रैना उवाच: अपने समय की आहट को भले से पहचानती हैं ग्लूक की कविताएँ

गजानन रैना साहित्य की विभिन्न विधाओं पर अक्सर लिखते रहते हैं। इस बार नोबेल पुरस्कार विजेता लुईस ग्लूक की कविताओं पर उन्होंने अपने खास अंदाज में लिखा है। आप भी पढ़िये। 

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रैना उवाच: इस सफर में नींद ऐसी खो गई हम न सोये,रात थक कर सो गई

1 सितंबर को मशहूर लेखक राही मासूम रजा का जन्मदिन पड़ता है। राही मासूम रजा जी का जन्म 1 सितंबर 1927 को गाजीपुर जिले के गंगोलीं गाँव में हुआ था। उन्हें याद करते हुए गजानन रैना ने अपने खास अंदाज में एक लेख लिखा है। आप भी पढ़िए।

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समीक्षा: चौरासी

‘चौरासी’ लेखक सत्य व्यास की तीसरी किताब है। किताब प्रथम बार 2018 में प्रकाशित हुई थी।  हाल ही में उपन्यास के  ऊपर आधारित वेब सीरीज ग्रहण आयी है जिसे दर्शकों द्वारा …

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रैना उवाच: लेखक और उनके लेखकीय ‘टेल’

गजानन रैना जब लिखते है अनूठा लिखते हैं। साहित्य को देखने की उनकी अपनी एक नजर है। आज उन्होंने लेखकीय टेल पर कुछ लिखा है। आप भी पढ़ें:

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अगले भाग के लिए अच्छी भूमिका बनाता औसत से अच्छा कॉमिक है सर्पसत्र – दीपक पूनियां

दीपक पूनियां राजस्थान के रहने वाले हैं।  कॉमिक बुक्स के दीवाने हैं। हालिया रिलीज़ हुयी सर्पसत्र पर उन्होंने हमें अपने विचार लिखकर भेजे हैं। आप भी पढ़िये। सर्पसत्र प्रकाशक: राज कॉमिक्स …

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समीक्षा: अमोघ – अनुराग कुमार सिंह

अनुराग कुमार सिंह जी की लिखी कहानियाँ वर्षो से राज कॉमिक्स में पढ़ते आ रहा हूँ। उनकी लिखी यह कहानियाँ  मेरी पसंदीदा भी रही है। अनुराग जी ने कुछ समय …

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रावायण – सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’, मनीष खण्डेलवाल

राघवेन्द्र सिंह एक सजग पाठक तो हैं ही साथ में एक कुशल सम्पादक भी हैं। उन्होंने हाल ही में लेखक सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ और मनीष खण्डेलवाल के उपन्यास रावायण पर …

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एक कर्मयोगी के जीवन और जीविका की शानदार दास्ताँ है ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’

डॉ. अरुण कुकसाल वरिष्ठ समाज विज्ञानी, प्रशिक्षक, लेखक एवं घुमक्कड़ हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए लेखक ललित मोहन रयाल की अपनी पिता पर लिखी किताब काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि …

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रैना उवाच: खरीदी कौड़ियों के मोल

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए बिमल मित्र के उपन्यास ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’ पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

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रैना उवाच: कविता

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए कविता के ऊपर लिखी उनकी ये टिप्पणी।

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ओरछा की राय प्रवीन के अद्भुत शौर्य और बुद्धिमत्ता की कहानी है इंद्रप्रिया

नीलेश पवार ‘विक्रम’ राज्य प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हैं। वह होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में रहते हैं। हिन्दी साहित्य और हिन्दी सिनेमा में उनकी विशेष रूचि है जिस पर वह अक्सर …

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रैना उवाच: आवारा मसीहा की छवि और सामाजिक स्वीकृति की चाहत के बीच की खींचतान का नतीजा है अंतिम परिचय

गजानन रैना  सोशल मीडिया में रैना उवाच के नाम से अपने ख़ास अंदाज में अलग अलग विषयों पर अपनी टीप को प्रकाशित करते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़िए शरत चन्द्र चट्टोपाध्य के उपन्यास अंतिम परिचय पर लिखी गयी उनकी पाठकीय टिप्पणी। 

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