कहानी: मँझली रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मँझली रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तारा अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी और भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब राजा साहब ने अपने मँझले बेटे के लिए तारा को बहु के रूप में चुना तो न केवल तारा के माता-पिता बल्कि तारा भी बहुत खुश हुई थी। आखिर वो रानी जो बनने जा रही थी। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘मँझली रानी’:

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स्टॉप प्रेस - सुरेन्द्र मोहन पाठक | साहित्य विमर्श प्रकाशन

पुस्तक अंश: स्टॉप प्रेस – सुरेन्द्र मोहन पाठक

‘स्टॉप प्रेस’ लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का हालिया पुनः मुद्रित हुआ उपन्यास है। यह उनकी सुनील शृंखला का उपन्यास है। एक बुक जर्नल आपके लिए स्टॉप प्रेस का शुरुआती अंश यहाँ प्रस्तुत कर रहा है। उम्मीद है यह अंश आपको पसंद आएगा:

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कहानी: परीक्षा - प्रेमचंद

कहानी: परीक्षा – प्रेमचंद

नादिरशाह ने दिल्ली फतेह कर ली थी। क्रूरता की सभी हदें उसने पार कर ली थीं। जब वह महल में पहुँचा तो उसने एक हुक्म दिया। उसके हुक्म से रनिवास में हलचल मच गयी। आखिर ऐसा क्या हुक्म दिया था उसने? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की यह कहानी ‘परीक्षा’:

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क्या लिखै - प्रताप नारायण मिश्र

क्या लिखै – प्रताप नारायण मिश्र

‘क्या लिखै’ प्रताप नारायण मिश्र का निबंध है। वह पाठक से पूछ रहे हैं कि उन्हें क्या लिखना चाहिए? आखिर वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? आप भी पढ़ें:

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कहानी: जैसिरी - राहुल सांकृत्यायन

कहानी: जैसिरी – राहुल सांकृत्यायन

पंदहा गाँव के जैसिरी को अक्षर ज्ञान नहीं मिला था लेकिन फिर भी उनके भीतर ज्ञान की कमी नहीं थी। वह अपनी उम्र वाले लोगों से एकदम अलग थे। आखिर उन्होंने ये ज्ञान कैसे हासिल किया था? वह क्या चीजें थीं जो उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थीं? पढ़ें राहुल सांकृत्यायन की यह कहानी जैसिरी:

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वही छोटा-सा तिरछा दाँत - राम 'पुजारी' | फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशंस

पुस्तक अंश: वही छोटा-सा तिरछा दाँत – राम ‘पुजारी’

किशोरवय उम्र के प्यार का असर कुछ और ही होता है। 90 के दशक में जब सम्पर्क के माध्यम कम होते थे तो ऐसे प्रेम की कसक अपने चरम पर होती थी। इसी दशक के दो किरदारों कृष्ण और श्रावणी की प्रेम कहानी लेखक राम ‘पुजारी’ अपने उपन्यास ‘वही तिरछा सा छोटा दाँत’ में पाठकों के समक्ष लेकर आए हैं। एक बुक जर्नल पर पढ़ें इस उपन्यास का प्रथम अध्याय ‘पहली नज़र’:

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लघु-कथा: फंदा - आनंद के सिंह

लघु-कथा: फंदा – आनंद के सिंह

‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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मेरी पहली यात्रा - राहुल सांकृत्यायन

मेरी पहली यात्रा – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन अपनी घुमक्कड़ी के लिए जाने जाते हैं। वह अपने जीवन में कई दुर्गम जगहों में गये। पर इस सबकी शुरुआत कैसे हुई? उनकी पहली यात्रा कैसी थी? आइए जानते हैं:

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सुरेन्द्र मोहन पाठक की पुस्तक है प्री ऑर्डर के लिए तैयार; 27 साल बाद फिर हुआ है रिप्रिंट
कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा - सुमन बाजपेयी

कहानी: लौटकर यहीं आऊँगा – सुमन बाजपेयी

कथावाचिका को लगता है कि उसका पति सुशांत उसका खयाल नहीं रखता है। लापरवाह है। उसके इस रवैये से वह परेशान रहती है। आज भी सुशांत ने कुछ ऐसा ही किया था। सुशांत ने आखिर क्या किया था? आगे क्या हुआ? पढ़ें सुमन बाजपेयी की कहानी ‘लौटकर यहीं आऊँगा’:

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मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता - प्रताप नारायण मिश्र

मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता – प्रताप नारायण मिश्र

मित्रों से धोखा हम सभी ने कभी न कभी खाया है। पर क्या कपटी मित्र बुरा होता है? इसी विषय पर लेखक प्रताप नारायण मिश्र ने यह लेख लिखा था। आप भी पढ़ें:

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कहानी: दृष्टिकोण - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: दृष्टिकोण – सुभद्रा कुमारी चौहान

निर्मला और रमाकांत दोनों दुनिया की नज़र में आदर्श दंपति थे। पर उनकी प्रकृति अलग-अलग थी। जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण अलग अलग था। इसी कारण कभी कभार उनके बीच मतभेद भी हो जाता था। आखिर इस अलग-अलग दृष्टिकोण का क्या नतीजा निकला? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘दृष्टिकोण’:

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