कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

कहानी: श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सुपर्णा पं. रामखेलावन की पुत्री थी जिसका विवाह उन्होंने श्रीमान् पं. गजानंद शास्‍त्री के साथ किया था। वह सुपर्णा से लगभग तीस साल बढ़े थे और सुपर्णा से उनकी चौथी शादी हुई थी। यह विवाह कैसे हुआ और सुपर्णा किस तरह से श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी बनी और श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी का जीवन आगे कैसा रहा? इसकी कथा आप भी पढ़ें:

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कहानी: आवारागर्द - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

कहानी: आवारागर्द – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

वह एक आवारागर्द था। आवारागर्दी का जीवन जीता है। ऐसे ही वह काश्मीर पहुँच गया था। वहाँ जाकर उसने क्या किया? जानने के लिए पढ़ें आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानी ‘आवारागर्द’

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कहानी: टू फैट लेडीज़ - अनुपमा नौडियाल

कहानी: टू फैट लेडीज़ – अनुपमा नौडियाल

क्लब कल्चर आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों के जीवन एक हिस्सा रहा है। यहाँ वह मिलने जुलने और समय बिताने जाते हैं। अपनी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’ के माध्यम से लेखिका अनुपमा नौडियाल ने ऐसे ही एक वुमन्स क्लब की मीटिंग को दर्शाया है। यहाँ जो कुछ होता है उसके माध्यम से लेखिका ने इस क्लब संस्कृति और वहाँ मौजूद लोगों के बनावटीपन और दिखावेबज़ी पर कटाक्ष किया है। आप भी पढ़ें उनकी लिखी कहानी ‘टू फैट लेडीज़’:

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लघु-कथा: चाँद गवाही देगा - गजानन रैना

लघु-कथा: चाँद गवाही देगा – गजानन रैना

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। खास अंदाज में लिखी अपनी साहित्यिक टिप्पणी के लिए वह जाने जाते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़ें उनकी लिखी लघु-कथा ‘चाँद गवाही देगा’।

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कहानी: पत्रकार - विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'

कहानी: पत्रकार – विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

मि. सिन्हा ‘लाउड स्पीकर’ नामक समाचार पत्र में एक पत्रकार थे। उनके सम्पादक ने उन्हें एक काम सौंपा था। क्या था ये काम? क्या वो ये कार्य कर पाए?
पढ़ें विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ की कहानी ‘पत्रकार’:

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हिंदी कहानी: भेड़िये - भुवनेश्वर

कहानी: भेड़िये – भुवनेश्वर

‘भेड़िये’ भुवनेश्वर की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी 1938 में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: धर्म संकट - रांगेय राघव

कहानी: धर्म संकट – रांगेय राघव

हरदेव और उसके बेटे भगवानदास के बीच झगड़ा बढ़ता जा रहा था। इन दोनों के झगड़े के बीच हरदेव की पत्नी और भगवानदास की माँ पिसती रहती। वह किसका साथ दे यही उसका धर्मसंकट था। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें रांगेय राघव की कहानी ‘धर्म संकट’:

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माधवराव सप्रे - सम्मान किसे कहते हैं? | हिंदी कहानी

कहानी: सम्मान किसे कहते हैं? – माधवराव सप्रे

अल्लीपाशा ने सुली पर चढ़ाई कर दी थी। वह तुर्किस्तान के बादशाह के लिए सुली को आधीन करना चाहता था। उसने अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए क्या क्या कोशिशें की? पढ़ें माधवराव सप्रे की कहानी ‘सम्मान किसे कहते हैं?’

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कहानी: दुराचारी - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: दुराचारी – सुभद्रा कुमारी चौहान

पंडित जी पड़ोस में रहने वाले दयाशंकर से परेशान थे। वह उन्हें दुराचारी लगता था। वक्त बेवक्त वह गाने बजाता रहते और नाचने गाने वालियों को भी अपने घर बुलाकर ये काम करवाता था। अपने पड़ोसियों से वह उसकी शिकायत करते रहते थे। आगे क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी यह कहानी ‘दुराचारी’:

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कहानी: घिसटता कम्बल - रांगेय राघव

कहानी: घिसटता कम्बल – रांगेय राघव

रागनी और विनय के माध्यम से रंगेय राघव ने शहरों में रहने वाले ऐसे नवयुगलों के जीवन को दर्शा रहे हैं जो कम आय में गुजर बसर करने को मजबूर हैं। विवाह को उन्होंने एक ऐसा कम्बल बताया है जो यात्री के कंधे पर पड़ा रहता है और जैसे जैसे यात्री चलता जाता है वह घिसटते हुए मेला होता जाता है। कहानी पढ़ें:

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एक टोकरी भर मिट्टी - माधवराव सप्रे

कहानी: एक टोकरी भर मिट्टी – माधवराव सप्रे

ज़मींदार साहब की इच्छा थी कि उनके महल के पास मौजूद झोपड़ी तक अपने महल को बढ़ा लें। उन्होंने अपनी इच्छा भी पूरी कर ली। आगे क्या हुआ? पढ़ें माधवराव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’:

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कहानी: जम्बक की डिबिया - सुभद्रा कुमारी चौहान

कहानी: जम्बक की डिबिया – सुभद्रा कुमारी चौहान

प्रोफेसर साहब का कहना था कि एक जम्बक की डिबिया से उन्होंने किसी का खून कर दिया था। उन्होंने ऐसा क्यों कहा था? आखिर किसका खून किया था उन्होंने? पढ़ें सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कहानी ‘जम्बक की डिबिया’:

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