ये हैं हिंदी में महिलाओं द्वारा लिखा क्राइम फिक्शन; आपने इनमें से कितनी पुस्तकों को पढ़ा है

ये हैं हिंदी में महिलाओं द्वारा लिखा क्राइम फिक्शन; आपने इनमें से कितनी पुस्तकों को पढ़ा है

वैसे तो आजकल महिलाएँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं पर एक क्षेत्र ऐसा है जहाँ उनकी उपस्थिति कम दिखती आयी है। वह है हिंदी अपराध साहित्य लेखन। जहाँ गंभीर और साहित्य की विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं द्वारा प्रचुर मात्रा में लेखन किया गया है वहीं हिंदी अपराध गल्प लेखन में पहले से ही इस क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों की तुलना में कम रही है। इससे उलट अगर देखें तो पाएँगे कि अंग्रेजी में अपराध कथा लेखिकाओं का अनुपात हिंदी के मुकाबले अधिक रहा है। न केवल उनकी संख्या अधिक रही है बल्कि उन्होंने अपने सशक्त लेखन से अपना एक बड़ा पाठक वर्ग तैयार किया है।

पर अच्छी बात ये है कि अब ऐसी लेखिकाओं की संख्या बढ़ रही है जो कि हिंदी में अपराध कथा लेखन में हाथ आजमा रही हैं। यह एक अच्छा बदलाव है क्योंकि इससे नवीन दृष्टिकोण अपराध कथाओं में देखने को मिलता है। यह नवीनता विषयवस्तु के चुनाव, चरित्र चित्रण, घटना को देखने के नजरिए और घटना में क्या महत्वपूर्ण है यह निर्धारित करने के नजरिए में अक्सर देखी जा सकती है। ऐसे में एक तरह की विविधता पुस्तकों में आती है जो कि पाठक वर्ग को वृहद करने में मदद करती है।

आज इस लेख में हम आपको अपराध गल्प की श्रेणी में आने वाली ऐसी ही पुस्तकों के विषय में बताएँगे जिन्हें महिलाओं ने लिखा है। तो चलिए देखते हैं हिंदी में हाल के वर्षों में आयी महिलाओं द्वारा लिखी अपराध गल्प पुस्तकें कौन सी हैं:

रूम नंबर 1504

रूम नम्बर 1504 - सुछंदा डे | एम्बर ग्लो

‘रूम नम्बर 1504’ लेखिका सुछंदा डे का लिखा दूसरा उपन्यास है। इससे पूर्व उन्होंने एक रोमांटिक उपन्यास लिखा था। अब इस बार वो पाठकों के लिए एक रहस्यकथा लेकर आयी हैं।

पुस्तक के विषय में:

दिल्ली के एक आलीशान होटल में एक अजीबोगरीब हत्या… और उसके सबूत इशारा करते हैं रूम नम्बर 1504 की ओर। मामले की जाँच की जिम्मेदारी है आईपीएस अधिकारी सिद्धांत ठाकुर पर, एक बेहद कड़क, कर्तव्यनिष्ठ और सिद्धांतों पर अडिग पुलिस अधिकारी। लेकिन हत्या के सुरागों के साथ-साथ उसके सामने यह कौन है , जो अनजाने ही उसके अतीत के बंद दरवाज़ों को फिर से खोल रहा है।

जैसे-जैसे हत्या की गुत्थियाँ सुलझती जाती हैं, वैसे-वैसे सिद्धांत के अपने जीवन की उलझी हुई गाँठें भी खुलने लगती हैं। अतीत और वर्तमान की परतें एक-एक कर हटती हैं, और हर नया सच उसे एक ऐसी हकीकत के सामने खड़ा कर देता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

क्या यह रहस्य और रोमांच की चादर में लिपटी एक प्रेम कहानी है… या प्रेम की चाशनी में छिपी एक कत्ल की साज़िश?

