कहानी: गुल्ली-डंडा – प्रेमचंद
कथावाचक को लगता है गुल्ली-डंडे से बेहतर खेल कोई नहीं है। आज कई वर्षों बाद वो उस जगह लौटा है जहाँ उसका बचपन बीता था और उसने अपना समय दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेलते हुए बिताया था। अपने उन्हीं बीते दिनों को याद वो फिर से ताज़ा करना चाहता है। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘गुल्ली-डंडा’:
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