कथेतर विधा पर दो टिप्पणियाँ - प्रवीण कुमार झा

कथेतर विधा पर दो टिप्पणियाँ – प्रवीण कुमार झा

लेखक प्रवीण कुमार झा ने साहिंद वेबसाइट में कथेतर विधा के ऊपर दो टिप्पणियाँ प्रकाशित की थीं। यह टिप्पणियाँ चूँकि एक दूसरे से सम्बंधित हैं तो हमने सोचा एक बुक जर्नल पर प्रकाशित करते समय इन्हें एक साथ ही रखा जाए। आप भी पढ़िए:

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व्यंग्य: समोसा और जलेबी - प्रांजल सक्सेना

व्यंग्य: समोसा और जलेबी – प्रांजल सक्सेना

प्रांजल सक्सेना शिक्षक और लेखक हैं। अपनी रचनाओं में हास्य और व्यंग्य का तड़का वो लगाते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़ें अहिष्णुता पर प्रांजल सक्सेना का व्यंग्य ‘समोसा और जलेबी’।

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निबंध: उत्साह - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

निबंध: उत्साह – आचार्य रामचंद्र शुक्ल

दुःख के वर्ग में जो स्थान भय का है, आनंद वर्ग में वही स्थान उत्साह का है। भय में हम प्रस्तुत कठिन स्थिति के निश्चय से विशेष रूप में दुखी और कभी-कभी स्थिति से अपने को दूर रखने के लिए प्रयत्नवान् भी होते हैं। उत्साह में हम आनेवाली कठिन स्थिति के भीतर साहस के अवसर के निश्चय-द्वारा प्रस्तुत कर्म-सुख की उमंग में अवश्य प्रयत्नवान् भी होते हैं।

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मानवीय जीवटता का समय के प्रहार के विरुद्ध संघर्ष – फ्लेमेंको और बुलफाइट

लंदननामा: मानवीय जीवटता का समय के प्रहार के विरुद्ध संघर्ष – फ्लेमेंको और बुलफाइट

फ्लेमेंको और बुलफाइट स्पेन की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इन दोनों अंगों विशेषकर फ्लेमेंको और उसके इतिहास के ऊपर लेखक संदीप नैयर इस लेख में बता रहे हैं। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आएगा।

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पंडी ऑन द वे - दिलीप कुमार

व्यंग्य: पंडी ऑन द वे – दिलीप कुमार

पुस्तक मेलों की अपनी एक अलग धमक होती है। अलग-अलग तरह के लोग वहाँ आते हैं। सबके अपने प्रयोजन होते हैं। पाठक,लेखक, प्रकाशक तो मौजूद रहते ही हैं लेकिन इनके अतिरिक्त भी कुछ लोग होते हैं जो पुस्तक मेलों में बहुदा देखे जाते हैं। लेखक दिलीप कुमार का व्यंग्य ‘पंडी ऑन द वे’ पुस्तक मेलों में मौजूद एक ऐसे ही चरित्र पर चिकोटी काटता है। आप भी पढ़ें।

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भिड़ंत - श्रीराम शर्मा | शिकार साहित्य

भिड़ंत – श्रीराम शर्मा

अगर हिंदी शिकार साहित्य की बात आती है तो पंडित श्रीराम शर्मा का नाम इस श्रेणी में सबसे आगे आएगा। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनका यह संस्मरण ‘भिड़ंत’। यह संस्मरण उनकी पुस्तक शिकार में संकलित है।

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पुस्तक अंश: कोरोया फूल: जन, जंगल, जीवन - अथनास किसपोट्टा

पुस्तक अंश: कोरोया फूल: जन, जंगल, जीवन – अथनास किसपोट्टा

अथनास किसपोट्टा की पुस्तक कोरोया फूल: जन ,जंगल ,जीवन छोटा नागपुर इलाके के आदिवासियों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज है। अपने इन संस्मरणों और लेखों से लेखक ने वहाँ की संस्कृति और उसमें होते बदलावों को दर्शाने का प्रयास किया है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए पुस्तक कोरोया फूल में मौजूद एक लेख ‘गोंगो’।

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वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक रचनाकर के विषय में बता रहे हैं? बताइए तो वह कौन था?

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पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन - प्रेमचंद

पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन – प्रेमचंद

पद्म सिंह शर्मा हिंदी के निबंधकार, आलोचक थे। प्रेमचंद के साथ इनके प्रगाढ़ सम्बन्ध थे। 1932 में पद्म सिंह शर्मा देहावसान के पश्चात प्रेमचंद ने यह लेख उनकी याद में लिखा था। आप भी पढ़ें:

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निबंध: साहित्य की महत्ता - महावीर प्रसाद द्विवेदी

निबंध: साहित्य की महत्ता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

साहित्य का जीवन और समाज के लिए क्या महत्व है? क्यों साहित्य पढ़ना जरूरी है और किस तरह का साहित्य पढ़ा जाना चाहिए? यह महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘साहित्य की महत्ता’ में बताते हैं। आप भी पढ़ें।

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एक रात - रांगेय राघव

एक रात – रांगेय राघव

‘एक रात’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। इसमें उन्होंने अकाल के समय के बंगाल की स्थिति को दर्शाया है। आप भी पढ़ें यह मार्मिक रिपोर्ताज:

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मरेंगे साथ, जिएँगे साथ - रांगेय राघव

मरेंगे साथ, जिएँगे साथ – रांगेय राघव

‘मरेंगे साथ, जिएँगे साथ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। एक डॉक्टरी दल के साथ जब वो गाँव में टीका लगाने गए तो वहाँ की क्या हालत थी और उधर उनके क्या अनुभव रहे यह वह इधर बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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