कहानी: हिसाब-किताब – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’
पंडित रामशरण अपने विवाह योग्य बेटे का रिश्ता सोच समझ कर करना चाहते थे। उनकी मंशा थी कि रिश्ता ऐसा आये जहाँ से धन भी अच्छी मात्रा में आने की सम्भावना हो। इस कारण उन्होंने कई रिश्ते ठुकरा दिए थे। क्या उन्हें अपनी पसंद का रिश्ता अपने बेटे के लिए मिला?
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