पुस्तक अंश: वही छोटा-सा तिरछा दाँत – राम ‘पुजारी’
किशोरवय उम्र के प्यार का असर कुछ और ही होता है। 90 के दशक में जब सम्पर्क के माध्यम कम होते थे तो ऐसे प्रेम की कसक अपने चरम पर होती थी। इसी दशक के दो किरदारों कृष्ण और श्रावणी की प्रेम कहानी लेखक राम ‘पुजारी’ अपने उपन्यास ‘वही तिरछा सा छोटा दाँत’ में पाठकों के समक्ष लेकर आए हैं। एक बुक जर्नल पर पढ़ें इस उपन्यास का प्रथम अध्याय ‘पहली नज़र’:
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