की लिखी कहानी है। यह कहानी साहित्य विमर्श प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका के कहानी संग्रह ‘गेट से बाहर फ्रायड’ में संगृहीत है। आप भी पढ़ें:

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