लघु-कथा: कलावती की शिक्षा - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद

श्यामसुंदर और कलावती के बीच सोने को लेकर खटपट होना आम बात थी। श्यामसुंदर बैठकर उपन्यास पढ़ना चाहता था और कलावती सोना चाहती थी। जब सोना मुमकिन न हुआ तो कलावती एक चीनी की पुतली लेकर उसे शिक्षा देने लगी। आखिर ये शिक्षा क्या थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘कलावती की शिक्षा’।

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कहानी: बड़े भाई साहब - प्रेमचंद

कहानी: बड़े भाई साहब – प्रेमचंद

‘बड़े भाई साहब’ कथाकार प्रेमचंद की लिखी कहानी है। कहानी का कथावाचक एक किशोर है जो अपने बड़े भाई साहब और अपने विषय में पाठकों को बता रहा है। वह हॉस्टल में अपने बड़े भाई साहब के साथ रहता है। उनके बीच का रिश्ता कैसा है यह इस कहानी में झलकता है। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ -जयशंकर प्रसाद
लघु-कथा: सहयोग-जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: सहयोग – जयशंकर प्रसाद

मोहन को लगता था पत्नी को उसकी दासी होना चाहिए। उसने ये कर भी दिखाया था। पर अब वो खुश नहीं था। ऐसा क्यों? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘सहयोग’।

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लघु-कथा: उस पार का योगी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: उस पार का योगी – जयशंकर प्रसाद

नंदलाल उस नदी के किनारे बैठा अपनी सितारी बजाया करता था। उसे अँधरे से डर नहीं लगता था। ऐसे में जब उसने एक आवाज़ सुनी तो वह हैरान रह गया। आगे उसने क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘उस पार का योगी’

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लघु-कथा: प्रतिमा - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: प्रतिमा – जयशंकर प्रसाद

कुंजनाथ को कुंजबिहारी की उस मूर्ति पर विश्वास नहीं रहा था। आखिर इस अविश्वास का कारण क्या था? क्या कुंजनाथ का विश्वास लौट पाया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘प्रतिमा’

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कहानी: पाप की पराजय - जयशंकर प्रसाद

कहानी: पाप की पराजय – जयशंकर प्रसाद

शिकार करके घनश्याम जंगल में बैठा शिकार को भून ही रहा था कि उसकी नज़र उस भीलनी पर पड़ी। उसे देखते ही उसके मन में पाप उमड़ पड़ा। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह कहानी ‘पाप की पराजय’।

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लघु-कथा: देवी - प्रेमचंद

लघु-कथा: देवी – प्रेमचंद

कथावाचक को वह औरत रात को पार्क पर बैठी दिखी थी। फिर कुछ ऐसा हुआ कि उस कथावाचक का मन उस औरत के पीछे जाने का हो गया। ऐसा क्यों हुआ?
पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की लिखी यह लघु-कथा ‘देवी’।

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कहानी: बेटों वाली विधवा - प्रेमचंद

कहानी: बेटों वाली विधवा – प्रेमचंद

पंडित आयोध्यानाथ की मृत्यु हुई तो पीछे रह गयी उनकी विधवा फूलमती और उनकी संतानें। फूलमती जिसकी मर्ज़ी के बिना घर में कोई काम न होता था। पर पति की मृत्यु के बाद जैसे कुछ बदल गया था। आखिर क्या हुआ था फूलमती के साथ जो उसे ऐसा लगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘बेटों वाली विधवा’।

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कहानी: नमक का दारोगा - प्रेमचंद

कहानी: नमक का दारोगा – प्रेमचंद

वंशीधर को नमक का दारोगा नियुक्त किया गया तो उसके पिता को लगा कि उनके दिन फिर गये हैं। अब उनके जीवन खुशहाली से बीतेगा। उन्होंने वंशीधर को ये शिक्षा भी दी कि नौकरी करी कैसी जाती है। पर फिर भी वह निलम्बित हो गये। ऐसा क्यों हुआ? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की प्रसिद्ध कथा ‘नमक का दारोगा’।

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कहानी: ग्रामीणा - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: ग्रामीणा – सुभद्रा कुमारी चौहान

सोना पंडित रामधन तिवारी और नंदो की इकलौती बेटी थी। उनकी इच्छा थी कि वह उसका विवाह शहर में करें क्योंकि उधर का जीवन गाँव के मुकाबले सरल था। उधर आराम अधिक था। क्या उनकी यह इच्छा पूरी हुई? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कथा ‘ग्रामीणा’:

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कहानी: फंदा - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: फंदा – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

स्त्री अपने तीन बच्चों के साथ कमरे में बैठी थी। घर में खाने को रोटी न थी और कुछ समय पहले ही मकान मालिक ने उन्हें घर से निकालने की धमकी दी थी। इतने में वो फिर घर पर आ धमका था। यह ‘वो’ कौन था? वो यहाँ क्यों आया था? पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘फंदा’:

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