कहानी: अघोरी का मोह - जयशंकर प्रसाद

कहानी: अघोरी का मोह – जयशंकर प्रसाद

कोई उसे अघोरी कहता और कोई योगी। कोई नहीं जानता था कि वो कहाँ से आया था। किशोर अपने परिवार को लेकर घूमने निकला था। ऐसे में वह अघोरी उनके सामने आ गया। आखिर कौन था ये अघोरी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘अघोरी का मोह’।

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लघु-कथा: गुदड़ी में लाल - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: गुदड़ी में लाल – जयशंकर प्रसाद

बुढ़िया चाहती थी कि वो नौकरी करे। किसी की दी हुई भीख लेना उसके आत्मसम्मान को गवारा नहीं था। ऐसे में बाबू रामनाथ ने उसे अपनी दुकान पर रख लिया। यह बुढ़िया कौन थी? आगे उसका जीवन में क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘गुदड़ी में लाल’

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लघु-कथा: गूदड़ साईं - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: गूदड़ साईं – जयशंकर प्रसाद

मोहन ने बहुत दिनों बाद गूदड़ साईं को मोहल्ले में देखा तो उसे आवाज़ लगाई। वह जानना था कि गूदड़ साईं अब उसके घर खाने को क्यों नहीं आता था। गूदड़ साईं ने क्या जवाब दिया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘गूदड़ साईं’

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लघु-कथा: प्रसाद - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: प्रसाद – जयशंकर प्रसाद

‘प्रसाद’ जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। यह उनके संग्रह प्रतिध्वनि में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:

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कहानी: सुनहला साँप - जयशंकर प्रसाद

कहानी: सुनहला साँप – जयशंकर प्रसाद

चंद्रदेव अपने दोस्त देवकुमार के साथ मसूरी घूमने आया था। चंद्रदेव का मानना था कि वह मनुष्य को समझ सकता है वहीं उसके दोस्त का मानना था कि किसी दूसरे मनुष्य की बात तो दूर व्यक्ति अपने आप को भी समझ नहीं पाता है। आखिर कौन सही साबित हुआ। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘सुनहला साँप’।

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