लघु-कथा: गूदड़ साईं - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: गूदड़ साईं – जयशंकर प्रसाद

मोहन ने बहुत दिनों बाद गूदड़ साईं को मोहल्ले में देखा तो उसे आवाज़ लगाई। वह जानना था कि गूदड़ साईं अब उसके घर खाने को क्यों नहीं आता था। गूदड़ साईं ने क्या जवाब दिया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘गूदड़ साईं’

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लघु-कथा: प्रसाद - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: प्रसाद – जयशंकर प्रसाद

‘प्रसाद’ जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। यह उनके संग्रह प्रतिध्वनि में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: ग्रामीणा - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: ग्रामीणा – सुभद्रा कुमारी चौहान

सोना पंडित रामधन तिवारी और नंदो की इकलौती बेटी थी। उनकी इच्छा थी कि वह उसका विवाह शहर में करें क्योंकि उधर का जीवन गाँव के मुकाबले सरल था। उधर आराम अधिक था। क्या उनकी यह इच्छा पूरी हुई? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कथा ‘ग्रामीणा’:

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कहानी: सुनहला साँप - जयशंकर प्रसाद

कहानी: सुनहला साँप – जयशंकर प्रसाद

चंद्रदेव अपने दोस्त देवकुमार के साथ मसूरी घूमने आया था। चंद्रदेव का मानना था कि वह मनुष्य को समझ सकता है वहीं उसके दोस्त का मानना था कि किसी दूसरे मनुष्य की बात तो दूर व्यक्ति अपने आप को भी समझ नहीं पाता है। आखिर कौन सही साबित हुआ। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘सुनहला साँप’।

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कहानी: फंदा - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: फंदा – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

स्त्री अपने तीन बच्चों के साथ कमरे में बैठी थी। घर में खाने को रोटी न थी और कुछ समय पहले ही मकान मालिक ने उन्हें घर से निकालने की धमकी दी थी। इतने में वो फिर घर पर आ धमका था। यह ‘वो’ कौन था? वो यहाँ क्यों आया था? पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘फंदा’:

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कहानी: प्रेमपूर्ण तरंग - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

कहानी: प्रेमपूर्ण तरंग – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

बाबू प्रेमपूर्ण कथावाचक के मित्र हैं। रोमांस का उन्हें शौक है। जब एक युवती ‘तरंग’ का उनको पत्र आता है तो क्या होता है यही इस कहानी में देखने को मिलता है। आप भी पढ़ें सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कहानी प्रेमपूर्ण तरंग।

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कहानी: थाती - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: थाती – सुभद्रा कुमारी चौहान

कथावाचिका बहुत परेशान है। वह रो रही है। पर आखिर वो रो क्यों रही है? उसे क्या दु:ख है? अपने हृदय का हाल ही वह इस कहानी के माध्यम से बता रही है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: न्याय -सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

कहानी: न्याय – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

किस तरह न्यायवयस्था में सच के बजाए ताकतवर को तरजीह दी जाती है और कैसे न्याय के रक्षक अपनी सहूलियत के लिए न्याय के साथ खिलवाड़ करते हैं यह सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कहानी ‘न्याय’ को पढ़कर जाना जा सकता है।

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कहानी: अनुरोध - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: अनुरोध – सुभद्रा कुमारी चौहान

वीणा नहीं चाहती थी कि निरंजन इतनी जल्दी जाए। पर निरंजन को जाना था। वो अपना जाना अब और अधिक नहीं टाल सकता था।
वीणा क्यों नहीं चाहती थी निरंजन जाए? निरंजन क्यों जाना चाहता था? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘अनुरोध’:

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कहानी: मछुए की बेटी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: मछुए की बेटी – सुभद्रा कुमारी चौहान

तिन्नी को उसके मछुआरे माता-पिता ने बड़े लाड़ से पाला था। यही कारण था कि वह बड़ी निडर हो गयी थी और अपनी मर्ज़ी का काम किया करती थी। उन दिनों राजा साहब के बेटे कृष्णदेव की नज़र तिन्नी पर पड़ी तो वह उसे देखते ही रह गये। आगे क्या हुआ ये जानने के लिए पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कहानी ‘मछुए की बेटी’।

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कहानी: आहुति - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: आहुति – सुभद्रा कुमारी चौहान

‘आहुति’ लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी है। यह कहानी उनके ‘बिखरे मोती’ नामक संग्रह में प्रकाशित हुई थी। राधेश्याम ने अपनी पत्नी मनोरमा की मृत्यु के बाद यह फैसला किया था कि वो दूसरा विवाह नहीं करेंगे। पर फिर उन्होंने कुंतला को देखा। आगे क्या हुआ? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘आहुति’।

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कहानी: किस्मत - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: किस्मत – सुभद्रा कुमारी चौहान

‘किस्मत’ लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कथा है। यह कहानी उनके कहानी संग्रह ‘बिखरे मोती’ में प्रकाशित हुई थी। कहानी के केंद्र में किशोरी नामक युवती है जिसके पति का देहांत हो गया है। ससुराल में उसका जीवन पति की मृत्यु के बाद किस तरह का हो जाता है यह प्रस्तुत कहानी दर्शाती है। आप भी पढ़ें:

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