इंद्रजाल - जयशंकर प्रसाद | कहानी

कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘इंद्रजाल’ प्रथम बार इसी नाम से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह में 1961 में प्रकाशित हुई थी। अब एक बुक जर्नल पर पढ़ें गोली और बेला की यह प्रेमकथा।

कहानी: इंद्रजाल – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: अनबोला - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद

जग्गैया और कामैया एक साथ खेला करते थे। उनके बीच चुहलबाज़ी चलती रहती थी। फिर उनके बीच अनबोला हो गया। ये अनबोला क्यों हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा ‘अनबोला’:

लघु-कथा: अनबोला – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: विराम चिन्ह - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद

राधे की बूढ़ी माँ मंदिर के बाहर ही अपनी दुकान लगाती थी और राधे ताड़ी पीने में ही अपना समय बिता देता था। वृद्धा ने सोचा भी नहीं था मंदिर में राधे के कारण कुछ होगा। फिर कुछ हुआ। क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘विराम चिन्ह’।

लघु-कथा: विराम चिन्ह – जयशंकर प्रसाद Read More
कहानी: बनजारा - जयशंकर प्रसाद

कहानी: बनजारा – जयशंकर प्रसाद

नंदू एक बनजारा था जो जंगलों में घूम-घूमकर व्यापार के लिए वस्तु क्रय-विक्रय करता था। मोनी उसी जंगल में रहती थी और उससे वह अक्सर सामान ले लिया करता था। आगे क्या हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘बंजारा’:

कहानी: बनजारा – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: समुद्र-संतरण - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: समुद्र-संतरण – जयशंकर प्रसाद

राजकुमार सुदर्शन समुद्र के किनारे बैठे अपने खयालों में बैठे हुए थे जब उनकी विचार शृंखला को किसी ने आकर तोड़ दिया। आखिर किसने तोड़ी थी उनकी विचार शृंखला?

लघु-कथा: समुद्र-संतरण – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: वैरागी - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: वैरागी – जयशंकर प्रसाद

पहाड़ की तलहटी में वह समतल भूमि थी जहाँ पर उस वैरागी ने अपनी कुटी बनाई थी। उस दिन वैरागी ध्यानमग्न बैठा था जब उसका ध्यान एक पुकार ने तोड़ा। आगे क्या हुआ? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘वैरागी’:

लघु-कथा: वैरागी – जयशंकर प्रसाद Read More
संदेह - जयशंकर प्रसाद

कहानी: संदेह – जयशंकर प्रसाद

रामनिहाल अपना बिखरा हुआ सामान बाँधने में लगा था। जँगले से धूप आकर उसके छोटे-से शीशे पर तड़प रही थी। अपना उज्ज्वल आलोक-खंड, वह छोटा-सा दर्पण बुद्ध की सुंदर प्रतिमा …

कहानी: संदेह – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: पत्थर की पुकार - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: पत्थर की पुकार – जयशंकर प्रसाद

नवल और विमल टहल रहे थे जब उनके बीच साहित्य को लेकर बहस छिड़ी। इस बहस का विषय क्या था और इसका परिणाम क्या निकला। पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘पत्थर की पुकार’।

लघु-कथा: पत्थर की पुकार – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: कलावती की शिक्षा - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद

श्यामसुंदर और कलावती के बीच सोने को लेकर खटपट होना आम बात थी। श्यामसुंदर बैठकर उपन्यास पढ़ना चाहता था और कलावती सोना चाहती थी। जब सोना मुमकिन न हुआ तो कलावती एक चीनी की पुतली लेकर उसे शिक्षा देने लगी। आखिर ये शिक्षा क्या थी? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की यह लघु-कथा ‘कलावती की शिक्षा’।

लघु-कथा: कलावती की शिक्षा – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: खंडहर की लिपि -जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: खंडहर की लिपि – जयशंकर प्रसाद

वह युवक उस मंदिर के अवशेष देखने बार बार जाया करता था। उसी मंदिर में एक जगह कुछ लिखा था। एक अनजान सी लिपि थी जिसे वो समझना चाहता था। क्या उसकी जिज्ञासा क्या शांत हुई? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लघु-कथा ‘खंडहर की लिपि’।

लघु-कथा: खंडहर की लिपि – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: प्रलय - जयशंकर प्रसाद

लघु-कथा: प्रलय – जयशंकर प्रसाद

‘प्रलय’ लेखक जयशंकर प्रसाद की लिखी लघु-कथा है। इसमें लेखक पौराणिक पात्रों को लेकर प्रलय के दिन की कल्पना करते हैं। इन दो पात्रों के बीच जो बातचीत होती है उसके माध्यम से प्रलय और उसके महत्व को भी दर्शाते हैं। आप भी पढ़ें:

लघु-कथा: प्रलय – जयशंकर प्रसाद Read More
लघु-कथा: चक्रवर्ती का स्तम्भ -जयशंकर प्रसाद