कहानी: भाई-बहन - राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

कहानी: भाई-बहन – राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)

‘भाई बहन’ राजेन्द्र बाला घोष की लिखी कहानी है जो कि बाल प्रभाकर पत्रिका में 1908 में प्रकाशित हुई थी। कहानी में स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के महत्व के विषय में बताया गया है। पढ़ें यह कहानी:

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गुंजन-विकास नैनवाल | कहानी

कहानी: गुंजन – विकास नैनवाल ‘अंजान’

सब कुछ कितना खूबसूरत था यहाँ। उनके घर के आगे का बरामदा था जहाँ बेंत की कुर्सी और मोढ़े को लगाकर बैठते हुए शाम गुजारना उसे पसंद था। यह जगह उसकी सबसे प्रिय जगहों में से थी। वो इधर बैठकर घंटों कल्पना के सागर में गोते लगा सकती थी या सामने दिखते दृश्यों को निहार सकती थी।

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लघु-कथा: अनबोला - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद

जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:

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कहानी: कायर - प्रेमचंद

कहानी: कायर – प्रेमचंद

केशव और प्रेमा सहपाठी थे। वह आपस में प्रेम करते थे। केशव का कहना था कि वह जात-पाँत पर विश्वास नहीं करता और प्रेमा से विवाह करके ही रहेगा। वहीं प्रेमा को ऐसा होना असम्भव लगता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह कहानी ‘कायर’:

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लघु-कथा: विराम चिन्ह - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद

राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।

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पाठशाला - चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'

लघु-कथा: पाठशाला – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

पाठशाला का वार्षिकोत्सव था। मैं भी वहाँ बुलाया गया था। वहाँ के प्रधान अध्यापक का एकमात्र पुत्र, जिसकी अवस्था आठ वर्ष की थी, बड़े लाड़ से नुमाइश में मिस्टर हादी …

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कहानी: पूस की रात - प्रेमचंद

कहानी: पूस की रात – प्रेमचंद

हल्कू ने वह रुपये कम्बल के लिए बचाए थे। वो कम्बल जिसे उसे रात को खेतों की निगरानी करते हुये ओढ़ना था। पर फिर वो पैसे उसे दे देने पड़े। अब चिंता थी तो यह कि वह खेत में पूस की रात को बिना कम्बल के कैसे बिताएगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’:

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आँखों देखी घटना - गोपाल राम गहमरी

कहानी: आँखों देखी घटना – गोपाल राम गहमरी

1 बात सन् 1893की है, जब मैं बंबई से लौटकर मंडला में पहले-पहल पहुँचा था। वहाँ मेरे उपकारी मित्र पंडित बालमुकुंद पुरोहित तहसीलदार थे। उन्हीं की कृपा से मैं मंडला …

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उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी: उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ चंद्र शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी है। ‘उसने कहा था’ को हिंदी की शुरुआती कहानियों में से एक माना जाता है।

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कहानी: बूढ़ी काकी - प्रेमचंद

कहानी: बूढ़ी काकी – प्रेमचंद

बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही।
…पढ़ें लेखक प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘बूढ़ी काकी’:

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कहानी: ग्यारह वर्ष का समय - रामचंद्र शुक्ल

कहानी: ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल

दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्पन्न हुई: मैं अपने स्थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा तो वे ध्यान-मग्न …

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संदेह - जयशंकर प्रसाद

कहानी: संदेह – जयशंकर प्रसाद

रामनिहाल अपना बिखरा हुआ सामान बाँधने में लगा था। जँगले से धूप आकर उसके छोटे-से शीशे पर तड़प रही थी। अपना उज्ज्वल आलोक-खंड, वह छोटा-सा दर्पण बुद्ध की सुंदर प्रतिमा …

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