कार गयी खाई में… …और कहानी खत्म - योगेश मित्तल

कार गयी खाई में… …और कहानी खत्म – योगेश मित्तल

दत्त भारती के उपन्यास पाठकों की पसंद रहते थे। योगेश मित्तल भी उनके प्रशंसकों में से एक थे। दत्त भारती असल जीवन में कैसे थे और किस तरह उनके एक उपन्यास की कहानी बनी यह वह इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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कहानीकला - प्रेमचंद

कहानी कला – प्रेमचंद

कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:

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निबंध: भय - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

निबंध: भय – आचार्य रामचंद्र शुक्ल

किसी आती हुई आपदा की भावना या दुख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तम्भ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पहुँच से बाहर होने के लिए।

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पुस्तक टिप्पणी: बेगमपुल से दरियागंज - यशवंत व्यास

बेगमपुल से दरियागंज: एक पुस्तक जो बेहतर से बेहतरीन बनते-बनते रह गयी

‘बेगमपुल से दरियागंज: देसी पल्प की दिलचस्प दास्तान’ हिंदी लोकप्रिय साहित्य पर यशवंत व्यास द्वारा लिखी पुस्तक है। इस पुस्तक पर लेखक पराग डिमरी ने यह संक्षिप्त टिप्पणी लिखी है। आप भी पढ़ें:

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निबंध: उपन्यास रचना - प्रेमचंद

निबंध: उपन्यास रचना – प्रेमचंद

उपन्यास लेखन करते समय किन बातों का खयाल रखना चाहिए? उपन्यास कितने तरह के होते हैं और क्या चीज इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती है। उपन्यास में प्लॉट का क्या महत्व है? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनसे हर लेखक कभी न कभी जूझता है। कथासम्राट प्रेमचंद द्वारा इस विषय पर लिखा यह निबंध ‘उपन्यास रचना’ इन सभी प्रश्नों के उत्तर देता है। आशा है यह पाठकों और लेखकों के काम आएगा। आप भी इसे पढ़ें:

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हिंदी निबंध: गालियाँ - प्रेमचंद

गालियाँ – प्रेमचंद

समाज में किस तरह गालियाँ व्याप्त हैं इस पर प्रेमचंद ने उर्दू में यह निबंध लिखा था। यह निबंध मूल रूप से उर्दू में प्रकाशित हुआ था और उर्दू मासिक पत्रिका ‘ज़माना’ के दिसंबर 1909 के अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:

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ऐतिहासिक उपन्यास - राहुल सांकृत्यायन

ऐतिहासिक उपन्यास – राहुल सांकृत्यायन

ऐतिहासिक उपन्यास हर समय लिखे जाते रहे हैं। आज भी यह लिखे जा रहे हैं। ऐसे उपन्यास लिखते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए यही राहुल सांकृत्यायान अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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साहित्य और भाषा - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

साहित्य और भाषा – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

साहित्य की भाषा कैसी होनी चाहिए? सरल या क्लिष्ट। यह एक ऐसा विषय है जिस पर बहस निरंतर चलती रहती है। इस विषय पर सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा भी लिखा गया था। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र - गोपाल राम गहमरी

संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र – गोपाल राम गहमरी

1884 में गोपाल राम गहमरी को भारतेंदु हरिश्चंद्र की मंडली द्वारा मंचित नाटकों देखने का अवसर प्राप्त हुआ था। स्वयं भारतेंदु ने भी सत्य हरिश्चंद्र में हरिश्चंद्र की भूमिका निभायी थी। यह अवसर गोपाल राम गहमरी को कैसे मिला और इन नाटकों को देखने का उनका अनुभव कैसा था, यह वह भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए इस संस्मरण में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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यात्रा वृत्तांत: पेरिस में

यात्रा वृत्तांत: पेरिस में – राहुल सांकृत्यायन

वर्ष 1932 में राहुल सांकृत्यायन ने 14 से 26 नवम्बर के बीच के 14 दिन पैरिस में बिताए थे। ‘पेरिस में’ में उनके इन्हीं दिनों का वृत्तांत है। आप भी पढ़ें:

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यात्रा वृत्तांत: तिब्बत में प्रवेश - राहुल सांकृत्यायन

यात्रा वृत्तांत: तिब्बत में प्रवेश – राहुल सांकृत्यायन

‘तिब्बत में प्रवेश’ राहुल सांकृत्यायन का लिखा यात्रा वृत्तांत है। इस वृत्तांत में वह तिब्बत में तीसरी बार प्रवेश करने का अनुभव पाठकों से साझा कर रहे हैं। 21 अप्रैल से 6 मई के बीच की गयी यात्रा के विषय में वह बता रहे हैं। आप भी पढ़ें।

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निबंध: उत्साह - आचार्य रामचंद्र शुक्ल

निबंध: उत्साह – आचार्य रामचंद्र शुक्ल

दुःख के वर्ग में जो स्थान भय का है, आनंद वर्ग में वही स्थान उत्साह का है। भय में हम प्रस्तुत कठिन स्थिति के निश्चय से विशेष रूप में दुखी और कभी-कभी स्थिति से अपने को दूर रखने के लिए प्रयत्नवान् भी होते हैं। उत्साह में हम आनेवाली कठिन स्थिति के भीतर साहस के अवसर के निश्चय-द्वारा प्रस्तुत कर्म-सुख की उमंग में अवश्य प्रयत्नवान् भी होते हैं।

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