प्रकाशक: एम्बर ग्लो | प्रकाशन वर्ष: सितंबर 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न

विला नंबर 1824

विला नम्बर 1824 - डॉ रुनझुन सक्सेना शुभानन्द

विला नंबर 1824 लेखिका रुनझुन सक्सेना का लिखा उपन्यास है। यह एक सस्पेंस थ्रिलर है जिसमें हॉरर के तत्व भी मौजूद हैं। इससे पूर्व लेखिका ‘चालीसा का रहस्य’ और लेखक शुभानन्द के साथ मिलकर क्राइम एम डी शृंखला के दो अपराध उपन्यास ‘द एसिड मैन’ और ‘ड्रॉप डेड’ लिख चुकी हैं।

पुस्तक के विषय में

सात करोड़ का सपना… या सात पुश्तों का श्राप? जब रेणुका और अमोल को लोनावला में विला नंबर 1824 मिलला है, तो उन्हें लगता है जैसे किस्मत ने उनकी झोली भर दी। सात करोड़ की संपत्ति… सिर्फ़ एक करोड़ में जो हाथ आ लगी थी। मगर ये खुशी ज्यादा देर न टिक सकी। पहली रात से ही शुरू हो गया एक अनोखा सिलसिला—अजीब आवाज़ें, खून के धब्बे, और एक बच्चे की रुलाई जो कभी थमती नहीं।

बगीचे में दफ़न मिलती हैं सौ साल पुरानी हड्डियाँ। बेसमेंट में छुपा है एक रहस्यमयी कमरा। और हर रात, दीवारों से कोई फुसफुसाता है—

“यह घर तुम्हारा नहीं… यह घर मेरा है।”

एक अनोखा षड्यंत्र। एक अधूरा बदला। और एक ऐसा ख़ज़ाना जिसकी क़ीमत… जान से भी ज़्यादा है। क्या रेणुका अपने परिवार को बचा पाएगी? या फिर 1824 का इतिहास… एक बार फिर दोहराएगा खुद को?

‘चालीसा का रहस्य’ की लेखिका की कलम से निकली एक हैरतअंगेज मिस्ट्री।

प्रकाशक: सूरज पॉकेट बुक्स | प्रकाशन: अप्रैल 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न

शुगर डैडी

शुगर डैडी - जयंती रंगनाथन | हिन्द युग्म

शुगर डैडी लेखिका जयंती रंगनाथन का उपन्यास है। जयंती रंगनाथन अनेक विधाओं में लिखती रही हैं। अपराध गल्प श्रेणी में उनका यह दूसरा प्रयास है। इससे पूर्व उनका उपन्यास शैडो प्रकाशित हुआ था जो कि एक रहस्यकथा था।

पुस्तक के विषय में:

हर क़त्ल के पीछे एक मंशा होती है, पैसा, नाकामयाब इश्क़, बदला, शोहरत या सत्ता का लालच। यूँ ही कोई उठ कर किसी का क़त्ल नहीं कर देता। क़त्ल एक कॉम्पलेक्स्ड खेल है।

दिल्ली के अधेड़ करोड़पति बिजनेसमैन श्याम का क़त्ल हो गया है। एक हिल स्टेशन के रेजॉर्ट में, जहाँ वह कल अपने से तीस साल छोटी लड़की मायरा के साथ आया था। मायरा सोचती है कि श्याम उसका शुगर डैडी है, उसे चाहता है, उससे शादी करना चाहता है। पर उस भटकी हुई और टूटे परिवार से निकली लड़की को यह नहीं पता कि उसी रेजॉर्ट में उसकी फ़िरंगी पहली दिवंगत पत्नी की बेटी, पैसे की लालची दूसरी पत्नी अपने बेटे के साथ और होने वाली रहस्ममयी तीसरी पत्नी भी मौजूद हैं। और सबके पास है श्याम का क़त्ल करने की तगड़ी वजहें।

कौन सुलझाएगा यह मिस्ट्री? आप? तो शामिल हो जाइए इस रोमांचक और पल-पल बदलते समीकरणों को सुलझाने की दौड़ में…

प्रकाशक: हिन्द युग्म | प्रकाशन: अगस्त 2025 | पुस्तक लिंक: अमेज़न

कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा

कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा - सुमन बाजपेयी | साहित्य विमर्श प्रकाशन

लेखिका सुमन बाजपेयी वैसे तो अपने लिखी प्रेम कहानियों और बाल साहित्य के लिए जानी जाती हैं पर ‘कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा’ के माध्यम से वह अपराध कथा लेखन के क्षेत्र में प्रवेश किया है। ‘कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा’ लेखिका सुमन बाजपेयी का उपन्यासिका संग्रह है। इसमें उनकी चार उपन्यासिकाएँ संकलित है। यह सभी रचनाएँ अपराध गल्प श्रेणी में आती हैं।

