कहानी कला – प्रेमचंद
कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:
कहानी कला – प्रेमचंद Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
कहानी कैसी होनी चाहिए? कहानी लिखते समय कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? यही लेखक प्रेमचंद द्वारा अपने इस लेख में बताया गया है। आप भी पढ़ें:
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उपन्यास लेखन करते समय किन बातों का खयाल रखना चाहिए? उपन्यास कितने तरह के होते हैं और क्या चीज इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती है। उपन्यास में प्लॉट का क्या महत्व है? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनसे हर लेखक कभी न कभी जूझता है। कथासम्राट प्रेमचंद द्वारा इस विषय पर लिखा यह निबंध ‘उपन्यास रचना’ इन सभी प्रश्नों के उत्तर देता है। आशा है यह पाठकों और लेखकों के काम आएगा। आप भी इसे पढ़ें:
निबंध: उपन्यास रचना – प्रेमचंद Read More
समाज में किस तरह गालियाँ व्याप्त हैं इस पर प्रेमचंद ने उर्दू में यह निबंध लिखा था। यह निबंध मूल रूप से उर्दू में प्रकाशित हुआ था और उर्दू मासिक पत्रिका ‘ज़माना’ के दिसंबर 1909 के अंक में प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:
गालियाँ – प्रेमचंद Read More
डॉक्टर चड्ढा एक नामी डॉक्टर थे जिनके हर काम का एक समय नियत था। कुछ भी हो जाये वो अपने नियम से न डिगते थे। यही कारण है उन्होंने उस बूढ़े की मदद नहीं की थी और गोल्फ खेलने चले गए थे। पर अब उन्हें मदद की आवश्यकता थी। आगे क्या हुआ ये जानने के लिए पढ़ें प्रेमचंद की कहानी ‘मंत्र’।
कहानी: मंत्र – प्रेमचंद Read More
कथासम्राट प्रेमचंद की पहली रचना कौन सी थी? अपने बचपन में उन्होंने क्या क्या पढ़ा था? यह सब वह इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
मेरी पहली रचना – प्रेमचंद Read More
पार्वती को लगता था कि स्त्री की इज़्ज़त गहनों से ही होती है। इसीलिए जब उसके पति सुरेंद्र ने उसे नये गहने लाकर दिये तो वह बहुत खुश हुई। उसे लगा था कि अब उसके मायके में उसकी पूछ होगी। पर क्या असल में ऐसा हुआ? क्या उसकी सोच सही थी? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘जंजाल’:
कहानी: जंजाल – प्रेमचंद Read More
रज़िया के पति रामू ने रज़िया की उम्र होने पर एक नयी पत्नी लाने का फैसला किया और आखिर उसकी सौत ले ही आया। वह घर जो रज़िया ने अपनी मेहनत से बनाया था अब उसका नहीं रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘सौत’:
कहानी: सौत – प्रेमचंद Read More
नये ज़माने और पुराने ज़माने में क्या फर्क था? नये ज़माने में क्या अच्छी बातें हैं और कौन सी बुरी और पुराने ज़माने के हिसाब से वह कहाँ ठहरता है। और नये ज़माने के शासकों को किन बातों का खयाल रखना चाहिए? यह सब प्रेमचंद अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:
पुराना ज़माना – नया ज़माना – प्रेमचंद Read More
उपन्यास साहित्य की सबसे प्रसिद्ध विधाओं में से एक है। उपन्यास, उसकी विषय वस्तु, और उसमें गढ़े गए चरित्र, कैसे होने चाहिए? किस तरह के उपन्यास अच्छे कहे जाएँगे और वह कौन सी चीजें हैं जो उपन्यास को कमजोर बना सकती हैं? इन्हीं सब बातों के ऊपर लेखक प्रेमचंद ने लिखा है। यह लेख 1930 के मार्च माह में प्रकाशित ‘हंस’ पत्रिका के अंक में सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था। आप भी पढ़ें:
निबंध: उपन्यास के विषय – प्रेमचंद Read More
कथावाचक घर से एक महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकले थे कि वो घटना घट गयी। उन्होंने फैसला कर लिया कि वो यूँ ही दोषी को जाने नहीं देंगे। आखिर कथावाचक के साथ क्या हुआ? उन्होंने क्या करने का निर्णय लिया?
कहानी: मोटर के छींटे – प्रेमचंद Read More
प्रवीण एक लेखक हैं जिन्होंने लेखन पर लगभग अपना सर्वस्व लुटा दिया लेकिन फिर आर्थिक तौर उन्हें कुछ हासिल न हो सका। ऐसे में जब एक शहर के नामी रईस ने उन्हें अपने यहाँ दावत के लिए बुलाया तो उन्हें लगने लगा कि उनका लेखन सफल हुआ है क्योंकि प्रतिष्ठावान लोग उन्हें बुला रहे हैं। उनका सम्मान हो रहा है। पर यह कितना सच था?
आगे जानने के लिए एक बुक जर्नल पर पढ़ें कथासम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘लेखक’।
‘बाबा जी का भोग’ प्रेमचंद की लिखी लघुकथा है। मेहनतकश छोटे किसानों की हालत यह लघु-कथा ब्यान करती है और सोचने को काफी कुछ दे जाती है। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: बाबा जी का भोग – प्रेमचंद Read More