बोझ | शरतचंद्र चट्टोपाध्याय | उपन्यासिका

संस्करण विवरण: फॉर्मैट: हार्डकवर | प्रकाशन: सत्साहित्य प्रकाशन | पृष्ठ: 25  पुस्तक लिंक: अमेज़न  कहानी  नलिनी सत्येन्द्रकुमार की दूसरी पत्नी थी। नलिनी जब शादी करके घरआई तो उसे मालूम चल गया …

बोझ | शरतचंद्र चट्टोपाध्याय | उपन्यासिका Read More

रैना उवाच: अपनी आधुनिकता में भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुईं थीं मन्नू भण्डारी

15 नवंबर 2021 को वरिष्ठ लेखिका मन्नू भण्डारी इस नश्वर संसार से चली गईं। 90 वर्ष का भरपूर जीवन जीने के पश्चात वह एक नवीन यात्रा पर चल पड़ीं। अपने …

रैना उवाच: अपनी आधुनिकता में भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुईं थीं मन्नू भण्डारी Read More

काजल – बिमल मित्र

 संस्करण विवरण:फॉर्मेट: हार्डकवर | पृष्ठ संख्या: 81 | अनुवाद: पुष्पा देवड़ा | मूल भाषा: बांग्ला पुस्तक लिंक: amazon.in | amazon.com  कहानी सुहास रंजन मुखोंपाध्याय कभी पुलिस के बड़े अफसर हुआ करते थे। वह कलकत्ता में अपनी पत्नी काजल के …

काजल – बिमल मित्र Read More
रैना उवाच: जरायम पर रची एक सार्थक कृति है ,'धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे'

रैना उवाच: जरायम पर रची एक सार्थक कृति है ,’धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’

गजानन रैना साहित्यानुरागी है और साहित्य के अलग अलग पहलुओं  और साहित्यिक कृतियों पर बात करने का उनका अपना अलग अंदाज है। रैना उवाच के नाम से वह यह टिप्पणियाँ अपने सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए दूधनाथ सिंह की रचना धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे पर लिखी उनकी टिप्पणी।

रैना उवाच: जरायम पर रची एक सार्थक कृति है ,’धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’ Read More

चौरासी: दंगे की पृष्ठभूमि पर रची दिल को छू जाने वाली एक प्रेम कथा

राघवेन्द्र सिंह एक कुशल संपादक तो हैं ही साथ में एक सजग पाठक भी  हैं। वो अक्सर किताबों पर अपनी राय लिखते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए …

चौरासी: दंगे की पृष्ठभूमि पर रची दिल को छू जाने वाली एक प्रेम कथा Read More

रैना उवाच: अपने समय की आहट को भले से पहचानती हैं ग्लूक की कविताएँ

गजानन रैना साहित्य की विभिन्न विधाओं पर अक्सर लिखते रहते हैं। इस बार नोबेल पुरस्कार विजेता लुईस ग्लूक की कविताओं पर उन्होंने अपने खास अंदाज में लिखा है। आप भी पढ़िये। 

रैना उवाच: अपने समय की आहट को भले से पहचानती हैं ग्लूक की कविताएँ Read More

बोरीवली से बोरीबन्दर तक – शैलेश मटियानी

संस्करण विवरण:फॉरमेट: पेपरबैक | प्रकाशक: हिन्द पॉकेट बुक्स | पृष्ठ संख्या: 128 किताब लिंक: amazon.com | amazon.in कहानी वीरेन की जिंदगी भटकते हुए ही गुजरी थी। कुमाऊँ से दिल्ली और …

बोरीवली से बोरीबन्दर तक – शैलेश मटियानी Read More

कुछ अनकहा सा – तरंग सिन्हा

संस्करण विवरण: फॉर्मैट: ई-बुक | पृष्ठ संख्या: 42 |  एएसआईएन: B08YGJNY13 पुस्तक लिंक: अमेज़न कहानी कबीर को हमेशा से लगता था कि उसके और आयशा के बीच में एक अनकहा सा …

कुछ अनकहा सा – तरंग सिन्हा Read More

रैना उवाच: इस सफर में नींद ऐसी खो गई हम न सोये,रात थक कर सो गई

1 सितंबर को मशहूर लेखक राही मासूम रजा का जन्मदिन पड़ता है। राही मासूम रजा जी का जन्म 1 सितंबर 1927 को गाजीपुर जिले के गंगोलीं गाँव में हुआ था। उन्हें याद करते हुए गजानन रैना ने अपने खास अंदाज में एक लेख लिखा है। आप भी पढ़िए।

रैना उवाच: इस सफर में नींद ऐसी खो गई हम न सोये,रात थक कर सो गई Read More

समीक्षा: चौरासी

‘चौरासी’ लेखक सत्य व्यास की तीसरी किताब है। किताब प्रथम बार 2018 में प्रकाशित हुई थी।  हाल ही में उपन्यास के  ऊपर आधारित वेब सीरीज ग्रहण आयी है जिसे दर्शकों द्वारा …

समीक्षा: चौरासी Read More

वे दोनों और वह – बिमल मित्र

 संस्करण विवरण:फॉर्मेट: हार्डकवर | पृष्ठ संख्या: 33 | अनुवाद: देवलीना पुस्तक लिंक: amazon.in | amazon.com कहानी: अटलबिहारी बसु कभी बदामतल्ले मोहल्ले की शान हुआ करता था। मोहल्ले का हर एक बच्चा अटल जैसा बनना चाहता था। मोहल्ले के लोग …

वे दोनों और वह – बिमल मित्र Read More

रैना उवाच: खरीदी कौड़ियों के मोल

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए बिमल मित्र के उपन्यास ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’ पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

रैना उवाच: खरीदी कौड़ियों के मोल Read More