लघु-कथा: त्याग - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: त्याग – सियारामशरण गुप्त

गांधीजी की गिरफ़्तारी के विरोध में बाज़ार बंद था। ऐसे में कथावाचक के पुत्र जयदेव ने छोटी दाख (किशमिश) खाने की ज़िद की। क्या इस ज़िद को कथावाचक ने पूरा किया। पढ़ें सियारामशरण गुप्त की यह लघु-कथा ‘त्याग’:

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लघु-कथा: काकी - सियारामशरण गुप्त

लघु-कथा: काकी – सियारामशरण गुप्त

श्यामू की काकी चली गयी थी। लोग कहते थे वो रामजी के पास गयी थी। श्यामू ने सोच लिया था वो काकी को बुलाकर रहेगा। उसके पास एक तरकीब जो थी।

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निबंध: घोड़ाशाही - सियारामशरण गुप्त

निबंध: घोड़ाशाही – सियारामशरण गुप्त

राजपाठ पाने में घोड़ों का अपना महत्व रहा है। पहले भी था और अब भी है। पहले घोड़ों का क्या महत्व है और आज घोड़ाशाही में क्या परिवर्तन हुआ है यह इस निबंध में बताया जा रहा है। आप भी पढ़ें:

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कहानी: झूठ-सच - सियारामशरण गुप्त

कहानी: झूठ-सच – सियारामशरण गुप्त

कथावाचक लेखक है जिसकी नजर अपने घर के सामने वाली इमारत पर उठ रही दीवार पर पड़ती है तो उधर उसे एक युवक और युवती नज़र आते हैं। लेखक को लगता है वह युवक और युवती के विषय में अपनी जगह पर बैठ बैठा ही सटीक तौर पर जान सकता है। क्या वह सही है? पढ़ें सियारामशरण गुप्त की कहानी ‘झूठ-सच’:

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