लघु-कथा: आप भी बड़े 'ओ' हैं - जी. पी. श्रीवास्तव

लघु-कथा: आप भी बड़े ‘ओ’ हैं – जी. पी. श्रीवास्तव

‘आप भी बड़े ‘ओ’ हैं’ लेखक जी.पी. श्रीवास्तव की लिखी व्यंग्य कथा है। अक्सर सरकारी अफ़सरों में एक तरह का दंभ देखने को मिलता है। ऐसा लगता है वह पद पाते ही आम लोगों को कुछ समझते ही नहीं हैं। इस कहानी में वह इसी अफ़सरी प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते दिखते हैं। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: रेबीज़ - आलोक कुमार

लघु-कथा: रेबीज़ – आलोक कुमार

कथावाचक के दोस्त को कुत्तों से बहुत प्यार था। कुत्तों पर होते ज़ुल्म को वह देख नहीं पाता था। ऐसे ही एक मामले में वह कथावाचक को अपने साथ ले जा रहा था। आगे क्या हुआ? पढ़ें लेखक आलोक कुमार की लघु-कथा ‘रेबीज़’:

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लघु-कथा: फंदा - आनंद के सिंह

लघु-कथा: फंदा – आनंद के सिंह

‘टिक टॉक टिक टॉक’ और ‘हीरोइन की हत्या’ के लेखक आनंद कुमार सिंह ने यह लघु-कथा ‘फंदा’ 2018 में लिखी थी। यह लघु-कथा एक प्रतियोगिता के लिए लिखी गई थी जिसमें उन्हें तृतीय स्थान मिला था।
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लघु-कथा: चाँद गवाही देगा - गजानन रैना

लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।

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कहानी: सुखमय जीवन - चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी: सुखमय जीवन – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

कहानी का कथावाचक एल एल बी की परीक्षा के परिणाम के देर से आने से परेशान था। अपने को तरो ताज़ा करने के लिए उसने अपनी साइकल से बाहर का चक्कर लगाने की ठानी। आगे क्या हुआ, ये जानने के लिए पढ़ें चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘सुखमय जीवन’।

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लघु-कथा: साँप का मणि - प्रेमचंद

लघु-कथा: साँप का मणि – प्रेमचंद

कथावाचक को जब पता लगा कि उसका दोस्त उसे साँप का मणि दिलवा सकता है तो उसका हैरान होना लाज़मी था। आखिर क्या था ये मणि? क्या असल में ये साँप का मणि था? पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की यह लघु-कथा ‘साँप का मणि’।

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लघु-कथा: लड़ाई - भुवनेश्वर

लघु-कथा: लड़ाई – भुवनेश्वर

‘लड़ाई’ भुवनेश्वर की लिखी लघु-कथा है। यह रचना हंस पत्रिका के वर्ष 1939 के सितम्बर में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: दरिंदे - योगेश मित्तल

लघु-कथा: दरिंदे – योगेश मित्तल

‘दरिंदे’ लेखक योगेश मित्तल की लिखी लघु-कथा है। यह रचना ‘अपराध कथाएँ’ नामक पत्रिका के विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें।

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लघुकथा: जी पी टी - शोभित गुप्ता

लघुकथा: जीपीटी – शोभित गुप्ता

आज की दुनिया एआईमय हो चुकी है। एक दौड़ सी लगी है जिसमें मनुष्य ए आई के साथ साथ दौड़ रहा है। इस दौड़ का क्या नतीजा निकलेगा ये तो भविष्य ही तय करेगा। लेकिन ये बात भी सच है कि तकनीक कोई बुरी नहीं होती लेकिन उसका प्रयोग किस तरह किया जा रहा है वह उसे बुरा या अच्छा बनाता है। इसी प्रसांगिक विषय को शोभित गुप्ता ने अपनी इस लघु-कथा में बुना है। आशा है ये लघु-कथा आपको पसंद आएगी।

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लघुकथा: बाबा जी का भोग - प्रेमचंद

लघु-कथा: बाबा जी का भोग – प्रेमचंद

‘बाबा जी का भोग’ प्रेमचंद की लिखी लघुकथा है। मेहनतकश छोटे किसानों की हालत यह लघु-कथा ब्यान करती है और सोचने को काफी कुछ दे जाती है। आप भी पढ़ें:

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लघु-कथा: विजया - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: विजया – जयशंकर प्रसाद

कमल का सब कुछ लुट चुका था। अब उसके पास बचा था तो केवल एक रुपया। उसने इस एक रुपये का क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी यह लघु-कथा ‘विजया’।

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हाथी के दाँत - विकास नैनवाल | कहानी

लघु-कथा: हाथी के दाँत – विकास नैनवाल ‘अंजान’

‘हाथी के दाँत’ विकास नैनवाल ‘अंजान’ की लिखी लघु-कथा है। अक्सर हमारी कथनी और करनी में फर्क होता है। कहानी इसी बात को रेखांकित करती है। यह प्रथम बार उत्तरांचल पत्रिका के अगस्त 2019 अंक में प्रकाशित हुई थी।

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