लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर
‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
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डॉ शैकलटन दक्षिणी ध्रुव की यात्रा पर जाकर लौट आये थे। बीमारी ने उन्हें आने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने अपनी यात्रा का वृत्तांत लिखा जिसे आधार बनाकर महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा यह लेख लिखा गया। आप भी पढ़ें:
यात्रा वृत्तांत: यमलोक का जीवन – महावीर प्रसाद द्विवेदी Read More
गाँव में रहने वाला कथावाचक जब पहली बार कलकत्ते में पहुँचता है तो उसके साथ क्या होता है ये आचार्य चतुरसेन ने अपनी कहानी ‘कलकत्ते में एक रात’ में बताया है। शहर में नये नये आये लोगों को कैसे ठग अपना शिकार बना देते हैं यह इसमें दर्शाया है। आप भी पढ़ें:
कहानी: कलकत्ते में एक रात – आचार्य चतुरसेन शास्त्री Read More
राजेन्द्र बाला घोष बंग महिला के नाम से लेखन किया करती थीं। वह अपने लेखन में समाज पर करारा व्यंग्य करा करती थीं। पढ़ें उनकी लिखी पत्रात्मक शैली में लिखी यह कहानी ‘चंद्रदेव से मेरी बातें’।
कहानी: चंद्रदेव से मेरी बातें – राजेंद्र बाला घोष (बंग महिला) Read More
पार्वती को लगता था कि स्त्री की इज़्ज़त गहनों से ही होती है। इसीलिए जब उसके पति सुरेंद्र ने उसे नये गहने लाकर दिये तो वह बहुत खुश हुई। उसे लगा था कि अब उसके मायके में उसकी पूछ होगी। पर क्या असल में ऐसा हुआ? क्या उसकी सोच सही थी? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘जंजाल’:
कहानी: जंजाल – प्रेमचंद Read More
रज़िया के पति रामू ने रज़िया की उम्र होने पर एक नयी पत्नी लाने का फैसला किया और आखिर उसकी सौत ले ही आया। वह घर जो रज़िया ने अपनी मेहनत से बनाया था अब उसका नहीं रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘सौत’:
कहानी: सौत – प्रेमचंद Read More
मनसा एक पढ़ी लिखी स्वतंत्र ख़यालों की लड़की थी। उसका सोचना था कि शादी एक तरह की पैकेज डील होती है जिसमें हर चीज हर किसी के हिस्से नहीं आती। सुबोध को भी मनसा के साथ ऐसे ही एक डील मिली थी। आखिर क्या थी ये डील? जानने के लिए पढ़ें लेखिका सुमन बाजपेयी की कहानी ‘पैकेज डील’।
कहानी: पैकेज डील – सुमन बाजपेयी Read More
नये ज़माने और पुराने ज़माने में क्या फर्क था? नये ज़माने में क्या अच्छी बातें हैं और कौन सी बुरी और पुराने ज़माने के हिसाब से वह कहाँ ठहरता है। और नये ज़माने के शासकों को किन बातों का खयाल रखना चाहिए? यह सब प्रेमचंद अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
पुराना ज़माना – नया ज़माना – प्रेमचंद Read More
योगेश मित्तल अपने लिखे सजीव संस्मरणों के लिए जाने जाते हैं। अपने इस संस्मरण अधूरी मुलाकात में वह एक क्रिकेट खिलाड़ी से हुई अपनी अधूरी मुलाकात का किस्सा बता रहे हैं। पढ़ें संस्मरण का प्रथम भाग:
संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात – 1 – योगेश मित्तल Read More
गल्प लेखन में प्रथम पंक्ति का अपना अलग महत्व होता है। अलग -अलग लेखक किस तरह से पहली पंक्ति का प्रयोग करके उससे विभिन्न भाव जागृत करते हैं यह प्रवीण कुमार झा अपने इस लेख में बता रहे हैं। लेखन से जुड़े और लेखन की इच्छा रखने वालों को इस लेख से काफी कुछ सीखने को मिलेगी।
कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्व – प्रवीण कुमार झा Read More
1884 में गोपाल राम गहमरी को भारतेंदु हरिश्चंद्र की मंडली द्वारा मंचित नाटकों देखने का अवसर प्राप्त हुआ था। स्वयं भारतेंदु ने भी सत्य हरिश्चंद्र में हरिश्चंद्र की भूमिका निभायी थी। यह अवसर गोपाल राम गहमरी को कैसे मिला और इन नाटकों को देखने का उनका अनुभव कैसा था, यह वह भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए इस संस्मरण में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र – गोपाल राम गहमरी Read More
दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। अनुवाद श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:
2025 की दूसरी तिमाही की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई अनुवाद श्रेणी में जगह Read More