मरेंगे साथ, जिएँगे साथ - रांगेय राघव

मरेंगे साथ, जिएँगे साथ – रांगेय राघव

‘मरेंगे साथ, जिएँगे साथ’ रांगेय राघव का लिखा रिपोर्ताज है। एक डॉक्टरी दल के साथ जब वो गाँव में टीका लगाने गए तो वहाँ की क्या हालत थी और उधर उनके क्या अनुभव रहे यह वह इधर बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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अदम्य जीवन - रांगेय राघव

अदम्य जीवन – रांगेय राघव

‘अदम्य जीवन’ लेखक रांगेय राघव का लिखा एक रिपोर्ताज है। इसमें ढाका के एक गाँव शिद्धिरगंज जाकर उन्होंने वहाँ जो कुछ देखा वो बताया गया है। बंगाल में हुए अकाल और महामारी के बाद यह यात्रा की गयी थी जिसमें गाँव के जीवन पर पड़े असर और गाँव वासियों की जीवटता का मार्मिक चित्रण वो करते हैं।

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पुस्तक टिप्पणी: एक म्युजिकल दस्तावेज है पराग डिमरी का 'श्रवण राठौड़: हाँ एक सनम चाहिए आशिकी के लिए'

पुस्तक टिप्पणी: एक म्युजिकल दस्तावेज है पराग डिमरी की पुस्तक ‘श्रवण राठौड़: हाँ एक सनम चाहिए आशिकी के लिए’

‘श्रवण राठौड़: हाँ एक सनम चाहिए आशिकी के लिए’ लेखक पराग डिमरी द्वारा संगीत निर्देशक श्रवण राठौर पर लिखी पुस्तक है। इस पुस्तक पर लेखक योगेश मित्तल ने टिप्पणी लिखी है। आप भी पढ़ें।

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अगर दिल को पढ़ना है तो पढ़कर देखिये ‘सफरनामा – कर्मभूमि की जीवनयात्रा’

वरिष्ठ लेखक योगेश मित्तल पिछले पचास वर्ष से लेखन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपना अधिकतर जीवन ट्रेड नामों के लिए लिखते हुए बिताया है पर अब फेसबुक, ब्लॉग, पुस्तकों …

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किताब परिचय: समथिंग सर्पीला – सुनील कुमार ‘सिंक्रेटिक’

  पुस्तक के विषय में ये सच है कि साँप ही वह जंगली जीव है जिसके काटने से सबसे ज्यादा लोग मरते हैं फिर सबसे ज्यादा इंसानों की हत्या का …

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पुस्तक टिप्पणी: काम्बोजनामा: किस्सा किस्सागो का | राम 'पुजारी' | नीलम जासूस कार्यालय

पुस्तक टिप्पणी: काम्बोजनामा: किस्सा किस्सागो का | राम ‘पुजारी’ | नीलम जासूस कार्यालय

राम पुजारी द्वारा लिखी गई कांबोजनामा वेद प्रकाश कांबोज की जीवनी नहीं है बल्कि वह उनके लेखकीय जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाती हुई किताब है। पुस्तक नीलम जासूस कार्यालय द्वारा प्रकाशित की गयी है। पढ़ें पुस्तक पर लिखी यह टिप्पणी:

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अखिलेश के जीवनानुभव, उनका संघर्ष, परिस्थितियाँ और उनसे जुड़े लोगों की कथा है ‘अक्स’

राज नारायण साहित्यानुरागी हैं। वह पुस्तकों के विषय में अपनी टिप्पणियाँ अक्सर अपनी फेसबुक वाल और ब्लॉग पर साझा करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए लेखक अखिलेश (Akhilesh) के …

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साहित्य विमर्श प्रकाशन की पुस्तकों का प्री ऑर्डर शुरू

साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा दो पुस्तकों का प्री ऑर्डर शुरू किया गया है। प्री ऑर्डर के तहत आप इन पुस्तकों को आकर्षक दामों में क्रय कर सकते हैं। इस बार …

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पुस्तक समीक्षा: ‘तलाश’: क्या-क्यों-कैसे की प्रश्नाकुल पड़ताल

‘तलाश’ लेखक  विनय प्रकाश तिर्की के 32 लेखों का संग्रह है। तीन खंडों में विभाजित इस पुस्तक में उनके यात्रा संस्मरण, जनजातीय संस्कृति से जुड़े आलेख और ईसाइयत से संबंधित …

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एक कर्मयोगी के जीवन और जीविका की शानदार दास्ताँ है ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’

डॉ. अरुण कुकसाल वरिष्ठ समाज विज्ञानी, प्रशिक्षक, लेखक एवं घुमक्कड़ हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए लेखक ललित मोहन रयाल की अपनी पिता पर लिखी किताब काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि …

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न बैरी न कोई बेगाना: कुछ आपबीती, कुछ जगबीती

सुरेन्द्र मोहन पाठक आज हिन्दी अपराध साहित्य के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखक हैं। सन 2018 में जब उनकी आत्मकथा का पहला भाग न बैरी न कोई बैगाना प्रकाशित हुआ था तो मित्र राशीद शेख ने पुस्तक पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखी थी। उस वक्त यह लेख एक हिन्दी अखबार में भी प्रकाशित हुआ था। राशीद शेख का लिखा यह लेख बहुत ही खूबसूरत तरीके से किताब के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। आप भी पढ़िए।

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पृथ्वी के छोर पर – डॉ शरदिन्दु मुकर्जी

किताब मार्च 22 2020 से अप्रैल 2020 के बीच पढ़ी गयी संस्करण विवरण: फॉर्मेट: पेपरबैक पृष्ठ संख्या: 232 प्रकाशक: अंजुमन प्रकाशन आईएसबीएन: 9789386027290 पृथ्वी के छोर पर – डॉ शरदिन्दु …

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