लघु-कथा: भूगोल – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
‘भूगोल’ लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी लघु-कथा है। इस लघु-कथा के माध्यम से वह शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हैं। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: भूगोल – चंद्रधर शर्मा गुलेरी Read Moreसाहित्य की बात, साहित्य से मुलाकात
‘भूगोल’ लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी लघु-कथा है। इस लघु-कथा के माध्यम से वह शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हैं। आप भी पढ़ें:
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‘बाबा जी का भोग’ प्रेमचंद की लिखी लघुकथा है। मेहनतकश छोटे किसानों की हालत यह लघु-कथा ब्यान करती है और सोचने को काफी कुछ दे जाती है। आप भी पढ़ें:
लघु-कथा: बाबा जी का भोग – प्रेमचंद Read More
कमल का सब कुछ लुट चुका था। अब उसके पास बचा था तो केवल एक रुपया। उसने इस एक रुपये का क्या किया? पढ़ें जयशंकर प्रसाद की लिखी यह लघु-कथा ‘विजया’।
लघु-कथा: विजया – जयशंकर प्रसाद Read More
‘ककड़ी की कीमत’ लेखक आचार्य चतुरसेन शास्त्री की लिखी कहानी है। यह कहानी 1959 में प्रकाशित ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ और 1961 में प्रकाशित ‘कहानी खत्म हो गयी’ नामक संग्रह में शामिल थी। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने दिल्ली की पुरानी संस्कृति दर्शाने की कोशिश की है। आप भी पढ़ें:
कहानी: ककड़ी की कीमत – आचार्य चतुरसेन शास्त्री Read More
कथावाचक ट्रेन से अपने दोस्त के घर मेरठ जा रहा था जब वह युवती ट्रेन में चढ़ी। कौन थी वह युवती? वह ट्रेन में कहाँ जा रही थी? कथावचक की उसमें रुचि क्यों जागृत हुई? पढ़ें आचार्य चतुरसेन की कहानी ‘क्रांतिकारिणी’।
कहानी: क्रांतिकारिणी – आचार्य चतुरसेन शास्त्री Read More
विलासिनी नगर की प्रसिद्ध नर्तकी की कन्या थी। आजकल वो रोज बाबू विजयकृष्ण, जिन्हें लोग सरकार कहते थे, की अट्टालिका पहुँच जाया करती थी। वह चूड़ीवाली बनकर उनके यहाँ जाती और सरकार की पत्नी को चूड़ियाँ पहनाया करती। वह आख़िरकार ऐसा क्यों कर रही थी? जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘चूड़ीवाली’।
कहानी: चूड़ीवाली – जयशंकर प्रसाद Read More
कथावाचक का अंतिम समय निकट है। ऐसे में वह और उसकी पत्नी उसके जीवन की एक झलक पाठकों के समक्ष रखना चाहते हैं। आप भी पढ़ें भुवनेश्वर की कहानी ‘जीवन की झलक’
कहानी: जीवन की झलक – भुवनेश्वर Read More
‘मास्टरनी’ भुवनेश्वर की लिखी कथा है। यह कथा मई 1938 में ‘चक्कलस’ में प्रकाशित हुई थी। आप भी पढ़ें:
कहानी: मास्टरनी – भुवनेश्वर Read More
जोखू की तबीयत खराब थी और इसलिए घर का गंदा पानी उसे गंगा देना नहीं चाहती थी। वह प्यासा था और इसलिए गंगा ने फैसला किया कि ठाकुर के कुएँ से वह पानी लायेगी।
पढ़ें कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’।
देवनिवास और अमरनाथ साइकल पर निकले थे कि देवनिवास एक बूढ़े से टकरा गया। बूढ़े के साथ उसकी बेटी नीरा भी थी। फिर परिस्थिति कुछ ऐसी बन पड़ी कि देवनिवास और अमरनाथ बूढ़े की कुटिया पर पहुँच गए। आगे जानने के लिए पढ़ें जयशंकर प्रसाद की कहानी ‘नीरा’।
कहानी: नीरा – जयशंकर प्रसाद Read More
वनस्थली के रंगीन संसार में अरुण किरणों ने इठलाते हुए पदार्पण किया और वे चमक उठीं, देखा तो कोमल किसलय और कुसुमों की पंखुरियाँ, बसंत-पवन के पैरों के समान हिल रही थीं। पीले पराग का अंगराग लगने से किरणें पीली पड़ गयी। बसंत का प्रभात था।
कहानी: अपराधी – जयशंकर प्रसाद Read More
पंडित सीतानाथ चौबे मुरादाबाद के प्रसिद्ध वकील थे। समाज में उनकी इज्जत थी। पर फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें भूत दिखने लगा। पढ़िए कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘भूत’। यह कहानी मानसरोवर 4 में संकलित है।
कहानी: भूत – प्रेमचंद Read More