अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित

अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित

अरुंधति रॉय की बहुप्रशंसित किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। इसका हिंदी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है।

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सांता नंद मिश्र की पुस्तक 'गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती' का हुआ लोकार्पण

सांता नंद मिश्र की पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का हुआ लोकार्पण

श्री सांता नंद मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती’ का भव्य लोकार्पण समारोह जेएनयू कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उत्सव बन गया।

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लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा के पाँचवे खंड का हुआ प्री ऑर्डर शुरु

लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा के पाँचवे खंड का हुआ प्री ऑर्डर शुरु

मशहूर अपराधकथा लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा के पाँचवे खंड का प्रीऑर्डर शुरु हो गया है। लेखक की आत्मकथा का पाँचवा खंड साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर:

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जीवन सार - प्रेमचंद

जीवन सार – प्रेमचंद

‘जीवन सार’ प्रेमचंद का लिखा आत्मकथात्मक लेख है जिसमें वह अपने जीवन की मुख्य घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं। ‘हंस’ पत्रिका के वर्ष 1932 के जनवरी-फरवरी अंक में यह लेख प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा ‘दियासलाई’ का लोकार्पण कल

कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा ‘दियासलाई’ का लोकार्पण कल

29 जनवरी, 2025 (बुधवार) नई दिल्ली/जयपुर। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भारतीय मूल के पहले व्यक्ति कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा ‘दियासलाई’ का लोकार्पण गुरुवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में होगा। …

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लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा का चौथा खंड, पानी केरा बुदबुदा, का हुआ लोकार्पण

लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा के चौथे खंड, पानी केरा बुदबुदा, का हुआ लोकार्पण

देश के टॉप मिस्ट्री राइटर के रूप में पहचाने जानेवाले सुरेंद्र मोहन पाठक की आत्मकथा का चौथा खंड, पानी केरा बुदबुदा, का प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में भव्य लॉन्च हुआ। साहित्य विमर्श प्रकाशन की ओर से प्रकाशित पानी केरा बुदबुदा के लोकार्पण के अवसर पर विशिष्ट साहित्यकार ममता कालिया के अलावा देश भर से श्री पाठक के प्रशंसक उपस्थित हुए।

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अगर दिल को पढ़ना है तो पढ़कर देखिये ‘सफरनामा – कर्मभूमि की जीवनयात्रा’

वरिष्ठ लेखक योगेश मित्तल पिछले पचास वर्ष से लेखन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपना अधिकतर जीवन ट्रेड नामों के लिए लिखते हुए बिताया है पर अब फेसबुक, ब्लॉग, पुस्तकों …

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न बैरी न कोई बेगाना: कुछ आपबीती, कुछ जगबीती

सुरेन्द्र मोहन पाठक आज हिन्दी अपराध साहित्य के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखक हैं। सन 2018 में जब उनकी आत्मकथा का पहला भाग न बैरी न कोई बैगाना प्रकाशित हुआ था तो मित्र राशीद शेख ने पुस्तक पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखी थी। उस वक्त यह लेख एक हिन्दी अखबार में भी प्रकाशित हुआ था। राशीद शेख का लिखा यह लेख बहुत ही खूबसूरत तरीके से किताब के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। आप भी पढ़िए।

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