लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की पुस्तक का हुआ लोकार्पण

लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक की पुस्तक का हुआ लोकार्पण

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: हिंदी के लोकप्रिय अपराध एवं रहस्य-रोमांच साहित्य के दिग्गज लेखक श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक की नयी पुस्तक ‘डबल’ ट्रबल का विमोचन गाँधी शांति प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली में आज सम्पन्न हुआ। ‘डबल’ ट्रबल में लेखक के दो लघु-उपन्यासों को संकलित किया गया है। पुस्तक का प्रकाशन एम्बर ग्लो द्वारा किया गया है।

विमोचन के अवसर पर पाठक साहब के साथ मंच पर लेखक पराग डिमरी, लेखक विशी सिन्हा और यूट्यूबर एवं समीक्षक अभिषेक तनेजा मौजूद रहे। कार्यक्रम में पाठक साहब के पुत्र सुनील पाठक और पुत्री रीमा पाठक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सुजाता देवराड़ी द्वारा किया गया।

ज्ञात हो 1959 में प्रकाशित कहानी ‘सत्तावन साल पुराना आदमी’ से अपनी लेखन-यात्रा शुरू करने वाले श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक की अब तक 300 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘डबल’ ट्रबल उनकी 323वीं पुस्तक है। छह दशक से अधिक की इस यात्रा में विमल, सुधीर, सुनील, जीत सिंह जैसे उनके अनेक रचे किरदार पाठकों के लिए अपने परिचित लोगों जैसे बन गए हैं। यही कारण है उनके प्रशंसक उनकी पुस्तकों का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक ने लोकार्पण वक्तव्य में कहा कि “यह पहली बार है कि उनके दो लघु-उपन्यासों का संकलन पाठकों के समक्ष आया है। हालाँकि पृष्ठ संख्या के तौर पर देखा जाए तो हिंदी में विशेषकर गम्भीर लेखन में उपन्यासों का कलवेर अधिकतर इस संकलन में मौजूद प्रत्येक रचना के बराबर ही होता है पर उनके खुद के उपन्यासों से तुलना की जाए तो यह कलेवर कम ही कहलाएगा। उन्होंने पुस्तकों को पाठकों को समर्पित करते हुए कहा कि अब यह पुस्तक उनके पाठकों के हवाले हैं और उन्हें ही इसे पास या फेल घोषित करना है।”

सुरेन्द्र मोहन पाठक
लोकार्पण के पश्चात अपनी बात रखते श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक

अभिषेक तनेजा ने अपने वक्तव्य में कहा, “मैं बचपन से उनके उपन्यासों को पढ़ रहा हूँ। उनके साहित्य और उनके रचे किरदारों का हम पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि मैं अपने दस साल के बेटे को प्रेरित करते हुए कहता हूँ कि ऐसे कम ही लेखक होंगे जिनकी स्टडी में उनकी अपनी लिखी 300 से ज़्यादा किताबें होंगी।”

पुस्तक विमोचन के अवसर पर लेखक पराग डिमरी ने अपने वक्तव्य में कहा, “मैं अक्सर पाठक जी के उपन्यासों के डायलॉग अपने घर में और अपने कार्यालय में इस्तेमाल करता हूँ, बिना उन्हें रॉयल्टी दिए। उनका लिखा हमारे जीवन में यूँ रच बस गया है कि उनकी लिखी बातें हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन गयी हैं।”

पुस्तक लोकार्पण के पश्चात एक विशी सिन्हा द्वारा लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के साथ एक बातचीत का सेशन हुआ। इस सेशन में विशी सिन्हा के प्रश्नों का उत्तर देते हुए पाठक साहब ने बताया कि उन्हें इस्मत चुग़ताई, वाजिदा तबस्सुम और कृश्न चंदर जैसे लेखकों ने काफ़ी प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “बातों को सजाकर कहने की जैसी कला उन लेखकों के पास थी, वो किसी के पास नहीं।”

कार्यक्रम में लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रशंसकों की मौजूदगी रही। यह प्रशंसक दिल्ली एनसीआर के साथ साथ देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे थे।

भीलवाड़ा से आए श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रशंसक श्री गोपाल चंद्र पारीक ने उन्हें पगड़ी पहनाकर सम्मान-पत्र और शॉल भेंट किया। उन्होंने बताया कि वो पिछले साठ सालों से श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक को पढ़ रहे हैं और भीलवाड़ा से केवल उनको मिलने ही कार्यक्रम में पधारे हैं।

इसके बाद ऑटोग्राफ सत्र हुआ, जिसमें पाठकों ने अपनी पुस्तकों पर पाठक साहब के हस्ताक्षर लिए।

(तस्वीर स्रोत: लोकार्पण में शामिल प्रशंसक राकेश वर्मा की फेसबुक वाल पर साझा की गई तस्वीरें)


FTC Disclosure: इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक्स मौजूद हैं। अगर आप इन लिंक्स के माध्यम से खरीददारी करते हैं तो एक बुक जर्नल को उसके एवज में छोटा सा कमीशन मिलता है। आपको इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ये पैसा साइट के रखरखाव में काम आता है। This post may contain affiliate links. If you buy from these links Ek Book Journal receives a small percentage of your purchase as a commission. You are not charged extra for your purchase. This money is used in maintainence of the website.

Author

  • 'एक बुक जर्नल' साहित्य को समर्पित एक वेब पत्रिका है जिसका मकसद साहित्य की सभी विधाओं की रचनाओं का बिना किसी भेद भाव के प्रोत्साहन करना है।
    सन् 2012 से हम यह कार्य निरंतर रूप से कर रहे हैं। यह प्रोत्साहन रचनाओं के ऊपर पाठकीय टिप्पणी प्रकाशित करके, नयी साहित्यिक कृतियों की जानकारी साझा करके, साहित्य से जुड़ी खबरे साझा करके और लेखकों द्वारा भेजी गयी उनकी रचनाओं को प्रकाशित करके किया जाता है। हमारी कोशिश है एक वृहद पाठक वर्ग तक इन जानकारियों को पहुँचाया जाए।
    आप भी साहित्य और लेखन से सम्बंधित लेख, अपनी पुस्तक का अंश और अपनी रचनाएँ हमें भेज कर इस मुहिम में सहयोग दे सकते हैं।
    हमारा पता है: contactekbookjournal@gmail.com

    View all posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *