कहानी: गुल्ली-डंडा - प्रेमचंद | मानसरोवर-1

कहानी: गुल्ली-डंडा – प्रेमचंद

कथावाचक को लगता है गुल्ली-डंडे से बेहतर खेल कोई नहीं है। आज कई वर्षों बाद वो उस जगह लौटा है जहाँ उसका बचपन बीता था और उसने अपना समय दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेलते हुए बिताया था। अपने उन्हीं बीते दिनों को याद वो फिर से ताज़ा करना चाहता है। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘गुल्ली-डंडा’:

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कहानी: पापी पेट - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: पापी पेट – सुभद्रा कुमारी चौहान

‘पापी पेट’ सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी कहानी है जो कि उनके संग्रह बिखरे मोती में प्रकाशित हुई थी। अंग्रेजी राज में कई भारतीय पुलिस का हिस्सा थे। एक लाठी चार्ज के बाद ऐसे ही कुछ भारतीयों के मनोभावों को यह कहानी दर्शाती है। आप भी पढ़ें:

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