कहानी: झूठ-सच – सियारामशरण गुप्त
कथावाचक लेखक है जिसकी नजर अपने घर के सामने वाली इमारत पर उठ रही दीवार पर पड़ती है तो उधर उसे एक युवक और युवती नज़र आते हैं। लेखक को लगता है वह युवक और युवती के विषय में अपनी जगह पर बैठ बैठा ही सटीक तौर पर जान सकता है। क्या वह सही है? पढ़ें सियारामशरण गुप्त की कहानी ‘झूठ-सच’:
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