मेरी पहली यात्रा – राहुल सांकृत्यायन
राहुल सांकृत्यायन अपनी घुमक्कड़ी के लिए जाने जाते हैं। वह अपने जीवन में कई दुर्गम जगहों में गये। पर इस सबकी शुरुआत कैसे हुई? उनकी पहली यात्रा कैसी थी? आइए जानते हैं:
मेरी पहली यात्रा – राहुल सांकृत्यायन Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
राहुल सांकृत्यायन अपनी घुमक्कड़ी के लिए जाने जाते हैं। वह अपने जीवन में कई दुर्गम जगहों में गये। पर इस सबकी शुरुआत कैसे हुई? उनकी पहली यात्रा कैसी थी? आइए जानते हैं:
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13 अप्रैल 2026 को देहरादून के दून लाइब्रेरी में पुस्तक ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक डॉ. सुशील उपाध्याय, डॉ अजीत सिंह तोमर व डॉ. योगेश कुमार योगी द्वारा सम्पादित है और पुस्तक को समय साक्ष्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।
पुस्तक ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ का हुआ लोकार्पण Read More
मित्रों से धोखा हम सभी ने कभी न कभी खाया है। पर क्या कपटी मित्र बुरा होता है? इसी विषय पर लेखक प्रताप नारायण मिश्र ने यह लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:
मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता – प्रताप नारायण मिश्र Read More
हम सभी के जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जिनके व्यक्तित्व की गहरी छाप हमारे मन मस्तिष्क पर छूट जाती है। उनके साथ रहने पर जीवन में ऐसे रोचक प्रसंग होने लगते हैं जो भले ही घटित होने के दौरान हमारी जान सुखा दें लेकिन जिन्हें भविष्य में याद करते हुए हमारे चेहरे पर मुस्कान सी आ जाती है। लेखक आलोक सिंह खालौरी के मित्र मैत्रीदत्त भी ऐसी ही शख्सियत के मालिक थे। पढ़ें मैत्रीदत्त से जुड़ा लेखक आलोक सिंह खालौरी का लिखा यह संस्मरण ‘नया स्कूटर’
किस्से मैत्रीदत्त के: नया स्कूटर – आलोक सिंह खालौरी Read More
श्री सांता नंद मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का भव्य लोकार्पण समारोह जेएनयू कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उत्सव बन गया।
सांता नंद मिश्र की पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का हुआ लोकार्पण Read More
मई 1935 में प्रेमचंद का लिखा एक लेख ‘सिनेमा और साहित्य’ ‘लेखक’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को पढ़ने के बाद नरोत्तमप्रसाद नागर ने उस लेख का प्रतिवाद लिखा था। प्रेमचंद का वो लेख, नरोत्तमप्रसाद का प्रतिवाद और उनके प्रतिवाद का दिया गया प्रेमचंद का जवाब यहाँ पर दिया जा रह है। यह पूरा लेख हंस पत्रिका में जून 1935 में प्रकाशित हुआ था। आज भी सिनेमा और साहित्य के बीच की यह बहस प्रासंगिक है। आप भी इसे पढ़ें:
फिल्म और साहित्य – प्रेमचंद Read More
हिंदी की वरिष्ठ लेखक ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है Read More
लेखक-इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय की नई किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का लोकार्पण 20 दिसम्बर की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुपरिचित इतिहासकार प्रोफ़ेसर एस. इरफ़ान हबीब ने की।
लेखक अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का हुआ लोकार्पण Read More
कहानी क्या होती है? उसकी क्या विशेषताएँ हैं? कहानी और उपन्यास में क्या फर्क है? इन प्रश्नों का उत्तर तो शिवपूजन सहाय अपने इस लेख में देते ही हैं साथ ही अपने समय के कुछ चुनिंदा कहानिकारों और चुनिंदा कहानियों से पाठकों का परिचय करवाते हैं। आप भी पढ़ें:
कहानी कला – शिवपूजन सहाय Read More
योगेश मित्तल को लेखन के क्षेत्र में आने का मौका कैसे मिला और किस तरह उन्होंने अपने साथी लेखक बिमल चटर्जी के साथ मिलकर एक शृंखलाबद्ध उपन्यास लिखना शुरु किया? यह वह इस संस्मरण में साझा कर रहे हैं। आप भी पढ़ें:
दो लेखकों द्वारा मिल कर लिखी जाने वाली प्रथम शृंखला Read More
जयदीप शेखर लेखक और अनुवादक हैं। बांग्ला साहित्य में रुचि रखते हैं। बांग्ला से हिंदी में उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया है। बांग्ला लेखक प्रेमेंद्र मित्र के किरदार घनादा और उसको लेकर लिखी गयी कहानियों का वह इस लेख में पाठक से परिचय करवा रहे हैं। आप भी पढ़ें:
कहाँ-कहाँ न गये घना’दा – जयदीप शेखर Read More
योगेश मित्तल ने अपने लेखन करियर के अधिकतर वर्षों में ट्रेड नामों के लिए लेखन किया। इस कारण वह गुमनामी में रहे और उन्हें वह ख्याति न मिल सकी जो उन्हें तब मिलती जब वो अपने नाम से छपते। पर ऐसा नहीं था कि उन्हें मशहूर होने का मौके नहीं मिले थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वह महशूर नहीं हो सके। लेखक योगेश मित्तल अपने शब्दों में यह बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
मैं मशहूर क्यों नहीं हुआ – योगेश मित्तल Read More