लेख: रिश्ते बनाने और निभाने में बड़े माहिर रहे भारती जी - अनीता गोपेश| डॉ. धर्मवीर भारती की शख्सियत और पत्रकारिता | साहित्य विमर्श प्रकाशन

लेख: रिश्ते बनाने और निभाने में बड़े माहिर रहे भारती जी – अनीता गोपेश

धर्मवीर भारती पाठकों के बीच लेखक के रूप में ही विख्यात हैं पर ये भी सच है कि उन्होंने अपने जीवन का काफी हिस्सा पत्रकार और सम्पादक के रूप में बिताया था। ‘डॉ. धर्मवीर भारती की शख्सियत और पत्रकारिता’ में लेखक धर्मवीर भारती के पत्रकारीय जीवन को रेखांकित करने की कोशिश की गयी है। सुनील श्रीवास्तव, रवींद्र श्रीवास्तव और टिल्लन रिछारिया द्वारा इस पुस्तक का सम्पादन किया गया है। ‘रिश्ते बनाने और निभाने में बड़े माहिर रहे भारती जी’ इसी पुस्तक में संगृहीत लेख है जिसे कथाकार और वरिष्ठ रंगकर्मी अनीता गोपेश द्वारा लिखा गया है। आप भी पढ़ें:

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दैनिक जागरण बेस्ट सेलर लिस्ट हुई जारी; इन किताबों ने सूची में बनाई जगह

अप्रैल-जून 2026 की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई कथेतर श्रेणी में जगह

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथेतर श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:

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प्रताप नारायण मिश्र की स्मृति में - गोपाल राम गहमरी

संस्मरण: प्रताप नारायण मिश्र की स्मृति में – गोपाल राम गहमरी

लेखक प्रताप नारायण मिश्र हिंदी के लेखक थे। कहानी, निबंध, व्यंग्य, कविता आदि विधाओं में वह लेखन किया करते थे। अपने हास्य और व्यंग्य लेखों के लिए उन्हें प्रसिद्धि प्राप्त थी। लेखक गोपाल राम गहमरी ने उन पर यह संस्मरण लिखा था। आप भी पढ़ें:

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धर्म और पाप - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

धर्म और पाप – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

भारत धर्म-प्रधान देश है और मनुष्य पाप का चोर है, इसलिए धर्म और पाप की बिना सहायता लिए मैं मानने वाला आदमी नहीं हूँ। मैं अपनी अंतरात्मा में भली भाँति जानता हूँ कि पाप और धर्म दोनों खातों से भरपूर धन है और उसका कुछ सदुपयोग नहीं हो रहा है।

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साहित्य और मनोविज्ञान - प्रेमचंद

साहित्य और मनोविज्ञान – प्रेमचंद

साहित्य का वर्तमान युग मनोविज्ञान का युग कहा जा सकता है। साहित्य अब केवल मनोरंजन की वस्तु नहीं है। मनोरंजन के सिवा उसका कुछ और भी उद्देश्य है। वह अब केवल विरह और मिलन के राग नहीं अलापता। वह जीवन की समस्याओं पर विचार करता है, उनकी आलोचना करता है और उनको सुलझाने की चेष्टा करता है।

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खेल खिलाड़ी: और सुनील गावस्कर घूम गये! - योगेश मित्तल

खेल खिलाड़ी: और सुनील गावस्कर घूम गये!

योगेश मित्तल ने सरदार मनोहर सिंह की पत्रिका खेल खिलाड़ी में सम्पादक के तौर पर भी कार्य किया था। वह इस पत्रिका के लिए तस्वीरें निकालने का भी काम करते थे। अपने इस संस्मरण में वह क्रिकेट खिलाड़ियों की तस्वीरों को निकालने से जुड़ा एक संस्मरण साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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हर स्मृति मधुर नहीं होती – विनय प्रकाश तिर्की

‘द सिविल सर्पेंट्स’ के बाद ‘फ़ाइलों के नीचे दबा सत्य’ के रूप में लेखक विनय प्रकाश तिर्की अपना नवीन संस्मरण संग्रह लेकर पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हुए हैं। ‘हर स्मृति मधुर नहीं होती’ इस पुस्तक की प्रस्तावना के रूप में लिखा गया लेख है। यह लेख न केवल लेखक के बचपन के दिनों की एक झलक प्रस्तुत करता है बल्कि साथ में यह भी इंगित करता है कि पाठक प्रस्तुत पुस्तक से क्या उम्मीद कर सकता है।

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संस्मरण: हीरोगिरी - दिलीप कुमार

संस्मरण: हीरोगिरी – दिलीप कुमार

90 के दशक में फिल्में देखना भी उस समय के किशोरों के लिए एक तरह की जद्दोजहद ही हुआ करती थी। अधिकतर घरों में इसे व्यसन माना जाता था और घरवालों की कोशिश रहती थी कि वो फिल्मों से दूर रहें। फिल्म देखने से जुड़ी अपनी ऐसी ही याद लेखक दिलीप कुमार हमारे साथ साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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चुटकुलों के खलीफा सुरेन्द्र मोहन पाठक - योगेश मित्तल

चुटकुलों के खलीफा सुरेन्द्र मोहन पाठक – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल अपने समय में ट्रेड नामों के लिए खूब लेखन किया है। अपने इस पेशे के चलते उनका उस समय के प्रकाशकों और लेखकों से गहरा सम्बन्ध रहा है। अपराध कथा लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के साथ की भी उनकी कई यादें हैं। अपने इस लेख में वह सुरेन्द्र मोहन पाठक की एक खूबी के विषय में पाठकों को बता रहे हैं। आप भी पढ़िए:

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लेख: गुप्त ठग - प्रताप नारायण मिश्र

लेख: गुप्त ठग – प्रताप नारायण मिश्र

देश में शुद्ध चीज़ें मिलना दूभर हैं। कई बार देखा गया है कि मिलावटी सामान बेचने वाले धर्म-कर्म की बातें अधिक करते हैं लेकिन धोखा देते हुए ये बातें खुद भूल जाते हैं। प्रताप नारायण मिश्र का यह लेख ऐसे ही गुप्त ठगों को लेकर लिखा गया है। आप भी पढ़ें:

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लेख: कहानी सव्यासाची की - आकाश पाठक

लेख: कहानी सव्यसाची की – आकाश पाठक

आकाश पाठक सव्यसाची शृंखला के लेखक हैं। यह त्रयी 2021 से 2023 के बीच प्रकाशित हुई थी। अपने इस लेख में आकाश पाठक अपनी इस त्रयी की लेखन प्रक्रिया के विषय में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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निबंध: घोड़ाशाही - सियारामशरण गुप्त

निबंध: घोड़ाशाही – सियारामशरण गुप्त

राजपाठ पाने में घोड़ों का अपना महत्व रहा है। पहले भी था और अब भी है। पहले घोड़ों का क्या महत्व है और आज घोड़ाशाही में क्या परिवर्तन हुआ है यह इस निबंध में बताया जा रहा है। आप भी पढ़ें:

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