निबंध: सरस्वती का प्रकाशन - राहुल सांकृत्यायन

निबंध: सरस्वती का प्रकाशन – राहुल सांकृत्यायन

‘सरस्वती’ महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पादन में प्रकाशित होने वाली पत्रिका थी। यह हिंदी की पहली मासिक पत्रिका थी। हिंदी के प्रचार प्रसार में इस पत्रिका और महावीर प्रसाद द्विवेदी का क्या योगदान था और कैसे इस पत्रिका ने राहुल सांकृत्यायन को प्रभावित किया यह वह इस निबंध में बताते हैं। आप भी पढ़िए:

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स्वर्ग में विचार-सभा का अधिवेशन - भारतेंदु हरिश्चंद्र

स्वर्ग में विचार-सभा का अधिवेशन – भारतेंदु हरिश्चंद्र

स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती और बाबू केशवचंद्रसेन के स्‍वर्ग में जाने से वहाँ एक बहुत बड़ा आंदोलन हो गया। स्‍वर्गवासी लोगों में बहुतेरे तो इनसे घृणा करके धिक्‍कार करने लगे और बहुतेरे इनको अच्‍छा कहने लगे। स्‍वर्ग में भी ‘कंसरवेटिव’ और ‘लिबरल’ दो दल हैं।

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पुराना ज़माना - नया ज़माना - प्रेमचंद

पुराना ज़माना – नया ज़माना – प्रेमचंद

नये ज़माने और पुराने ज़माने में क्या फर्क था? नये ज़माने में क्या अच्छी बातें हैं और कौन सी बुरी और पुराने ज़माने के हिसाब से वह कहाँ ठहरता है। और नये ज़माने के शासकों को किन बातों का खयाल रखना चाहिए? यह सब प्रेमचंद अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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जीवन सार - प्रेमचंद

जीवन सार – प्रेमचंद

‘जीवन सार’ प्रेमचंद का लिखा आत्मकथात्मक लेख है जिसमें वह अपने जीवन की मुख्य घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं। ‘हंस’ पत्रिका के वर्ष 1932 के जनवरी-फरवरी अंक में यह लेख प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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निबंध: उपन्यास के विषय - प्रेमचंद

निबंध: उपन्यास के विषय – प्रेमचंद

उपन्यास साहित्य की सबसे प्रसिद्ध विधाओं में से एक है। उपन्यास, उसकी विषय वस्तु, और उसमें गढ़े गए चरित्र, कैसे होने चाहिए? किस तरह के उपन्यास अच्छे कहे जाएँगे और वह कौन सी चीजें हैं जो उपन्यास को कमजोर बना सकती हैं? इन्हीं सब बातों के ऊपर लेखक प्रेमचंद ने लिखा है। यह लेख 1930 के मार्च माह में प्रकाशित ‘हंस’ पत्रिका के अंक में सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात - 1 - योगेश मित्तल

संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात – 2 – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल अपने लिखे सजीव संस्मरणों के लिए जाने जाते हैं। अपने इस संस्मरण अधूरी मुलाकात में वह एक क्रिकेट खिलाड़ी से हुई अपनी अधूरी मुलाकात का किस्सा बता रहे हैं। पढ़ें संस्मरण का अंतिम भाग:

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संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात - 1 - योगेश मित्तल

संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात – 1 – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल अपने लिखे सजीव संस्मरणों के लिए जाने जाते हैं। अपने इस संस्मरण अधूरी मुलाकात में वह एक क्रिकेट खिलाड़ी से हुई अपनी अधूरी मुलाकात का किस्सा बता रहे हैं। पढ़ें संस्मरण का प्रथम भाग:

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लंदननामा: अंग्रेज़ी ज़ुबान में हिंदुस्तानी लफ्ज़ – हॉब्सन-जॉब्सन

लंदननामा: अंग्रेज़ी ज़ुबान में हिंदुस्तानी लफ्ज़ – हॉब्सन-जॉब्सन

अंग्रेजी भाषा ने कई हिंदुस्तानी शब्दों को आत्मसात किया है। ये शब्द अब अंग्रेजी में भी धड़ल्ले से प्रयोग किये जाते हैं। हालाँकि इनके उच्चारण में हुए बदलावों के कारण कई बार इनका रूप भी बदल भी जाता है। इन्हीं शब्दों से जुड़ी रोचक जानकारी संदीप नैयर इस लेख में दे रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्व - प्रवीण कुमार झा

कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्व – प्रवीण कुमार झा

गल्प लेखन में प्रथम पंक्ति का अपना अलग महत्व होता है। अलग -अलग लेखक किस तरह से पहली पंक्ति का प्रयोग करके उससे विभिन्न भाव जागृत करते हैं यह प्रवीण कुमार झा अपने इस लेख में बता रहे हैं। लेखन से जुड़े और लेखन की इच्छा रखने वालों को इस लेख से काफी कुछ सीखने को मिलेगी।

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संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र - गोपाल राम गहमरी

संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र – गोपाल राम गहमरी

1884 में गोपाल राम गहमरी को भारतेंदु हरिश्चंद्र की मंडली द्वारा मंचित नाटकों देखने का अवसर प्राप्त हुआ था। स्वयं भारतेंदु ने भी सत्य हरिश्चंद्र में हरिश्चंद्र की भूमिका निभायी थी। यह अवसर गोपाल राम गहमरी को कैसे मिला और इन नाटकों को देखने का उनका अनुभव कैसा था, यह वह भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए इस संस्मरण में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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यात्रा वृत्तांत: जर्मनी की सैर - राहुल सांकृत्यायन

यात्रा वृत्तांत: जर्मनी की सैर – राहुल सांकृत्यायन

पेरिस की यात्रा के बाद राहुल सांकृत्यायान जर्मनी गए थे। ‘जर्मनी की सैर’ में वह अपने जर्मनी में बिताए दिनों और वहाँ हुए अनुभवों के विषय में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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यात्रा वृत्तांत: पेरिस में

यात्रा वृत्तांत: पेरिस में – राहुल सांकृत्यायन

वर्ष 1932 में राहुल सांकृत्यायन ने 14 से 26 नवम्बर के बीच के 14 दिन पैरिस में बिताए थे। ‘पेरिस में’ में उनके इन्हीं दिनों का वृत्तांत है। आप भी पढ़ें:

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