साहित्य और मनोविज्ञान - प्रेमचंद

साहित्य और मनोविज्ञान – प्रेमचंद

साहित्य का वर्तमान युग मनोविज्ञान का युग कहा जा सकता है। साहित्य अब केवल मनोरंजन की वस्तु नहीं है। मनोरंजन के सिवा उसका कुछ और भी उद्देश्य है। वह अब केवल विरह और मिलन के राग नहीं अलापता। वह जीवन की समस्याओं पर विचार करता है, उनकी आलोचना करता है और उनको सुलझाने की चेष्टा करता है।

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दैनिक जागरण बेस्ट सेलर लिस्ट हुई जारी; इन किताबों ने सूची में बनाई जगह

2025 की तीसरी तिमाही की दैनिक जागरण बेस्ट सेलर सूची हुई जारी, इन पुस्तकों ने बनाई कथा श्रेणी में जगह

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितम्बर के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची जारी की जा चुकी है। कथा, कथेतर, अनुवाद और कविता श्रेणी में यह सूची जारी की गयी है। कथा श्रेणी में जिन पुस्तकों ने जगह बनाई है वह निम्न हैं:

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निबंध: साहित्य की महत्ता - महावीर प्रसाद द्विवेदी

निबंध: साहित्य की महत्ता – महावीर प्रसाद द्विवेदी

साहित्य का जीवन और समाज के लिए क्या महत्व है? क्यों साहित्य पढ़ना जरूरी है और किस तरह का साहित्य पढ़ा जाना चाहिए? यह महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘साहित्य की महत्ता’ में बताते हैं। आप भी पढ़ें।

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छलावा – संतोष पाठक

संस्करण विवरण:फॉर्मेट: ई बुक | पृष्ठ संख्या: 426 | प्रकाशन:थ्रिल वर्ल्ड | श्रृंखला: विराट राणा #1 किताब लिंक: पेपरबैक | किंडल 

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