कहानी: बगुला भगत – डॉ. अंशु जोशी
‘बगुला भगत’ लेखिका डॉ. अंशु जोशी की लिखी कहानी है। कहानी उनके कथा संग्रह ‘अग्निपाखी’ में संगृहीत है। कई बार लोगों की कथनी और करनी में कितना फर्क होता है यह लेखिका अपनी इस कहानी से दर्शा रही हैं।
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साहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘बगुला भगत’ लेखिका डॉ. अंशु जोशी की लिखी कहानी है। कहानी उनके कथा संग्रह ‘अग्निपाखी’ में संगृहीत है। कई बार लोगों की कथनी और करनी में कितना फर्क होता है यह लेखिका अपनी इस कहानी से दर्शा रही हैं।
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17 जनवरी, 2025 (शुक्रवार) नई दिल्ली: आज से करीब सत्तर वर्ष पहले के काल में जाकर गौतम चौबे ने जिस तरह ‘चक्का जाम’ उपन्यास की रचना की है, वह किसी …
आज़ादी के बाद देश-समाज की कशमकश का बारीक चित्रण है ‘चक्का जाम’ उपन्यास Read More
‘नदी का इश्क ज़िंदा था’ लेखिका दिव्या शर्मा की कहानी है। यह कहानी उनके कथा संग्रह ‘कैलंडर पर लटकी तारीखें’ में संकलित है।
कहानी: नदी का इश्क जिंदा था – दिव्या शर्मा Read More
कथावाचक का अंतिम समय निकट है। ऐसे में वह और उसकी पत्नी उसके जीवन की एक झलक पाठकों के समक्ष रखना चाहते हैं। आप भी पढ़ें भुवनेश्वर की कहानी ‘जीवन की झलक’
कहानी: जीवन की झलक – भुवनेश्वर Read More
जोखू की तबीयत खराब थी और इसलिए घर का गंदा पानी उसे गंगा देना नहीं चाहती थी। वह प्यासा था और इसलिए गंगा ने फैसला किया कि ठाकुर के कुएँ से वह पानी लायेगी।
पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’।
देवनिवास और अमरनाथ साइकल पर निकले थे कि देवनिवास एक बूढ़े से टकरा गया। बूढ़े के साथ उसकी बेटी नीरा भी थी। फिर परिस्थिति कुछ ऐसी बन पड़ी कि देवनिवास और अमरनाथ बूढ़े की कुटिया पर पहुँच गए। आगे जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘नीरा’।
कहानी: नीरा – जयशंकर प्रसाद Read More
जीवन में साहित्य का स्थान प्रेमचंद का लिखा निबंध है। यह 1932 के हंस के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:
निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान – प्रेमचंद Read More
वनस्थली के रंगीन संसार में अरुण किरणों ने इठलाते हुए पदार्पण किया और वे चमक उठीं, देखा तो कोमल किसलय और कुसुमों की पंखुरियाँ, बसंत-पवन के पैरों के समान हिल रही थीं। पीले पराग का अंगराग लगने से किरणें पीली पड़ गयी। बसंत का प्रभात था।
कहानी: अपराधी – जयशंकर प्रसाद Read More
पंडित सीतानाथ चौबे मुरादाबाद के प्रसिद्ध वकील थे। समाज में उनकी इज्जत थी। पर फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें भूत दिखने लगा। पढ़िए कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘भूत’। यह कहानी मानसरोवर 4 में संकलित है।
कहानी: भूत – प्रेमचंद Read More
चंदा का विवाह रामू से तय हुआ था लेकिन चंदा हीरा को पसंद करती थी। हीरा भी चंदा को पसंद करता था। और रामू को यह बात पसंद नहीं थी। इस प्रेम त्रिकोण का क्या नतीजा निकला? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘चंदा’।
कहानी: चंदा – जयशंकर प्रसाद Read More
‘हाथी के दाँत’ विकास नैनवाल ‘अंजान’ की लिखी लघु-कथा है। अक्सर हमारी कथनी और करनी में फर्क होता है। कहानी इसी बात को रेखांकित करती है। यह प्रथम बार उत्तरांचल पत्रिका के अगस्त 2019 अंक में प्रकाशित हुई थी।
लघु-कथा: हाथी के दाँत – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’ दो किशोरों की कहानी है। सामंतवाद के खिलाफ रहने वाला कथावाचक अपने मित्र, जो कि जमींदार घराने से आता है, के गाँव समय बिताने जाता है। वहाँ जो कुछ होता है वही कहानी बनती है। यह मानसरोवर खंड 1 में संकलित है।
कहानी: नशा – प्रेमचंद Read More