कहानी: भाई-बहन - राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:

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गुंजन-विकास नैनवाल | कहानी

कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’

सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।

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हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आलोचना’ की वेबसाइट शुरू

हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आलोचना’ की वेबसाइट शुरू

हिन्दी की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘आलोचना’ की आधिकारिक वेबसाइट सोमवार से शुरू हो गई है। वेबसाइट पर आलोचना के पुराने अंकों के लेखों के साथ नई पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध होगी। आलोचना पिछले सात दशक से भी अधिक समय से हिन्दी पाठकों की सबसे प्रिय पत्रिकाओं में शुमार रही है। वेबसाइट से आलोचना के लेख और पाठ्य सामग्री तक पाठकों की पहुँच और भी आसान हो जाएगी।

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कई चाँद थे सरे आसमां - शम्सुर्रहमान फारुकी

गेस्ट पोस्ट: कई चाँद थे सरे-आसमां – शम्सुर्रहमान फारुकी | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। समय समय पर सोशल मीडिया पर साहित्यिक कृतियों पर अपने खास अंदाज में टिप्पणी करते रहते हैं। आज पढ़िए शम्सुर्रहमान फारुकी के प्रसिद्ध उपन्यास कई चाँद थे सरे-आसमां पर लिखी उनकी यह संक्षिप्त टिप्पणी। 

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छाया मत छूना मन - हिमांशु जोशी

छाया मत छूना मन – हिमांशु जोशी | हिंद पॉकेट बुक्स

‘छाया मत छूना मन’ लेखक हिमांशु जोशी का लिखा उपन्यास है। उपन्यास 1977 में प्रथम बार प्रकाशित हुआ था। उपन्यास के केंद्र में वसुधा नामक एक युवती है। पढ़ें पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:

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किताब परिचय: अपराजिता: कुंती की गाथा

  किताब परिचय यह पुस्तक सिर्फ महाभारत की कथा का पुनर्पाठ भर नहीं है, अपितु महाभारत के एक प्रमुख महिला पात्र, पांडवों की माता ‘कुंती’ के साथ तात्कालिक समय की …

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कहानी: कायर - प्रेमचंद

कहानी: कायर – प्रेमचंद

केशव और प्रेमा सहपाठी थे। वह आपस में प्रेम करते थे। केशव का कहना था कि वह जात-पाँत पर विश्वास नहीं करता है और प्रेमा से विवाह करके ही रहेगा। वहीं प्रेमा को ऐसा होना असम्भव लगता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘कायर’:

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लघु-कथा: विराम चिन्ह - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद

राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।

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पाठशाला - चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'

लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …

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द्वंद - सुधा मूर्ति | प्रभात प्रकाशन | अनु: शोभा आर कावेरी

द्वंद्व – सुधा मूर्ति | प्रभात प्रकाशन | अनु: शोभा आर कावेरी

‘द्वंद्व’ सुधा मूर्ति के दो लघु-उपन्यासों का संकलन है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में संकलित इन लघु-उपन्यासों में केंद्रीय किरदार अपनी पहचान, अपनी जड़ों की तलाश करते दिखता है।

पढ़े पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:

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रानी नागफनी की कहानी – हरिशंकर परसाई | वाणी प्रकाशन

संस्करण विवरण फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 124 | प्रकाशक: वाणी प्रकाशन  पुस्तक लिंक: अमेज़न  कहानी  राजकुमार अस्तभान और राजकुमारी नागफनी गए तो आत्महत्या करने थे लेकिन एक दूसरे को दिल …

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आकाशिक - दीप्ति मित्तल

पुस्तक टिप्पणी: प्यार की सही परिभाषा बतलाने में सफल होती है दीप्ति मित्तल की उपन्यासिका ‘आकाशिक’

‘आकाशिक’ लेखिका दीप्ति मित्तल की उपन्यासिका है। किंडल पर प्रकाशित इस रचना को के डी पी 5: पेन टू पब्लिश प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार मिला था। उपन्यासिका प्रेम और उसके असल मायने को केंद्र में लेकर लिखी गई है। पढ़ें पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:

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