राइटर्स ब्लॉक कैसे तोड़ें? - प्रवीण कुमार झा | लेख | साहिंद

राइटर्स ब्लॉक कैसे तोड़ें? – प्रवीण कुमार झा

एक लेखक कभी नहीं चाहेगा कि उसकी चलती कलम में विराम लगे लेकिन फिर भी लेखक के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उसे लगने लगता है कि उसकी कलम ने उसका साथ छोड़ दिया है। अंग्रेजी में इस स्थिति को राइटर्स ब्लॉक कहा जाता है जब लेखक को सूझता नहीं है कि वो जो लिख रहा था उसे पूरा कैसे करे या कुछ नए लिखने की शुरुआत कैसे करे?

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मैं ऐसा ही हूँ.... - संदीप नैयर | लेख

मैं ऐसा ही हूँ – संदीप नैयर

यूँ तो लगभग सभी का बचपन अलमस्ती और बेफिक्री में बीतता है, मगर मेरा कुछ अधिक ही था। मेरी बचपन और लड़कपन की बेपरवाही लापरवाही की सीमा तक थी। अधिकांश समय मैं दिवास्वप्नों में डूबा रहता। वे दिवास्वप्न आत्ममुग्धता में सने होते।

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कथेतर विधा पर दो टिप्पणियाँ - प्रवीण कुमार झा

कथेतर विधा पर दो टिप्पणियाँ – प्रवीण कुमार झा

लेखक प्रवीण कुमार झा ने साहिंद वेबसाइट में कथेतर विधा के ऊपर दो टिप्पणियाँ प्रकाशित की थीं। यह टिप्पणियाँ चूँकि एक दूसरे से सम्बंधित हैं तो हमने सोचा एक बुक जर्नल पर प्रकाशित करते समय इन्हें एक साथ ही रखा जाए। आप भी पढ़िए:

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भिड़ंत - श्रीराम शर्मा | शिकार साहित्य

भिड़ंत – श्रीराम शर्मा

अगर हिंदी शिकार साहित्य की बात आती है तो पंडित श्रीराम शर्मा का नाम इस श्रेणी में सबसे आगे आएगा। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनका यह संस्मरण ‘भिड़ंत’। यह संस्मरण उनकी पुस्तक शिकार में संकलित है।

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किस्सा ए काफ्का | रैना उवाच

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। उन्होंने फ्रांज़ काफ्का के ऊपर लिखा है। आप भी पढ़िए उनकी यह टिप्पणी।  …

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रैना उवाच: ऐसी किताबें जो हर सुधी पाठक के पास होनी चाहिए

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। अपने इस लेख में वह उन पुस्तकों के विषय में बता रहे हैं …

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शब्द चित्र: ज्यां जेने

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए फ्रांसीसी साहित्यकार ज्याँ जेने (Jene Genet) पर …

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सामाजिक-मानवीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करती थी जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा की लेखनी

सामाजिक-मानवीय मूल्यों को प्रतिबिंबित करती थी जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा की लेखनी

हिन्दी लोकप्रिय साहित्य के क्षेत्र में जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा का नाम ध्रुव तारे के समान टिमटिमाता है। वह ऐसे लेखक रहे हैं जिन्होंने हर तरह का लेखन (जासूसी, सामाजिक और गंभीर) किया है और अपने लेखन में उन्होंने मानवता को सबसे ऊपर रखा। आज उनकी 24 वीं पुण्यतिथि है। उन्हें याद करते हुए लेखक राम ‘पुजारी’ ने यह लेख लिखा है। इस लेख में संक्षिप्त में उनके जीवन को समेटा है। आप भी पढ़िये। 

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रैना उवाच: निर्मल वर्मा

निर्मल वर्मा हिन्दी के ऐसे लेखक रहे हैं जिनकी भाषा ने पाठकों को ही नहीं बल्कि लेखकों को भी मोहा है। कई नये लेखक उन्हें पढ़ने के बाद उनके जैसा …

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अजीब दास्ताँ जिंदगी: लुडविग जोसेफ जोहान विट्गेन्स्टाइन

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। साहित्य की विभिन्न विधाओं पर लिखते रहते हैं। आज एक बुक जर्नल पर पढ़िए उनका लिखा आलेख जो कि एक ऐसे दार्शनिक की कहानी बताता है …

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फसाने जैसा फसानाकार: स्टीफन स्वाइग

  स्टीफन स्वाइग वो एक ऐसा फसानाकार था जिसकी खुद की जिंदगी किसी फसाने से कम न थी।  उसने जिस विधा को हाथ लगाया,  कमाल कर दिखाया। वो जहाँ था, …

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बच्चे – प्रियंवद

गजानन रैना साहित्यानुरागी हैं। सोशल मीडिया पर अलग-अलग साहित्यिक रचनाओं में अपने खास अंदाज में लिखते हैं। उन्होंने लेखक प्रियंवद की कहानी ‘बच्चे’ पर कुछ लिखा है। आप भी पढ़िए।  …

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