कहानी: तावान – प्रेमचंद
छकौड़ीलाल दुकानदार थे और कॉंग्रेस ने उन पर तावान (जुर्माना) लगा दिया था। कॉंग्रेस ने ऐसा क्यों किया? क्या छकौड़ीलाल ने तावान दिया? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘तावान’:
कहानी: तावान – प्रेमचंद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
छकौड़ीलाल दुकानदार थे और कॉंग्रेस ने उन पर तावान (जुर्माना) लगा दिया था। कॉंग्रेस ने ऐसा क्यों किया? क्या छकौड़ीलाल ने तावान दिया? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘तावान’:
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आदित्य ने अपने आप को समाजसेवा के लिए न्यौछावर कर दिया था। इसका उसे कोई पछतावा भी नहीं था। वह चाहता था कि उसका बेटा भी उसी की राह पर चले। लोगों की निस्वार्थ भलाई करे। उसकी पत्नी अरुणा की भी यही इच्छा थी। आदित्य को पूरा विश्वास था कि अरुणा उनके बेटे प्रकाश को ऐसी परवरिश देगी जो उनके सपनों को साकार करने में मदद करेगी। क्या आदित्य और अरुणा का स्वप्न पूरा हुआ?
कहानी: माँ – प्रेमचंद Read More
अरुंधति रॉय की बहुप्रशंसित किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। इसका हिंदी अनुवाद प्रभात सिंह ने किया है।
अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिंदी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित Read More
श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।
लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त Read More
डॉ लक्ष्मण की बातों से सुधा प्रभावित थी। वहीं हरिशचंद्र को वह अपने दोस्त की तरह देखती थी। यह तीनों ही आपस में कई मुद्दों पर बातचीत किया करते थे। यह मुद्दे क्या था? इन बातों का क्या नतीजा निकलता था? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘काई’:
कहानी: काई – रांगेय राघव Read More
नूरी एक नाचने गाने वाली थी जो शहंशाह अकबर की बेगम सुलताना के लिए काम करती थी। वह शाहजादा याकूब खाँ से प्रेम करती थी। वह चाहती थी याकूब अपने उस मकसद को भुला दे जिसे पूरा करने के लिए वह दृढ़ प्रतिज्ञ था। नूरी जानती थी इस मकसद को पूरा करने में याकूब की जान भी जा सकती थी। आखिर क्या था याकूब का मकसद? क्या वो पूरा हुआ? क्या नूरी को उसका प्यार मिला?
कहानी: नूरी – जयशंकर प्रसाद Read More
देश में शुद्ध चीज़ें मिलना दूभर हैं। कई बार देखा गया है कि मिलावटी सामान बेचने वाले धर्म-कर्म की बातें अधिक करते हैं लेकिन धोखा देते हुए ये बातें खुद भूल जाते हैं। प्रताप नारायण मिश्र का यह लेख ऐसे ही गुप्त ठगों को लेकर लिखा गया है। आप भी पढ़ें:
लेख: गुप्त ठग – प्रताप नारायण मिश्र Read More
कई दिन से कथावाचक के घर में कलह मची हुई थी। उसकी माँ और पत्नी आपस में बात नहीं कर रही थीं। इस कारण वह दुखी है। ऐसा क्यों था? क्या कथावाचक का दुख कम हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘झाँकी’:
कहानी: झाँकी – प्रेमचंद Read More
हरिधन को अब लगने लगा था कि अब उसकी उसके ससुराल में इज़्ज़त नहीं रही थी। उसके ससुराल वाले तो उसकी इज़्ज़त करते नहीं थे साथ में उसे अब लगता था कि उसकी पत्नी गुमानी के नज़र में भी उसकी इज़्ज़त नहीं रही थी। हरिधन को ऐसा क्यों लग रहा था? उसने आगे क्या किया? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘घर-जमाई’:
कहानी: घर-जमाई – प्रेमचंद Read More
कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:
लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार Read More
कथावाचक के दफ्तर वाली गली में ही वह बूढ़ा हरचरन रहता था। वहाँ वो अपने परिवार के साथ मिलकर मूर्तियाँ बनाता था। एक बार कथावाचक ने देखा कि वह एक मूर्ति बना रहा है। उनके बीच उस अधूरी मूर्ति और वर्तमान हालात पर बातें होने लगीं। यह बातें क्या थीं? पढ़ें रांगेय राघव की यह कहानी ‘अधूरी मूर्ति’:
कहानी: अधूरी मूरत – रांगेय राघव Read More
‘सुशीला सदन’ लेखक पराग डिमरी की सातवीं पुस्तक है। यह एक निम्न वर्गीय महिला सुशीला के अपने घर के बनाने की जद्दोजहद को दर्शाने के बहाने, उस जीवन की झलक भी दिखलाती है जो शायद आज के समय में भौतिक चमक-दमक के आकर्षण के चलते अब दिखनी धुँधली , या बदरंग सी हो गयी है। एक बुक जर्नल पर हम ‘सुशीला सदन’ का यह शुरुआती अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं:
पुस्तक अंश: सुशीला सदन – पराग डिमरी Read More