पुस्तक के विषय में:

बदला अगर ऐसे लिया जाए कि अंत तक व्यक्ति को इस बात का एहसास तक न हो और वह लगातार एक चक्रव्यूह में फँसता जाए… हत्या क्यों हुई, कैसे हुई, को सुलझाने में गुत्थी का और उलझना… दाँव पेंच, साजिश, कुछ कर गुजर जाने का जुनून, अबूझ पहेली और हर बदलते पृष्ठ के साथ बढ़ता रहस्य… उत्सुकता और हैरान करने वाला खुलासा… इन चार लंबी कहानियों में जहाँ आपको विभिन्न किरदारों से रूबरू होने का मौका मिलेगा, वहीं अनगिनत राज भी खुलेंगे। एक नई शैली में लिखीं रोमांचक कहानियाँ।

प्रकाशक: साहित्य विमर्श प्रकाशन | प्रकाशन: जनवरी 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | किंडल

चुप्पी

चुप्पी - साधना जैन | साहित्य विमर्श प्रकाशन

‘चुप्पी’ लेखिका साधना जैन का दूसरा उपन्यास है। यह एक रहस्यकथा है। इससे पूर्व भी साधना जैन का एक उपन्यास ‘जुहू चौपाटी’ आया था जो एक रहस्य कथा था।

पुस्तक के विषय में:

अधूरेपन में कसक होती है। अधूरेपन में वास्तविकता का प्रतिबिम्ब नज़र आता है। लेकिन ज़िंदगी की हर कमी के बारे में ये कथन सदा सत्य साबित नहीं होता।

हमारे जीवन की कुछ कमियाँ हमारे व्यक्तित्व को स्वतंत्र आकार लेने ही नहीं देतीं। हम कुंठाग्रस्त हो जाते हैं। हमारे मन में असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। तनाव और गहरे अवसाद की ओर हमारे क़दम बढ़ने लगते हैं। उस कमी को पूरा करने के लिए हम कोई भी हद पार करने को हमेशा तैयार रहते हैं। और जो पहले से हमारे पास है, उसको भी दाँव पर लगाने से हम नहीं चूकते। यही नहीं, जब कभी हमारा ये अधूरापन पूर्ण हो जाता है और हमें वो चीज़ मिल जाती है, जिसकी आस में हम अब तक जी रहे होते हैं, तब हम उस चीज़ के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील हो जाते है और उसे सदा पास रखने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

ऐसी ही परिस्थितियों में फँसे, दो किरदारों की कहानी है ‘चुप्पी’। एक टीवी नेटवर्क का सीईओ गौतम सिकंद और साइकोलॉजिस्ट तारा मिले तो थे, एक दूसरे के पूरक बनकर, मगर किस्मत को उनके लिए कुछ और ही मंज़ूर था। प्रेम, परवाह, त्याग और समर्पण, सबकुछ था, इन दोनों के रिश्ते में। फिर भी इन्हें एक दूसरे से दूर होना पड़ा। क्यों होना पड़ा, ये जानने के लिए आपको इसे पढ़ना होगा।

प्रकाशक: साहित्य विमर्श प्रकाशन | प्रकाशन: जनवरी 2023 | पुस्तक लिंक: अमेज़न

तो यह थी लेखिकाओं द्वारा हिंदी में अपराध गल्प श्रेणी में लिखी कुछ पुस्तकें। हालाँकि अभी भी यह संख्या बहुत-बहुत कम है पर हम उम्मीद करते हैं कि हिंदी में अधिक लेखिकाएँ आएँगी और भविष्य में अधिक संख्या में उनकी लिखी रचनाएँ हमें पढ़ने को मिलेंगी।

आपने इन पुस्तकों में से कितनी पढ़ी हैं? अगर हमसे कुछ पुस्तकों के नाम सूची में जोड़ने रह गए हैं तो उनके विषय में हमें ज़रूर बताइएगा। हम उन्हें अपनी सूची में ज़रूर जोड़ना चाहेंगे।


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