हाथी के दाँत - विकास नैनवाल | कहानी

लघु-कथा: हाथी के दाँत – विकास नैनवाल ‘अंजान’

‘हाथी के दाँत’ विकास नैनवाल ‘अंजान’ की लिखी लघु-कथा है। अक्सर हमारी कथनी और करनी में फर्क होता है। कहानी इसी बात को रेखांकित करती है। यह प्रथम बार उत्तरांचल पत्रिका के अगस्त 2019 अंक में प्रकाशित हुई थी।

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नशा - प्रेमचंद

कहानी: नशा – प्रेमचंद

प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’ दो किशोरों की कहानी है। सामंतवाद के खिलाफ रहने वाला कथावाचक अपने मित्र, जो कि जमींदार घराने से आता है, के गाँव समय बिताने जाता है। वहाँ जो कुछ होता है वही कहानी बनती है। यह मानसरोवर खंड 1 में संकलित है।

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रांगेय राघव की कहानी 'पेड़'

कहानी: पेड़ – रांगेय राघव

रांगेय राघव हिंदी के लेखक थे। उन्होंने अपने जीवन में उपन्यास, कहानियाँ, रिपोर्ताज, अनुवाद किया। वह अपने विपुल लेखन के लिए जाने जाते हैं। पढे उनकी कहानी ‘पेड़’।

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आसक्ति-निशांत मौर्य | कहानी

कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य

निशांत मौर्य कानपुर के रहने वाले हैं। साहित्य से उन्हें गहरा लगाव है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनकी कहानी आसक्ति।

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शिवपूजन सहाय की कहानी 'कहानी का प्लॉट'

कहानी: कहानी का प्लॉट – शिवपूजन सहाय

शिवपूजन सहाय उपन्यासकार, संपादक और गद्यकार थे। उन्होंने हिंदी और भोजपुरी भाषा में लेखन किया। पढ़ें उनकी कहानी ‘कहानी का प्लॉट’।

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इंद्रजाल - जयशंकर प्रसाद | कहानी

कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।

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आखिरी हीला - प्रेमचंद | कहानी

कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद

‘आखिरी हीला’ प्रेमचंद की लिखी हास्यकथा है। कथावाचक को जब पता लगता है कि उसकी पत्नी गाँव से शहर उसके पास आकर रहना चाहती है तो वह उसका शहर आना टालने के लिए क्या क्या बहाने गढ़ता है। आप भी पढ़िए।

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कहानी: भाई-बहन - राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:

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गुंजन-विकास नैनवाल | कहानी

कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’

सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।

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हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आलोचना’ की वेबसाइट शुरू

हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आलोचना’ की वेबसाइट शुरू

हिन्दी की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ की आधिकारिक वेबसाइट सोमवार से शुरू हो गई है। वेबसाइट पर आलोचना के पुराने अंकों के लेखों के साथ नई पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध होगी। आलोचना पिछले सात दशक से भी अधिक समय से हिन्दी पाठकों की सबसे प्रिय पत्रिकाओं में शुमार रही है। वेबसाइट से आलोचना के लेख और पाठ्य सामग्री तक पाठकों की पहुँच और भी आसान हो जाएगी।

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कई चाँद थे सरे आसमां - शम्सुर्रहमान फारुकी

गेस्ट पोस्ट: कई चाँद थे सरे-आसमां – शम्सुर्रहमान फारुकी | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। समय समय पर सोशल मीडिया पर साहित्यिक कृतियों पर अपने खास अंदाज में टिप्पणी करते रहते हैं। आज पढ़िए शम्सुर्रहमान फारुकी के प्रसिद्ध उपन्यास कई चाँद थे सरे-आसमां पर लिखी उनकी यह संक्षिप्त टिप्पणी। 

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छाया मत छूना मन - हिमांशु जोशी

छाया मत छूना मन – हिमांशु जोशी | हिंद पॉकेट बुक्स

‘छाया मत छूना मन’ लेखक हिमांशु जोशी का लिखा उपन्यास है। उपन्यास 1977 में प्रथम बार प्रकाशित हुआ था। उपन्यास के केंद्र में वसुधा नामक एक युवती है। पढ़ें पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:

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