आसक्ति-निशांत मौर्य | कहानी

कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य

निशांत मौर्य कानपुर के रहने वाले हैं। साहित्य से उन्हें गहरा लगाव है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनकी कहानी आसक्ति।

कहानी: आसक्ति – निशांत मौर्य Read More
लघु-कथा: प्रेमचंद -मगर का शिकार

लघु-कथा: मगर का शिकार – प्रेमचंद

‘मगर का शिकार’ प्रेमचंद की लिखी एक रचना है। कथावाचक को जब कुछ मछुआरे एक बकरी के बच्चे को नदी के पास लेकर आते मिले तो उनके मन में कोतूहल जागा। आखिर वो बकरी के बच्चे का क्या करना चाहते थे? जानने के लिए पढ़ें ये रचना:

लघु-कथा: मगर का शिकार – प्रेमचंद Read More
शिवपूजन सहाय की कहानी 'कहानी का प्लॉट'

कहानी: कहानी का प्लॉट – शिवपूजन सहाय

शिवपूजन सहाय उपन्यासकार, संपादक और गद्यकार थे। उन्होंने हिंदी और भोजपुरी भाषा में लेखन किया। पढ़ें उनकी कहानी ‘कहानी का प्लॉट’।

कहानी: कहानी का प्लॉट – शिवपूजन सहाय Read More
इंद्रजाल - जयशंकर प्रसाद | कहानी

कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।

कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद Read More
आखिरी हीला - प्रेमचंद | कहानी

कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद

‘आखिरी हीला’ प्रेमचंद की लिखी हास्यकथा है। कथावाचक को जब पता लगता है कि उसकी पत्नी गाँव से शहर उसके पास आकर रहना चाहती है तो वह उसका शहर आना टालने के लिए क्या क्या बहाने गढ़ता है। आप भी पढ़िए।

कहानी: आखिरी हीला – प्रेमचंद Read More
कहानी: भाई-बहन - राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:

कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला) Read More
गुंजन-विकास नैनवाल | कहानी

कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’

सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।

कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’ Read More
लघु-कथा: अनबोला - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद

जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:

लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read More
कहानी: कायर - प्रेमचंद

कहानी: कायर – प्रेमचंद

केशव और प्रेमा सहपाठी थे। वह आपस में प्रेम करते थे। केशव का कहना था कि वह जात-पाँत पर विश्वास नहीं करता है और प्रेमा से विवाह करके ही रहेगा। वहीं प्रेमा को ऐसा होना असम्भव लगता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘कायर’:

कहानी: कायर – प्रेमचंद Read More
लघु-कथा: विराम चिन्ह - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद

राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद Read More
पाठशाला - चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'

लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …

लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read More
कहानी: पूस की रात - प्रेमचंद

कहानी: पूस की रात – प्रेमचंद

हल्कू ने वह रुपये कम्बल के लिए बचाए थे। वो कम्बल जिसे उसे रात को खेतों की निगरानी करते हुये ओढ़ना था। पर फिर वो पैसे उसे दे देने पड़े। अब चिंता थी तो यह कि वह खेत में पूस की रात को बिना कम्बल के कैसे बिताएगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’:

कहानी: पूस की रात – प्रेमचंद Read More