भिड़ंत – श्रीराम शर्मा
अगर हिंदी शिकार साहित्य की बात आती है तो पंडित श्रीराम शर्मा का नाम इस श्रेणी में सबसे आगे आएगा। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनका यह संस्मरण ‘भिड़ंत’। यह संस्मरण उनकी पुस्तक शिकार में संकलित है।
भिड़ंत – श्रीराम शर्मा Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
अगर हिंदी शिकार साहित्य की बात आती है तो पंडित श्रीराम शर्मा का नाम इस श्रेणी में सबसे आगे आएगा। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनका यह संस्मरण ‘भिड़ंत’। यह संस्मरण उनकी पुस्तक शिकार में संकलित है।
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अथनास किसपोट्टा की पुस्तक कोरोया फूल: जन ,जंगल ,जीवन छोटा नागपुर इलाके के आदिवासियों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का दस्तावेज है। अपने इन संस्मरणों और लेखों से लेखक ने वहाँ की संस्कृति और उसमें होते बदलावों को दर्शाने का प्रयास किया है। एक बुक जर्नल पर पढ़िए पुस्तक कोरोया फूल में मौजूद एक लेख ‘गोंगो’।
पुस्तक अंश: कोरोया फूल: जन, जंगल, जीवन – अथनास किसपोट्टा Read More
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक रचनाकर के विषय में बता रहे हैं? बताइए तो वह कौन था?
वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच Read More
पद्म सिंह शर्मा हिंदी के निबंधकार, आलोचक थे। प्रेमचंद के साथ इनके प्रगाढ़ सम्बन्ध थे। 1932 में पद्म सिंह शर्मा देहावसान के पश्चात प्रेमचंद ने यह लेख उनकी याद में लिखा था। आप भी पढ़ें:
पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन – प्रेमचंद Read More
साहित्य का जीवन और समाज के लिए क्या महत्व है? क्यों साहित्य पढ़ना जरूरी है और किस तरह का साहित्य पढ़ा जाना चाहिए? यह महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘साहित्य की महत्ता’ में बताते हैं। आप भी पढ़ें।
निबंध: साहित्य की महत्ता – महावीर प्रसाद द्विवेदी Read More
‘एक रात’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। इसमें उन्होंने अकाल के समय के बंगाल की स्थिति को दर्शाया है। आप भी पढ़ें यह मार्मिक रिपोर्ताज:
एक रात – रांगेय राघव Read More
‘मरेंगे साथ, जिएँगे साथ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। एक डॉक्टरी दल के साथ जब वो गाँव में टीका लगाने गए तो वहाँ की क्या हालत थी और उधर उनके क्या अनुभव रहे यह वह इधर बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
मरेंगे साथ, जिएँगे साथ – रांगेय राघव Read More
‘अदम्य जीवन’ लेखक रांगेय राघव का लिखा एक रिपोर्ताज है। इसमें ढाका के एक गाँव शिद्धिरगंज जाकर उन्होंने वहाँ जो कुछ देखा वो बताया गया है। बंगाल में हुए अकाल और महामारी के बाद यह यात्रा की गयी थी जिसमें गाँव के जीवन पर पड़े असर और गाँव वासियों की जीवटता का मार्मिक चित्रण वो करते हैं।
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अदम्य जीवन – रांगेय राघव Read More
‘बाँध भँगे दाओ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है जिसमें उन्होंने कलकत्ते से कुष्टिया नामक कस्बे में आगमन के विषय में बताया है। बंगाल के अकाल और महामारी के बाद उन्होंने यहाँ का दौरा किया था। इस दौरान कैसे वहाँ जमाखोरी हो रही थी और जनता उससे कैसे लड़ी इसी का ब्योरा उन्होंने इधर दिया है। आप भी पढ़ें:
बाँध भँगे दाओ -रांगेय राघव Read More
जीवन में साहित्य का स्थान प्रेमचंद का लिखा निबंध है। यह 1932 के हंस के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:
निबंध: जीवन में साहित्य का स्थान – प्रेमचंद Read More
गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं।आज वह अपने खास अंदाज में एक लेखक के विषय में बता रहे हैं? …
वो कौन था? | गजानन रैना | रैना उवाच Read More
अगाथा और पोइरो; स्रोत: विकिपीडिया, पिक्साबे गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। उन्होंने रहस्यकथाओं की रानी कही जाने वाली …
फसाने जैसा फसानेकार: अगाथा और पोइरो Read More