संस्मरण: हीरोगिरी - दिलीप कुमार

संस्मरण: हीरोगिरी – दिलीप कुमार

90 के दशक में फिल्में देखना भी उस समय के किशोरों के लिए एक तरह की जद्दोजहद ही हुआ करती थी। अधिकतर घरों में इसे व्यसन माना जाता था और घरवालों की कोशिश रहती थी कि वो फिल्मों से दूर रहें। फिल्म देखने से जुड़ी अपनी ऐसी ही याद लेखक दिलीप कुमार हमारे साथ साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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चुटकुलों के खलीफा सुरेन्द्र मोहन पाठक - योगेश मित्तल

चुटकुलों के खलीफा सुरेन्द्र मोहन पाठक – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल अपने समय में ट्रेड नामों के लिए खूब लेखन किया है। अपने इस पेशे के चलते उनका उस समय के प्रकाशकों और लेखकों से गहरा सम्बन्ध रहा है। अपराध कथा लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के साथ की भी उनकी कई यादें हैं। अपने इस लेख में वह सुरेन्द्र मोहन पाठक की एक खूबी के विषय में पाठकों को बता रहे हैं। आप भी पढ़िए:

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लेख: गुप्त ठग - प्रताप नारायण मिश्र

लेख: गुप्त ठग – प्रताप नारायण मिश्र

देश में शुद्ध चीज़ें मिलना दूभर हैं। कई बार देखा गया है कि मिलावटी सामान बेचने वाले धर्म-कर्म की बातें अधिक करते हैं लेकिन धोखा देते हुए ये बातें खुद भूल जाते हैं। प्रताप नारायण मिश्र का यह लेख ऐसे ही गुप्त ठगों को लेकर लिखा गया है। आप भी पढ़ें:

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लेख: कहानी सव्यासाची की - आकाश पाठक

लेख: कहानी सव्यसाची की – आकाश पाठक

आकाश पाठक सव्यसाची शृंखला के लेखक हैं। यह त्रयी 2021 से 2023 के बीच प्रकाशित हुई थी। अपने इस लेख में आकाश पाठक अपनी इस त्रयी की लेखन प्रक्रिया के विषय में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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निबंध: घोड़ाशाही - सियारामशरण गुप्त

निबंध: घोड़ाशाही – सियारामशरण गुप्त

राजपाठ पाने में घोड़ों का अपना महत्व रहा है। पहले भी था और अब भी है। पहले घोड़ों का क्या महत्व है और आज घोड़ाशाही में क्या परिवर्तन हुआ है यह इस निबंध में बताया जा रहा है। आप भी पढ़ें:

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दवाओं का एजेंट केवलकृष्ण कैसे बना उपन्यासकार 'राजहंस'

दवाओं का एजेंट केवलकृष्ण कैसे बना उपन्यासकार ‘राजहंस’ – योगेश मित्तल

‘राजहंस’ अपने समय के नामी लेखक थे। उनके सामाजिक उपन्यासों की पाठकों के बीच में धूम थी। पर असल में वो कभी दवाओं के एजेंट हुआ करते थे। दवाओं के एजेंट से वह उपन्यासकार किस तरह बनें यह लेखक योगेश मित्तल अपने इस लेख में बता रहे हैं:

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आपकी सिर्फ एक गलती आपको इंसान से एक मीम मटेरियल बना सकती है - गौरव कुमार निगम

आपकी सिर्फ एक गलती आपको इंसान से एक मीम मटेरियल बना सकती है – गौरव कुमार निगम

आज हम ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ सब इसी फिराक में रहते हैं कि कोई गलती करता मिले और फिर उस गलती को हम इस्तेमाल करके अधिक से अधिक लाइक, शेयर और व्यूज़ पाएँ। इसी प्रवृत्ति और उससे होने वाले असर के ऊपर लेखक गौरव कुमार निगम ने अपने यह विचार लिखें हैं। आप भी पढ़ें:

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.. तो यहाँ रहा करते थे शरतचंद्र - रुपाली संझा

यात्रा वृत्तांत: …तो यहाँ रहा करते थे शरतचंद्र

लेखिका रुपाली ‘संझा’ को पढ़ने लिखने के साथ घूमने-फिरने का भी शौक है। जब वह लिख पढ़ रही नहीं होती हैं तो घूमती हैं। फिर अपने लेखों के माध्यम से वह पाठक को उस की गयी यात्रा पर ले चलती हैं। एक बुक जर्नल पर हम उनका ऐसा ही एक लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। अपने इस लेख के माध्यम से वह पाठक को ‘शरतकुटीर’ की यात्रा पर साथ ले जा रही हैं। आप भी चलिए:

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संस्मरण: क्रिकेट मैच - आलोक सिंह खालौरी

संस्मरण: क्रिकेट मैच – आलोक सिंह खालौरी

लेखक आलोक सिंह ‘खालौरी’ अपनी लिखी अपराध कथाओं और भय कथाओं के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ-साथ वो अपने जीवन से जुड़े लोगों के रोचक संस्मरण भी साझा करते रहते हैं। इस बार वो क्रिकेट से जुड़ा अपना एक संस्मरण पाठकों के लिए लाए हैं। आप भी पढ़ें लेखक आलोक सिंह खालौरी का यह संस्मरण ‘क्रिकेट मैच’:

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मैं कहानी लेखक कैसे बना? - राहुल सांकृत्यायन

मैं कहानी लेखक कैसे बना? – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन अपने लिखे यात्रा साहित्य के लिए अधिक जाने जाते हैं। लेकिन उन्होंने उपन्यास और कहानियाँ भी लिखी हैं। उन्होंने कहानियाँ और उपन्यास लिखना कैसे शुरू किया यह वह अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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बात - प्रताप नारायण मिश्र

बात – प्रताप नारायण मिश्र

बात कर पाना ही वह गुण है जो मनुष्य को मनुष्य बनाता है। उन्हें दूसरे पशुओं से अलग करता है। बात से रिश्ते बन भी जाते हैं और गलत बात से बिगड़ भी जाते हैं। बात का महत्व क्या है? उसकी ज़रूरत क्या है और कितने तरह की वह होती है? इसी बात पर प्रताप नारायण मिश्र ने यह निबंध लिखा था। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: उपन्यासकार कुमार कश्यप से कुछ मुलाकातें - योगेश मित्तल

संस्मरण: उपन्यासकार कुमार कश्यप से कुछ मुलाकातें – योगेश मित्तल

कुमार कश्यप अपने समय के चर्चित उपन्यासकार थे। उनका किरदार विक्रांत पाठकों के बीच खासा लोकप्रिय था। लेखक योगेश मित्तल का भी उनसे मिलना-जुलना रहा था। अपनी ऐसी ही कुछ मुलाकातों के संस्मरण वो साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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