.. तो यहाँ रहा करते थे शरतचंद्र - रुपाली संझा

यात्रा वृत्तांत: …तो यहाँ रहा करते थे शरतचंद्र

लेखिका रुपाली ‘संझा’ को पढ़ने लिखने के साथ घूमने-फिरने का भी शौक है। जब वह लिख पढ़ रही नहीं होती हैं तो घूमती हैं। फिर अपने लेखों के माध्यम से वह पाठक को उस की गयी यात्रा पर ले चलती हैं। एक बुक जर्नल पर हम उनका ऐसा ही एक लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। अपने इस लेख के माध्यम से वह पाठक को ‘शरतकुटीर’ की यात्रा पर साथ ले जा रही हैं। आप भी चलिए:

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संस्मरण: क्रिकेट मैच - आलोक सिंह खालौरी

संस्मरण: क्रिकेट मैच – आलोक सिंह खालौरी

लेखक आलोक सिंह ‘खालौरी’ अपनी लिखी अपराध कथाओं और भय कथाओं के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ-साथ वो अपने जीवन से जुड़े लोगों के रोचक संस्मरण भी साझा करते रहते हैं। इस बार वो क्रिकेट से जुड़ा अपना एक संस्मरण पाठकों के लिए लाए हैं। आप भी पढ़ें लेखक आलोक सिंह खालौरी का यह संस्मरण ‘क्रिकेट मैच’:

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मैं कहानी लेखक कैसे बना? - राहुल सांकृत्यायन

मैं कहानी लेखक कैसे बना? – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन अपने लिखे यात्रा साहित्य के लिए अधिक जाने जाते हैं। लेकिन उन्होंने उपन्यास और कहानियाँ भी लिखी हैं। उन्होंने कहानियाँ और उपन्यास लिखना कैसे शुरू किया यह वह अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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बात - प्रताप नारायण मिश्र

बात – प्रताप नारायण मिश्र

बात कर पाना ही वह गुण है जो मनुष्य को मनुष्य बनाता है। उन्हें दूसरे पशुओं से अलग करता है। बात से रिश्ते बन भी जाते हैं और गलत बात से बिगड़ भी जाते हैं। बात का महत्व क्या है? उसकी ज़रूरत क्या है और कितने तरह की वह होती है? इसी बात पर प्रताप नारायण मिश्र ने यह निबंध लिखा था। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: उपन्यासकार कुमार कश्यप से कुछ मुलाकातें - योगेश मित्तल

संस्मरण: उपन्यासकार कुमार कश्यप से कुछ मुलाकातें – योगेश मित्तल

कुमार कश्यप अपने समय के चर्चित उपन्यासकार थे। उनका किरदार विक्रांत पाठकों के बीच खासा लोकप्रिय था। लेखक योगेश मित्तल का भी उनसे मिलना-जुलना रहा था। अपनी ऐसी ही कुछ मुलाकातों के संस्मरण वो साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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क्या लिखै - प्रताप नारायण मिश्र

क्या लिखै – प्रताप नारायण मिश्र

‘क्या लिखै’ प्रताप नारायण मिश्र का निबंध है। वह पाठक से पूछ रहे हैं कि उन्हें क्या लिखना चाहिए? आखिर वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? आप भी पढ़ें:

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निबंध: बातचीत - बालकृष्ण भट्ट

निबंध: बातचीत – बालकृष्ण भट्ट

बातचीत करना मनुष्यों को धरती के अन्य जीवों से अलग बनाता है। हम बातें करते हैं, तरह-तरह की बातें करते हैं और अलग-अलग कारणों से करते हैं। बातचीत क्या होती है? कितने प्रकार की होती है? यह सब बालकृष्ण भट्ट ने अपने इस लेख में दर्शाया है। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: एक थे मामू - गजानन रैना

संस्मरण: एक थे मामू – गजानन रैना

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। वह सोशल मीडिया पर लिखे अपने चुटीले लेखों के लिए जाने जाते हैं। आज वो अपने एक परिचित मामू के विषय में आपको बता रहे हैं। आखिर कौन थे ये मामू? जानने के लिए पढ़ें गजानन रैना का लिखा यह संस्मरण ‘एक थे मामू’:

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मेरी पहली यात्रा - राहुल सांकृत्यायन

मेरी पहली यात्रा – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन अपनी घुमक्कड़ी के लिए जाने जाते हैं। वह अपने जीवन में कई दुर्गम जगहों में गये। पर इस सबकी शुरुआत कैसे हुई? उनकी पहली यात्रा कैसी थी? आइए जानते हैं:

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पुस्तक 'न्यू मीडिया के विविध आयाम' का हुआ लोकार्पण

पुस्तक ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ का हुआ लोकार्पण

13 अप्रैल 2026 को देहरादून के दून लाइब्रेरी में पुस्तक ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक डॉ. सुशील उपाध्याय, डॉ अजीत सिंह तोमर व डॉ. योगेश कुमार योगी द्वारा सम्पादित है और पुस्तक को समय साक्ष्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

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मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता - प्रताप नारायण मिश्र

मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता – प्रताप नारायण मिश्र

मित्रों से धोखा हम सभी ने कभी न कभी खाया है। पर क्या कपटी मित्र बुरा होता है? इसी विषय पर लेखक प्रताप नारायण मिश्र ने यह लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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किस्से मैत्रीदत्त के: नया स्कूटर - आलोक सिंह खालौरी

किस्से मैत्रीदत्त के: नया स्कूटर – आलोक सिंह खालौरी

हम सभी के जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जिनके व्यक्तित्व की गहरी छाप हमारे मन मस्तिष्क पर छूट जाती है। उनके साथ रहने पर जीवन में ऐसे रोचक प्रसंग होने लगते हैं जो भले ही घटित होने के दौरान हमारी जान सुखा दें लेकिन जिन्हें भविष्य में याद करते हुए हमारे चेहरे पर मुस्कान सी आ जाती है। लेखक आलोक सिंह खालौरी के मित्र मैत्रीदत्त भी ऐसी ही शख्सियत के मालिक थे। पढ़ें मैत्रीदत्त से जुड़ा लेखक आलोक सिंह खालौरी का लिखा यह संस्मरण ‘नया स्कूटर’

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