कहानी: पैकेज डील - सुमन बाजपेयी

कहानी: पैकेज डील – सुमन बाजपेयी

मनसा एक पढ़ी लिखी स्वतंत्र ख़यालों की लड़की थी। उसका सोचना था कि शादी एक तरह की पैकेज डील होती है जिसमें हर चीज हर किसी के हिस्से नहीं आती। सुबोध को भी मनसा के साथ ऐसे ही एक डील मिली थी। आखिर क्या थी ये डील? जानने के लिए पढ़ें लेखिका सुमन बाजपेयी की कहानी ‘पैकेज डील’।

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पुराना ज़माना - नया ज़माना - प्रेमचंद

पुराना ज़माना – नया ज़माना – प्रेमचंद

नये ज़माने और पुराने ज़माने में क्या फर्क था? नये ज़माने में क्या अच्छी बातें हैं और कौन सी बुरी और पुराने ज़माने के हिसाब से वह कहाँ ठहरता है। और नये ज़माने के शासकों को किन बातों का खयाल रखना चाहिए? यह सब प्रेमचंद अपने इस लेख में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात - 1 - योगेश मित्तल

संस्मरण: अरे यार: अधूरी मुकालात – 1 – योगेश मित्तल

योगेश मित्तल अपने लिखे सजीव संस्मरणों के लिए जाने जाते हैं। अपने इस संस्मरण अधूरी मुलाकात में वह एक क्रिकेट खिलाड़ी से हुई अपनी अधूरी मुलाकात का किस्सा बता रहे हैं। पढ़ें संस्मरण का प्रथम भाग:

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कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्व - प्रवीण कुमार झा

कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्व – प्रवीण कुमार झा

गल्प लेखन में प्रथम पंक्ति का अपना अलग महत्व होता है। अलग -अलग लेखक किस तरह से पहली पंक्ति का प्रयोग करके उससे विभिन्न भाव जागृत करते हैं यह प्रवीण कुमार झा अपने इस लेख में बता रहे हैं। लेखन से जुड़े और लेखन की इच्छा रखने वालों को इस लेख से काफी कुछ सीखने को मिलेगी।

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संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र - गोपाल राम गहमरी

संस्मरण: भारतेंदु हरीश्चंद्र – गोपाल राम गहमरी

1884 में गोपाल राम गहमरी को भारतेंदु हरिश्चंद्र की मंडली द्वारा मंचित नाटकों देखने का अवसर प्राप्त हुआ था। स्वयं भारतेंदु ने भी सत्य हरिश्चंद्र में हरिश्चंद्र की भूमिका निभायी थी। यह अवसर गोपाल राम गहमरी को कैसे मिला और इन नाटकों को देखने का उनका अनुभव कैसा था, यह वह भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए इस संस्मरण में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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दैनिक जागरण बेस्ट सेलर लिस्ट हुई जारी; इन किताबों ने सूची में बनाई जगह

2025 की दूसरी तिमाही की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई अनुवाद श्रेणी में जगह

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। अनुवाद श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:

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यात्रा वृत्तांत: जर्मनी की सैर - राहुल सांकृत्यायन

यात्रा वृत्तांत: जर्मनी की सैर – राहुल सांकृत्यायन

पेरिस की यात्रा के बाद राहुल सांकृत्यायान जर्मनी गए थे। ‘जर्मनी की सैर’ में वह अपने जर्मनी में बिताए दिनों और वहाँ हुए अनुभवों के विषय में बता रहे हैं। आप भी पढ़ें:

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रिवॉल्वर का मिज़ाज : कहानियाँ ऐसे भी बनती हैं

रिवॉल्वर का मिज़ाज : कहानियाँ ऐसे भी बनती हैं – 6

लेखक योगेश मित्तल ने कई नामों से प्रेतलेखन किया है। कुछ नाम ऐसे भी हुए हैं जिनमें उनकी तस्वीर तो जाती थी लेकिन नाम कुछ और रहता था। ऐसा ही एक नाम रजत राजवंशी है। इस नाम से उन्होंने कई उपन्यास लिखे हैं। ऐसा ही एक उपन्यास था ‘रिवॉल्वर का मिज़ाज’। इसी उपन्यास को लिखने की कहानी लेखक ने मई 2021 में अपने फेसबुक पृष्ठ पर प्रकाशित की थी। इसी शृंखला को यहाँ लेखक के नाम से प्रकाशित कर रहे हैं। उम्मीद है पाठको को शृंखला यह पसंद आएगी।

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लघुकथा: जी पी टी - शोभित गुप्ता

लघुकथा: जीपीटी – शोभित गुप्ता

आज की दुनिया एआईमय हो चुकी है। एक दौड़ सी लगी है जिसमें मनुष्य ए आई के साथ साथ दौड़ रहा है। इस दौड़ का क्या नतीजा निकलेगा ये तो भविष्य ही तय करेगा। लेकिन ये बात भी सच है कि तकनीक कोई बुरी नहीं होती लेकिन उसका प्रयोग किस तरह किया जा रहा है वह उसे बुरा या अच्छा बनाता है। इसी प्रसांगिक विषय को शोभित गुप्ता ने अपनी इस लघु-कथा में बुना है। आशा है ये लघु-कथा आपको पसंद आएगी।

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यात्रा वृत्तांत: तिब्बत में प्रवेश - राहुल सांकृत्यायन

यात्रा वृत्तांत: तिब्बत में प्रवेश – राहुल सांकृत्यायन

‘तिब्बत में प्रवेश’ राहुल सांकृत्यायन का लिखा यात्रा वृत्तांत है। इस वृत्तांत में वह तिब्बत में तीसरी बार प्रवेश करने का अनुभव पाठकों से साझा कर रहे हैं। 21 अप्रैल से 6 मई के बीच की गयी यात्रा के विषय में वह बता रहे हैं। आप भी पढ़ें।

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यात्रा वृत्तांत: ल्हासा की ओर - राहुल सांकृत्यायन

यात्रा वृत्तांत: ल्हासा की ओर – राहुल सांकृत्यायन

वह नेपाल से तिब्बत जाने का मुख्य रास्ता है। फरी-कलिङ्पोङ् का रास्ता जब नहीं खुला था, तो नेपाल ही नहीं हिंदुस्तान की भी चीज़ें इसी रास्ते तिब्बत जाया करती थीं। यह व्यापारिक ही नहीं सैनिक रास्ता भी था, इसीलिए जगह-जगह फ़ौजी चौकियाँ और क़िले बने हुए हैं, जिनमें कभी चीनी पलटन रहा करती थी। आजकल बहुत से फ़ौजी मकान गिर चुके हैं।

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व्यंग्य: समोसा और जलेबी - प्रांजल सक्सेना

व्यंग्य: समोसा और जलेबी – प्रांजल सक्सेना

प्रांजल सक्सेना शिक्षक और लेखक हैं। अपनी रचनाओं में हास्य और व्यंग्य का तड़का वो लगाते हैं। आज एक बुक जर्नल में पढ़ें अहिष्णुता पर प्रांजल सक्सेना का व्यंग्य ‘समोसा और जलेबी’।

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