कहानी: डीह बाबा - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: डीह बाबा – राहुल सांकृत्यायन

जीता भर जाति के थे जो कभी कनैला रहा करते थे लेकिन अब अपने लोगों के साथ आसाम में रहते थे। यह भर जाति क्या थी? जीता और उनके लोगों को क्यों कनैला से आसाम जाना पड़ा? जानने के लिए पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की कहानी ‘डीह बाबा’:

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कहानी: नूरी - जयशंकर प्रसाद

कहानी: नूरी – जयशंकर प्रसाद

नूरी एक नाचने गाने वाली थी जो शहंशाह अकबर की बेगम सुलताना के लिए काम करती थी। वह शाहजादा याकूब खाँ से प्रेम करती थी। वह चाहती थी याकूब अपने उस मकसद को भुला दे जिसे पूरा करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ था। नूरी जानती थी इस मकसद को पूरा करने में याकूब की जान भी जा सकती थी। आखिर क्या था याकूब का मकसद? क्या वो पूरा हुआ? क्या नूरी को उसका प्यार मिला?

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कहानी: झाँकी - प्रेमचंद

कहानी: झाँकी – प्रेमचंद

कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:

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लघु-कथा: आप भी बड़े 'ओ' हैं - जी. पी. श्रीवास्तव

लघु-कथा: आप भी बड़े ‘ओ’ हैं – जी. पी. श्रीवास्तव

‘आप भी बड़े ‘ओ’ हैं’ लेखक जी.पी. श्रीवास्तव की लिखी व्यंग्य कथा है। अक्सर सरकारी अफ़सरों में एक तरह का दंभ देखने को मिलता है। ऐसा लगता है वह पद पाते ही आम लोगों को कुछ समझते ही नहीं हैं। इस कहानी में वह इसी अफ़सरी प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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कहानी: सूर्यपूजा - भुवनेश्वर

कहानी: सूर्यपूजा – भुवनेश्वर

विलास डॉक्टर से दुनिया छोड़ने की बात कर रहा है। वह ऐसा क्यों कर रहा है?
आप भी पढ़ें लेखक भुवनेश्वर की कहानी ‘सूर्यपूजा’:

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कहानी: मुस्कान - चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

कहानी: मुस्कान – चंडीप्रसाद ‘हदयेश’

उस मुस्कान ने ही सत्येंद्र की सोच की दिशा बदल दी थी। अब वह अपना सब कुछ भूलकर उसी मुस्कान के विषय में सोचा करते। आखिर किसकी थी ये मुस्कान? पढ़ें चंडीप्रसाद ‘हृदयेश’ की यह कहानी ‘मुस्कान’:

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कहानी: घर-जमाई - प्रेमचंद

कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद

हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:

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लघु-कथा: रेबीज़ - आलोक कुमार

लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार

कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:

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कहानी: अवसरवाद - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: अवसरवाद – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

रायबहादुर सम्पतिलाल शहर के धनाढ्य और सम्मानित व्यक्ति थे। अब उनकी इच्छा एम० एल० ए० का टिकट पाने की थी। क्या उनकी यह मुराद पूरी हुई? पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘अवसरवाद’:

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कहानी: अधूरी मूरत - रांगेय राघव

कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव

कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:

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कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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कहानी: परीक्षा - प्रेमचंद

कहानी: परीक्षा – प्रेमचंद

नादिरशाह ने दिल्ली फतेह कर ली थी। क्रूरता की सभी हदें उसने पार कर ली थीं। जब वह महल में पहुँचा तो उसने एक हुक्म दिया। उसके हुक्म से रनिवास में हलचल मच गयी। आखिर ऐसा क्या हुक्म दिया था उसने? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की यह कहानी ‘परीक्षा’:

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