लघु-कथा: प्रतिमा – जयशंकर प्रसाद
कुंजनाथ को कुंजबिहारी की उस मूर्ति पर विश्वास नहीं रहा था। आखिर इस अविश्वास का कारण क्या था? क्या कुंजनाथ का विश्वास लौट पाया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘प्रतिमा’
लघु-कथा: प्रतिमा – जयशंकर प्रसाद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
कुंजनाथ को कुंजबिहारी की उस मूर्ति पर विश्वास नहीं रहा था। आखिर इस अविश्वास का कारण क्या था? क्या कुंजनाथ का विश्वास लौट पाया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘प्रतिमा’
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शिकार करके घनश्याम जंगल में बैठा शिकार को भून ही रहा था कि उसकी नज़र उस भीलनी पर पड़ी। उसे देखते ही उसके मन में पाप उमड़ पड़ा। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह कहानी ‘पाप की पराजय’।
कहानी: पाप की पराजय – जयशंकर प्रसाद Read More
कथावाचक को वह औरत रात को पार्क पर बैठी दिखी थी। फिर कुछ ऐसा हुआ कि उस कथावाचक का मन उस औरत के पीछे जाने का हो गया। ऐसा क्यों हुआ?
पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की लिखी यह लघु-कथा ‘देवी’।
पंडित आयोध्यानाथ की मृत्यु हुई तो पीछे रह गयी उनकी विधवा फूलमती और उनकी संतानें। फूलमती जिसकी मर्ज़ी के बिना घर में कोई काम न होता था। पर पति की मृत्यु के बाद जैसे कुछ बदल गया था। आखिर क्या हुआ था फूलमती के साथ जो उसे ऐसा लगा। पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘बेटों वाली विधवा’।
कहानी: बेटों वाली विधवा – प्रेमचंद Read More
कोई उसे अघोरी कहता और कोई योगी। कोई नहीं जानता था कि वो कहाँ से आया था। किशोर अपने परिवार को लेकर घूमने निकला था। ऐसे में वह अघोरी उनके सामने आ गया। आखिर कौन था ये अघोरी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘अघोरी का मोह’।
कहानी: अघोरी का मोह – जयशंकर प्रसाद Read More
संस्करण विवरण फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 64 | प्रकाशक: मनोज कॉमिक्स | शृंखला: हवलदार बहादुर टीम कहानी: विनय प्रभाकर | चित्रांकन: जितेंद्र बेदी कहानी रूपनगर आजकल दहशत के साए …
हवलदार बहादुर और नौ अजूबे | मनोज कॉमिक्स | विनय प्रभाकर Read More
वंशीधर को नमक का दारोगा नियुक्त किया गया तो उसके पिता को लगा कि उनके दिन फिर गये हैं। अब उनके जीवन खुशहाली से बीतेगा। उन्होंने वंशीधर को ये शिक्षा भी दी कि नौकरी करी कैसी जाती है। पर फिर भी वह निलम्बित हो गये। ऐसा क्यों हुआ? पढ़ें कथाकार प्रेमचंद की प्रसिद्ध कथा ‘नमक का दारोगा’।
कहानी: नमक का दारोगा – प्रेमचंद Read More
बुढ़िया चाहती थी कि वो नौकरी करे। किसी की दी हुई भीख लेना उसके आत्मसम्मान को गवारा नहीं था। ऐसे में बाबू रामनाथ ने उसे अपनी दुकान पर रख लिया। यह बुढ़िया कौन थी? आगे उसका जीवन में क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘गुदड़ी में लाल’
लघु-कथा: गुदड़ी में लाल – जयशंकर प्रसाद Read More
मोहन ने बहुत दिनों बाद गूदड़ साईं को मोहल्ले में देखा तो उसे आवाज़ लगाई। वह जानना था कि गूदड़ साईं अब उसके घर खाने को क्यों नहीं आता था। गूदड़ साईं ने क्या जवाब दिया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘गूदड़ साईं’
लघु-कथा: गूदड़ साईं – जयशंकर प्रसाद Read More
‘प्रसाद’ जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। यह उनके संग्रह प्रतिध्वनि में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
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सोना पंडित रामधन तिवारी और नंदो की इकलौती बेटी थी। उनकी इच्छा थी कि वह उसका विवाह शहर में करें क्योंकि उधर का जीवन गाँव के मुकाबले सरल था। उधर आराम अधिक था। क्या उनकी यह इच्छा पूरी हुई? पढ़ें लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कथा ‘ग्रामीणा’:
कहानी: ग्रामीणा – सुभद्रा कुमारी चौहान Read More
संस्करण विवरण: फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 32 | प्रकाशक: राज कॉमिक्स | शृंखला: बाँकेलाल टीम लेखक: पपिंदर जुनेजा | चित्रांकन: बेदी कहानी बाँकेलाल के कारनामों की खबर विशालगढ़ के राजा विक्रम सिंह तक भी पहुँच गई थी। …
कर बुरा हो भला | राज कॉमिक्स | पपिंदर जुनेजा Read More